राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद तीन जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पैतृक गांव परौंख आएंगे। माननीयों, परिजनों, गांव के लोगों व मित्रों से मुलाकात के साथ ही वह जनसभा को भी संबोधित करेंगे। इसके लिए जर्मन हैंगर तकनीक से पंडाल बनाया जा रहा है। एल्युमिनियम के इस पंडाल पर आंधी व बारिश का भी असर नहीं होता है।
परौंख में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन को लेकर प्रशासन तैयारियों में जुटा है। बदलते मौसम व सुरक्षा की दृष्टि से यहां एल्युमिनियम के मजबूत पिलर के आधार पर खड़ा होने वाला जर्मन हैंगर पंडाल लगाया जा रहा है। आंधी, तूफान व बारिश में भी इस पंडाल पर कोई असर नहीं होगा और बिना व्यवधान के कार्यक्रम चलता रहेगा। यहां पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री लोगों को संबोधित करने के साथ उनसे मुलाकात करेंगे।
इसलिए खास है जर्मन हैंगर पंडाल
जर्मन हैंगर तकनीक से बनने वाले पंडाल की डिजाइन अंग्रेजों के जमाने में बनने वाली इमारतों से मिलती-जुलती है। अंग्रेजी के हाफ-ए के आकार में बनने वाले इस टेंट में वेंटिलेशन का खास ख्याल रखा जाता है। जमीन पर पिलर खड़ा करने के लिए एल्युमिनियम का आधार बनता है। इसे नट-बोल्ट के सहारे कसा जाता है। इस पर एल्युमिनियम की ही बीम लगाई जाती है।