इसे कुदरत का खेल और समय की करवट ही कहेंगे कि हमेशा मां के सीने से लिपटे रहने वाले बच्चों को आखिरकार मौत ने जुदा कर दिया। बच्चों की आह सुनकर कांप जाने वाले पिता को अपने कलेजे के टुकड़ों को दफन करना पड़ा। अग्नि के सात फेरे लेकर जिसके साथ सात जन्म रहने का वादा किया, उसे बच्चों के साथ ही अंतिम विदाई देनी पड़ी।
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कन्नौज दर्दनाक हादसा
- फोटो : अमर उजाला
बुधवार को सफर पर निकले गौरव की पत्नी, बच्चों समेत पांच लोगों के लिए यह आखिरी सफर साबित हुआ। बुधवार सुबह उमर्दा में निचली गंग नहर में कार गिरने से सिपाही गौरव भदौरिया की पत्नी पप्पी, दो बच्चों शुभी और लाडो, बहन मोहिनी और भांजे कृष्णा की मौत हो गई थी। दूसरे दिन इनका पोस्टमार्टम हुआ। एक साथ पांच शवों को देखकर हर किसी की आंख नम हो गई। 24 घंटे से अधिक समय से रोते-बिलखते परिजनों की आंखों से आंसू निकलते निकलते सूखने लगे थे।
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रो राेकर परिजनों का बुरा हाल है
- फोटो : अमर उजाला
गला बैठ जाने से सिर्फ सिसकियां निकल रही थीं। गौरव ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि परिवार के साथ वह जिन खुशियों की डगर पर निकला है, बीच में पत्नी, बच्चे, बहन और भांजा नहर में समा जाएंगे। पोस्टमार्टम के बाद गौरव की पत्नी पप्पी का महादेवी घाट पर अंतिम संस्कार हुआ। पास में ही कलेजों के टुकड़ों शुभी और लाडो को दफन किया गया। बहन मोहिनी का इटावा और भांजे कृष्णा का शव फर्रुखाबाद लेकर परिजन रवाना हो गए।
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परिवार के पांच लोगों की मौत के बाद रोते बिलखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
डॉ. प्रमोद और डॉ. मो. शरीफ ने शवों का पोस्टमार्टम किया। सभी की मौत पानी में डूबने से हुई। पोस्टमार्टम के दौरान परिजनों का हाल-बेहाल था। 24 घंटे से अधिक समय तक खाना न खाने और रोते-रोते सभी की हालत खराब थी। हादसे का मंजर याद कर बहन सोनी बार-बार बेहोश हो रही थी। घाट पर हर कोई सिपाही और उसके परिवार के लोगों ढांढस बंधाता रहा।
बुधवार को ठठिया थाने के गांव मिरुअन मढ़ा निवासी सिपाही गौरव कुमार, पत्नी प्रिया उर्फ पप्पी, बेटी शुभी, लाडो, मां रेखा देवी, बहन सोनी, मोहिनी, हर्ष, भांजी आयुषी और भांजे कृष्णा के साथ मौसेरी बहन की गोद भराई रस्म में शामिल होने कार से निकले थे। तभी चटरूआपुर गांव के पास निचली गंग नहर में कार पलट गई। हादसे में पत्नी प्रिया, मासूम बेटी शुभी, लाडो, बहन मोहिनी उर्फ मोनी और भांजे कृष्णा की मौत हो गई थी।