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जेईई से एनआईटी नहीं मिला तो निमसेट में मारी बाजी, पढ़िए होनहारों की सफलता की कहानी

Sun, 09 Jun 2019 12:34 PM IST
शिखा पांडेय एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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जेईई से एनआईटी नहीं मिला तो निमसेट में मारी बाजी - फोटो : अमर उजाला
जेईई मेंस और एडवांस में असफल होने वाले छात्रों के लिए निमसेट-2019 में सफल हुए छात्र अच्छे उदाहरण हैं। इनमें से कई ऐसे छात्रों ने सफलता हासिल की है, जो शुरू से ही आईआईटी-एनआईटी में पढ़ना चाहते थे। कई ने जेईई क्वालीफाई भी कर लिया था लेकिन अच्छी रैंक न होने से अच्छा एनआईटी नहीं मिला तो एडमिशन ही नहीं लिया।

एक छात्र आर्थिक रूप से कमजोर होने के चलते 12वीं के बाद यह सपना पूरा नहीं कर पाया। ऐसे में इन छात्रों ने हार नहीं मानी बल्कि सामान्य कॉलेजों से स्नातक की पढ़ाई की और अब निमसेट के जरिये देश के टॉप एनआईटी संस्थानों में दाखिला ले पाएंगे। पेश है ऐसे छात्रों की सफलता की कहानी...
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शेफाली ने एक साथ कई प्रवेश परीक्षाओं को किया क्रैक - फोटो : अमर उजाला
शेफाली ने एक साथ कई प्रवेश परीक्षाओं को किया क्रैक
ऑल इंडिया 124वीं रैंक हासिल करने वाली शेफाली मिश्रा ने एक साथ एमसीए की कई प्रवेश परीक्षाओं में टॉप रैंक हासिल करके कानपुर का नाम रोशन किया है। शेफाली यहां राजीव विहार की रहने वाली हैं। पिता सरोज कुमार मिश्रा एक इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान चलाते हैं और मां शशि मिश्रा गृहिणी हैं। बड़ी बहन वैशाली मिश्रा नवोदय विद्यालय में शिक्षिका हैं। शेफाली बताती हैं कि उन्होंने डॉन बॉस्को स्कूल से 2015 में 12वीं 90.4 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण किया था।

इसके बाद पीपीएन कॉलेज में बीएससी मैथ्स में एडमिशन ले लिया। बीएससी में 67 प्रतिशत अंक मिले हैं। शेफाली बताती हैं कि बीएससी के दौरान उन्होंने ओ लेवल ज्वाइन किया था। इसी दौरान उन्हें कंप्यूटर में इंट्रेस्ट आ गया। इसलिए वह आगे अच्छी एनआईटी से एमसीए करना चाहती हैं। एनआईटी सूरतकल में पढ़ना प्राथमिकता है। इसके पहले शेफाली ने एमसीए के लिए महाराष्ट्र में होने वाली प्रवेश परीक्षा सीटी महाराष्ट्र में 43 रैंक थी। कलिंग यूनिविर्सटी ऑफ टेक्नोलॉजी की प्रवेश परीक्षा में तीसरी और यूपीएसईई में 26वीं रैंक हासिल की थी। यूपीएसईई में गर्ल्स की रैंक 7वीं थी।
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प्रोग्रामर बनकर दुनिया में नाम कमाना चाहते हैं प्रांजल - फोटो : अमर उजाला
प्रोग्रामर बनकर दुनिया में नाम कमाना चाहते हैं प्रांजल
ऑल इंडिया 237 रैंक पाने वाले प्रांजल अवस्थी बड़ा प्रोग्रामर बनकर दुनिया में काम कमाना चाहते हैं। पिता आरके अवस्थी स्टेट बैंक में कैशियर और मां साधना अवस्थी गृहिणी हैं। मूल रूप से औरैया के रहने वाले प्रांजल परिवार संग यहां वाई ब्लॉक किदवई नगर में रहते हैं।

12वीं की पढ़ाई मदर टेरेसा स्कूल से 2015 में 82 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की थी। इसके बाद वीरेंद्र स्वरूप कंप्यूटर इंस्टीट्यूट से 67 प्रतिशत अंकों के साथ बीसीए की पढ़ाई की। प्रांजल बताते हैं कि उन्हें प्रोग्रामिंग में काफी दिलचस्पी है। 11वीं से ही प्रोग्रामिंग करने लगे थे।

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प्रियांशु वाजपेयी माता-पिता के साथ - फोटो : अमर उजाला
एमसीए के बाद करेंगे जॉब, फिर सिविल सर्विसेज की तैयारी
निमसेट 2019 में ऑल इंडिया जनरल कैटेगरी में 167वीं रैंक हासिल करने वाले प्रियांशु वाजपेयी यहां यशोदानगर के रहने वाले हैं। पिता रविंद्र वाजपेयी मारवाड़ी इंटर कॉलेज में केमिस्ट्री के शिक्षक और मां वंदना वाजपेयी गृहिणी हैं। परिवार में इकलौते प्रियांशु ने 2016 में मर्सी मेमोरियल स्कूल पढ़ाई की है। इसके बाद जेईई की तैयारी की थी। क्वालीफाई भी कर लिया था लेकिन अच्छा कॉलेज नहीं मिल रहा था।

इसलिए छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय से बीएससी मैथ्स की पढ़ाई की। बीएससी में कुल 60.2 प्रतिशत अंक मिले हैं। प्रियांशु बताते हैं कि अब वह एमसीए करना चाहते हैं। एमसीए के बाद दो-तीन साल जॉब करेंगे फिर सिविल सर्विसेज की परीक्षा देकर आईएएस बनने का सपना है। प्रियांशु बताते हैं कि उन्हें नौंवी से ही कंप्यूटर पढ़ना अच्छा लगता था इसलिए उन्होंने इंजीनियरिंग की तरफ अपना रुख अख्तियार किया। 
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श्याम शुक्ला - फोटो : अमर उजाला
सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनेंगे श्याम 
निमसेट में ऑल इंडिया 397वीं रैंक हासिल करने वाले श्याम शुक्ला मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहते हैं। पिता राकेश शुक्ला एलआईसी में एडवाइजर और मां रमा शुक्ला गृहिणी हैं। दामोदरनगर में रहने वाले श्याम के बड़े भाई आयुष शुक्ला ने इसी साल सीएसए से बीटेक किया है। श्याम बताते हैं कि उन्होंने 2016 में चाचा नेहरू इंटर कॉलेज से 87 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं उत्तीर्ण की थी।

इसके बाद वीरेंद्र स्वरूप इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर स्टडीज से बीसीए किया। इस बार फाइनल ईयर है। श्याम बताते हैं कि आगे वह निमसेट की रैंकिंग के आधार पर एनआईटी प्रयागराज (इलाहाबाद) या फिर एनआईटी भोपाल से एमसीए करना चाहते हैं। श्याम का लक्ष्य है कि वह एमसीए के बाद आईटी सेक्टर में नाम कमाएं।
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