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तस्वीरों में छिपा मौत का सच: कानपुर के अस्पतालों में नहीं मिली थी ऑक्सीजन, सैकड़ों ने तोड़ा था दम

Thu, 22 Jul 2021 05:31 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

दूसरी लहर की तबाही में कई रोगियों को ऑक्सीजन की किल्लत की वजह से भर्ती नहीं किया गया। मरीजों ने अस्पताल की दहलीज पर दम तोड़ दिया था।
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कानपुर: अंतिम संस्कार के लिए लगती थी लाइनें - फोटो : amar ujala
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री भारती प्रवीण पवार ने राज्यसभा में भले ही बता दिया हो कि कोरोना की लहर में ऑक्सीजन की किल्लत से किसी की मौत नहीं हुई, लेकिन हकीकत इसके उलट है। दूसरी लहर की तबाही में कई रोगियों को ऑक्सीजन की किल्लत की वजह से भर्ती नहीं किया गया। मरीजों ने अस्पताल की दहलीज पर दम तोड़ दिया था। एंबुलेंस रोगियों को लातीं और फिर छोड़कर भाग जातीं। दूसरे अस्पतालों में ऑक्सीजन न मिलने पर 30 रोगी निजी एंबुलेंस से हैलट लाए गए, हालांकि उनकी रास्ते में ही मौत हो गई। हैलट इमरजेंसी में तो रोगियों से कहा जाता था कि ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर आएं। जिन 30 रोगियों ने अस्पताल आने के बाद दम तोड़ा, उनकी गिनती कोरोना से हुई मौतों में तो है, लेकिन अस्पताल के पास सही नाम-पते का ब्यौरा नहीं है। परिजन रोते-बिलखते लौट गए कि ऑक्सीजन मिल जाती तो जान बच जाती। उस वक्त हैलट इमरजेंसी के बेड पर डबलिंग और ट्रिपलिंग हो रही थी और एक सिलिंडर से रोगियों में शेयरिंग चल रही थी।
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रोज होते थे सैकड़ों की संख्या में अंतिम संस्कार - फोटो : amar ujala
उस वक्त बहुत से रोगी ऑक्सीजन न होने की वजह से हैलट से लौटे और बाद में उनकी मौत हो गई। दुखद यह है कि बिना ऑक्सीजन के मरने वाले ये रोगी लिखत-पढ़त में कहीं नहीं हैं। ऑक्सीजन सेच्युरेशन लो लेवल वाले रोगियों की भीड़ बहुत थी। मुश्किल से मौतों की ही गिनती हो पा रही थी। ढाई सौ रोगी मरने के एक महीने बाद भी पोर्टल पर नहीं चढ़ पाए थे। ऐसे में ऑक्सीजन की किल्लत से होने वाली मौतों की गिनती कौन करता? हर स्तर पर आंकड़े छुपाने का खेल चल रहा था। ऑक्सीजन न होने की वजह से कोविड स्टेटस वाले अस्पतालों में भर्ती नहीं किया जा रहा था। ऑक्सीजन प्लांटों पर लोगों की लंबी लाइन लगी रहती थी।

 
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न बेड थे न ऑक्सीजन - फोटो : amar ujala
इसी बीच बहुत से रोगियों ने ऑक्सीजन सिलिंडर के इंतजार में घरों, सड़कों और अस्पतालों में दम तोड़ दिया। सड़क पर जब रोगी मर गए तो फिर परिजन किसी तरह उनका अंतिम संस्कार कराने में जूझते रहे। इन्हें स्वास्थ्य विभाग के किसी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया। मौत नगर निगम रिकॉर्ड में जरूर आ गई, लेकिन ये मौत ऑक्सीजन न मिल पाने की वजह से हुई, ऐसा कहीं दर्ज नहीं है। कोरोना काल में शहर में 20 हजार से ज्यादा मौतें हुईं थीं। इस मामले में सीएमओ डॉ. नेपाल सिंह का कहना है कि उन्होंने जब ज्वाइन किया था तब स्थितियां सुधरी हुई थीं। ऑक्सीजन एक्सप्रेस आने लगी थी।

 

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कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी से हुई थीं मौतें - फोटो : amar ujala
दो मई को छिबरामऊ, कन्नौज की रहने वाली साधना के पति संजीव (30) की हैलट में ऑक्सीजन न मिलने से मौत हुई थी। साधना ने आरोप लगाया था कि उनके पति को सांस लेने में परेशानी थी, लेकिन यहां रुक रुककर ऑक्सीजन मिल रही थी। इस कारण उनकी जान चली गई। हैलट के डॉक्टरों ने कहा था कि ऑक्सीजन चाहिए तो सिलिंडर साथ लाओ।
 
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कानपुर: देर रात तक होते थे अंतिम संस्कार - फोटो : amar ujala
दो मई को ही बिठूर के रहने वाले विशंभर पाल की भी ऑक्सीजन की कमी से मौत हुई थी। भतीजे सोनू ने बताया कि उन्हें अस्थमा की बीमारी थी। शहर के कई अस्पतालों में ऑक्सीजन न होने की वजह से उन्हें भर्ती नहीं किया गया था। हैलट पहुंचे तो वहां भी ऑक्सीजन नहीं मिली। आखिरकार उन्होंने तड़पते हुए दम तोड़ दिया था।

 
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कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी से मचा था कोहराम - फोटो : amar ujala
23 अप्रैल को परमवीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद के बेटे अली हसन (65) की भी हैलट में ही ऑक्सीजन न मिलने से मौत हुई थी। उनके बेटे शहनवाज ने बताया था कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ थी। हैलट में रात नौ बजे ऑक्सीजन खत्म हो गई थी। डॉक्टरों ने खुद ही ऑक्सीजन का इंतजाम करने को कहा था। वे सिलिंडर के लिए भटक रहे थे तभी फोन आया कि वे खत्म हो गए हैं।
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