सुबह-सुबह मॉर्निंग वॉक के दौरान अापने पार्क में कई लोगों को ठहके लगते हुए जरूर देखा होगा। अक्सर एेसा कुछ देखने के बाद लाेग या ताे हंसना शुरु कर देते हैं या यह साेचने लगते हैं अाखिर वाे हंस क्याें रहा था। स्वास्थ्य के लिहाज से हंसना बेहद जरूरी है।
विज्ञापन
2 of 7
डेमाे पिक
हंसने के लिए किसी वजह की जरूरत नहीं होती। जब आप खुश होते हैं, टेंशन फ्री होते हैं तो आपके चेहरे पर मुस्कान होती है। हल्की सी मुस्कराहट किसी की खूबसूरती में चार चांद लगा देती है। इसलिए हंसना हर लिहाज से जरूरी और फायदेमंद है।
विज्ञापन
3 of 7
डेमाे पिक
हंसने से हमारा ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहता है। ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहने से हम कई बीमारियों से बच सकते हैं। हंसने से हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। इम्यून सिस्टम ( रोग-प्रतिरोधी क्षमता) मजबूत होगा तो हम कम बीमार पड़ेंगे। मेडिकल साइंस के मुताबिक हंसने के दौरान हमारे शरीर में एंटी वायरल कोशिकाएं तेजी से बनती है और हमारा इम्युनिटी सिस्टम मजबूत होता है।
4 of 7
डेमाे पिक
कई लोग बॉडी पेन (मांसपेशियों में दर्द) की समस्या से परेशान रहते हैं। हंसने से दर्द में राहत मिलती है। रोगियों को असहनीय दर्द से राहत दिलाने के लिए डॉक्टर लॉफिंग थेरेपी का इस्तेमाल करते हैं। मेडिकल एक्सपेरीमेंट्स में पाया गया है कि 10 मिनट तक हंसते रहने से दो घंटे की गहरी नींद आती है। कई बार हम निगेटिव हो जाते हैं।
विज्ञापन
5 of 7
डेमाे पिक
अगर कोई बार-बार निगेटिव हो रहा है तो उसके डिप्रेशन में जाने की बहुत ज्यादा संभावना है। हंसने से हम डिस्ट्रेस होते हैं और शरीर में पॉजिटिव एनर्जी का संचार होता है। हंसने के दौरान हमारे शरीर में इंडोर्फिन हार्मोन बनता है जिससे हम पॉजिटिव फी करने लगते हैं। हंसने के दौरान हमारी सांसें गहरी हो जाती है। सांस लेने और छोड़ने की अवधि बढ़ जाती है।
विज्ञापन
6 of 7
डेमाे पिक
इसकी वजह से हमारे शरीर को ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन की सप्लाई होती है जिससे एनर्जी लेवल बना रहता है। हंसने का असर हमारी उम्र पर भी दिखाई देता है। हंसना एक तरह की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज जैसा है। हंसने से हमारी मांसपेशियों की एक्सरसाइज होती है और एंटी-एजिंग में मदद मिलती है। हंसने के दौरान कैलरी बर्न होता है जिससे मोटापा में कमी आती है। एक शोध के मुताबिक 15 मिनट तक हंसने से हम 10-40 कैलरी तक बर्न कर सकते हैं।
क्या आपको पता है किसी इंसान को सजा के तौर पर शारीरिक दंड के रूप में गुदगुदाने का दंड दिया गया है, जी हां, 16वीं शताब्दी में शारीरिक दंड के तौर पर गुदगुदाने का दंड दिया जाता था। प्राचीन रोमन्स कैदियों के पैरों को नमक के पानी में भिगोने के बाद उन्हें बकरियों से चटवाने की सज़ा देते थे।