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Mulayam Death: मुलायम की एंबेसडर में भरवाया था 50 रुपये का पेट्रोल, नेताजी के करीबी ने सुनाई संघर्ष की दास्तां

Tue, 11 Oct 2022 08:52 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)
राजनीतिक संघर्ष की शुरुआत में मुलायम सिंह यादव इटावा से कानपुर ट्रक और बस से आया करते थे। इस दौरान मुलायम सिंह यादव के नजदीकी रहे हजरत दादा मियां की खानकाह के सज्जादानशीं सैयद अबुल बरकात नजमी ने बताया कि यह 60-70 के दशक की बात है। मुलायम सिंह यादव को शिक्षक के रूप में शायद 35 रुपये तनख्वाह मिलती थी। राजनीतिक संघर्ष की शुरुआत के दिन थे। उनके पास अधिक पैसे नहीं होते थे। बाद में उन्होंने एक पुरानी एंबेसडर खरीदी। एक बार वह इसी एंबेसडर से आए थे, उसमें पेट्रोल खत्म हो गया था। हमने 50 रुपये का पेट्रोल डलवाया था। इसके बाद वह एंबेसडर से लखनऊ गए थे। वह अक्सर दारुल मौला आते। वहां राजनारायण भी आया करते थे। मुलायम उनकी बहुत इज्जत करते थे। उनके पैर भी दबा दिया करते थे। नजमी ने बताया कि मुलायम सिंह की सबसे खास बात यह थी कि गरीब से गरीब आदमी की मदद करते थे। उस वक्त एक परिचित रहे हैं। उनकी बेटी की शादी थी। 
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
मुलायम को अचानक याद आया, पूछा कि बेटी की शादी कब है? कैसा इंतजाम है? मैंने कहा कि उसकी माली हालत जैसी है, उसी के हिसाब से इंतजाम किया होगा। इसके बाद मुलायम ने जाकर उससे मुलाकात की और बेटी की शादी के लिए आर्थिक मदद की। 

 
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
ऐसे एक-दो मामले नहीं हैं। उन्होंने बहुतों की मदद की है। मुझसे भी कहते थे कि पार्टी ज्वाइन कर लीजिये, मिनिस्टर बन जाओगे। मुलायम ने जबरदस्त जमीनी संघर्ष किया। इससे आम आदमी उनसे जुड़ता चला गया। मुलायम ने लोगों से खूब संबंध भी निभाया।

 

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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
जब क्रांति रथ में डीजल खत्म हो गया था
बात वर्ष 1985 की है। तहारत मंच के संयोजक डॉ. तारिक मुस्तफा ने बताया कि मुलायम सिंह यादव क्रांति रथ लेकर फर्रुखाबाद जा रहे थे। नवाबगंज में रथ का डीजल खत्म हो गया था। मुलायम सिंह टेंपो से चमनगंज स्थित दारुल मौला गुड्डू अशरफ के घर आए। गुड्डू अशरफ के उस वक्त तीन पेट्रोल पंप रहे हैं। 

 
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
मुलायम के घर आने पर गुड्डू की पत्नी तसलीम अशरफ ने फोन करके उन्हें बात बताई। इस पर गुड्डू अशरफ अपनी मर्सिडीज कार से 20-20 लीटर के दो केन भरकर डीजल लाए। इसके बाद रथ रवाना हुआ। उसके बाद वर्ष 1989 में जनता दल से मुलायम सिंह इटावा से चुनाव लड़ रहे थे। 

 
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
गुड्डू अशरफ, तसलीम अशरफ के साथ हम लोग इटावा गए। वहां मुलायम सिंह चुनावी रथ पर निकल रहे थे। वहां रुककर गुड्डू अशरफ ने उन्हें कुछ नजराना देना चाहा तो मुलायम सिंह ने उनके हाथ से लेने से मनाकर दिया। 

 
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
बोले कि हमारे यहां शुभ काम में नजराना महिला के हाथ से लिया जाता है। इसके बाद फिर तसलीम अशरफ के हाथों से नजराना स्वीकार किया। उस बार मुलायम सिंह जनता दल से मुख्यमंत्री बने। 

 
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
डॉ. तारिक मुस्तफा ने बताया कि वह अक्सर दारुल मौला आया करते थे। उनके गुड्डू अशरफ से अच्छे संबंध रहे हैं। जब वह रक्षा मंत्री रहे हैं तो आखिरी बार दारुल मौला आए थे। मुलायम सिंह महिलाओं का बहुत सम्मान करते रहे हैं। मुस्लिम समाज में उनकी हमेशा अच्छी पैठ रही है।  

 
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