कानपुर देहात में ब्रजेश के मौसेरे भाई अखिलेश और फुफेरे भाई मुकेश को ले जाकर मारपीट करने के आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की तहरीर अफसरों ने दबा ली है। पुलिस ने अभी तक चौकी प्रभारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं की है। एसडीएम राजीव राज सीओ को तहरीर देने की बात कह रहे है तो सीओ आशा पाल तहरीर न मिलने की बात बोल रहे हैं।
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ब्रजेश हत्याकांड
- फोटो : amar ujala
सीओ का कहना है कि तहरीर उन्हें नहीं पूर्व राज्यमंत्री सतीश पाल को दी गई थी। चौरा स्थित धर्मकांटा मैनेजर ब्रजेश का शव बरामद होने के बाद परिजन पुलिस की हीलाहवाली व परिजनों पर ही जुल्म ढाने के आरोप लगा रहे हैं। ब्रजेश के मौसेरे भाई अखिलेश पाल ने बताया था कि 18 जुलाई को अमरौधा चौकी इंचार्ज राकेश कुमार उसे और ब्रजेश के फुफेरे भाई मुकेश को थाने ले गए।
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ब्रजेश हत्याकांड
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वहां उन दोनों को तीन दिनों तक रखा गया। इस दौरान पुलिस लगातार पीटती रही। उन पर ब्रजेश की हत्या कबूलने का दबाव बनाया जाता था। पिटाई से अखिलेश के सिर व कान मेें चोट आई थी। मुकेश के हाथ पर पैर रखकर मोड़ा गया था। इससे उसका हाथ टूट गया था।
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ब्रजेश हत्याकांड
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बुधवार को अकबरपुर में पोस्टमार्टम होने के बाद ब्रजेश का शव अंतिम संस्कार को ले जाते समय आक्रोशित परिजनों ने कानपुर-झांसी हाईवे पर जाम लगा दिया था। उन्होंने मारपीट करने वाले चौकी इंचार्ज व अन्य पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की मांग की थी। इस दौरान पूर्व राज्यमंत्री सतीश पाल, एसडीएम व सीओ ने रिपोर्ट दर्ज करने के लिए लिखित तहरीर मांगी थी।
अखिलेश व मुकेश ने चौकी इंचार्ज के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के लिए मौके पर ही तहरीर लिखकर दे दी थी। जिम्मेदार अफसर रिपोर्ट दर्ज कराने के बजाय उसे दबाकर बैठ गए हैं। इससे परिजनों मेें नाराजगी है। उनका कहना है कि दोषी पुलिस कर्मियों को बचाया जा रहा है।