उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से निकाले गए नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा है कि जिन तथ्यहीन और अनर्गल आरोपों के आधार पर उन्हें निष्कासित किया गया है, दरअसल वे सभी आरोप मायावती, सतीश चंद्र मिश्रा के ऊपर साबित करेंगे। बुधवार को इस संबंध में उन्होंने एक प्रेस नोट जारी करते हुए कहा था गुरुवार को वे लखनऊ में मीडिया के समक्ष प्रमाण के साथ मायावती एंड कंपनी पर सभी आरोप साबित करेंगे।
अगर ऐसा कुछ भी होता है तो संभवत: बसपा की मुश्किले और अधिक बढ़ जाएगी। अभी यूपी विधानसभा चुनाव में बसपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। ऐसे कयास लगने शुरू हो गए है कि यदि हालात यही रहे तो आने वाले नगर निकाय चुनाव में भी बसपा को मुंह की खानी पड़ सकती है।
मायावती को निकाय चुनाव से संजीवनी पाने की आस
बसपा सुप्रीमो मायावती (फाइल फोटो)
ऐसे में यूपी नगर निकाय चुनाव से संजीवनी पाने की आस लगाए बसपा को जोर का झटका भी लग सकता है। नसीमुद्दीन सिद्दीकी को पार्टी से निकालने का असर निकाय चुनाव में पड़ सकता है।
बसपा को मुस्लिम वोटों का नुकसान झेलना पड़ सकता है
डेमो
विशेषज्ञों का मानना है कि विशेषकर मुस्लिम वोटों का नुकसान बसपा को हो सकता है। पार्टी से इस्तीफा देने वाले पूर्व लोकसभा प्रत्याशी सलीम अहमद 2004 में मेयर का चुनाव लड़ चुके हैं। उस समय उन्हें कुल 1 लाख 80 हजार वोट मिले थे। बसपा इस बार मेयर चुनाव में अपना प्रत्याशी उतारने की तैयारी में हैं, ऐसे में मुस्लिम क्षेत्र से मिलने वाले वोट बंट सकते हैं। सलीम मुस्लिम भाई चारा कमेटी के संयोजक भी रह चुके हैं।
इसी तरह छावनी विधानसभा क्षेत्र से इसी वर्ष एमएलए का चुनाव लड़े डा. नसीम अहमद को ज्यादा वोट तो नहीं मिला था, लेकिन मुसलमानों के बीच वह बसपा के खिलाफ प्रचार करके पार्टी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
इसके अलावा वर्तमान जिला सचिव रहे इमरान खान भी मुस्लिम नेता हैं। उनके जाने पर भी बसपा को स्थानीय स्तर पर नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही है। पार्टी छोड़ने वाले पूर्व जिला महासचिव अरविंद मठिया बाल्मीकि दलित कोटे से आते हैं।