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Raju Srivastava Passed Away: 2005 में लाफ्टर चैलेंज ने दी पहचान, शूटिंग देखने के लिए ग्रीन बेल्ट पर भी चढ़े

Wed, 21 Sep 2022 11:19 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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राजू श्रीवास्तव - फोटो : amar ujala
कानपुर के मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव का निधन हो गया है। वो 41 दिनों से एम्स में भर्ती थे। कुछ दिनों पहले ही दिल का दौरा पड़ने के बाद से ही कॉमेडियन अस्पताल में भर्ती थे। हम आपको उनके कुछ खास किस्सों के बारे में बताने जा रहे हैं।

स्कूल में मिमिक्री सुनने के लिए लगती थी भीड़
हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव की मिमिक्री के चर्चे, तो स्कूल के समय से ही चले आ रहे हैं। मगर उन्हें अपनी असली पहचान 2005 में लाफ्टर चैलेंज में आने के बाद मिली। जिस समय वह स्कूल में बिक्री करते थे, तो मित्रों का जमावड़ा लग जाता था। यह कहना है राजू श्रीवास्तव के बचपन के मित्र संजय कपूर का। के ब्लॉक निवासी संजय कपूर ने बताया कि 1978 में सुभाष पब्लिक स्कूल में हम लोग साथ में ही पढ़ते थे। सन 1983 में पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों लोग साथ-साथ मुंबई भी गए।
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राजू श्रीवास्तव
वो बताते हैं कि मैं कैमरे के पीछे काम करता था, तो राजू भाई कैमरे के सामने काम करते थे। राजू स्कूल में अमिताभ बच्चन की मिक्री किया करते थे। धीरे-धीरे वह धर्मेंद्र वह अन्य अभिनेताओं की भी मिक्री करने लगे। कभी-कभी तो शिक्षकों ने उन्हें इस बात को लेकर पीट भी दिया। मगर एक दो बार तो ऐसा हुआ कि शिक्षकों ने भी उनकी मिक्री पर खूब ठहाके लगाए। 1983 में 83-83 रुपए की टिकट लगाकर हम लोग मुंबई गए थे। 1984 में दंगा हुआ और नवंबर माह में हम लोग वापस आ गए।
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राजू श्रीवास्तव
राह चलते लोग भी कर देते फरमाइश
1985 में राजू भाई फिर मुंबई चले गए और छोटे-छोटे पर्दे पर खूब काम किया। वहीं उनके बचपन के मित्र ज्ञानेश मिश्रा ने बताया कि 1989 करीब सात माह मुंबई में मैं राजू के साथ रहा। जब वह किसी कार्यक्रम में जाते थे तो मुझे भी अपने साथ ले जाते थे। उनकी मिक्री को लेकर लोग इतना उत्साहित रहते थे कि जरा सा भी खाली समय मिलता था तो वह राजू भाई से कुछ पेश करने की फरमाइश कर देते थे।

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अमिताभ बच्चन, राजू श्रीवास्तव - फोटो : social media
अमिताभ बच्चन की शूटिंग देखने के लिए ग्रीन बेल्ट पर चढ़े थे हम लोग
संजय कपूर ने बताया कि 1984 में तकदीर फिल्म की शूटिंग चल रही थी। उस दौरान हम और राजू भाई उनकी एक झलक देखने के लिए ग्रीन बेल्ट में चढ़ गए थे। राजू श्रीवास्तव के अंदर एक बात बहुत अच्छी थी कि उन्हें किसी भी चीज में झिझक नहीं थी। वह हर मंच पर चढ़ जाते थे।
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राजू श्रीवास्तव - फोटो : amar ujala
2005 में लाफ्टर चैलेंज ने दी पहचान
संजय कपूर बताते हैं कि जिस समय हम लोग मुंबई में एक साथ थे  उस दौरान जूनियर आर्टिस्टों की जब भी जरूरत हुई तो लोगों ने राजू भाई को बुलाया। छोटा मंच हो या बड़ा हर जगह उन्होंने समा बांध दी, मगर उन्हें उनकी असली पहचान 2005 में लाफ्टर चैलेंज से मिली।
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