कुश्ती के अखाड़े से निकले सियासी पहलवान मुलायम सिंह के पास हर मौके के लिए नया दांव होता था। राजनीति में युवा नेता के पदार्पण के बहाने विरासत की सियासत बेटे को थमाना भी इन्हीं दांव में से एक है। अखिलेश को मुख्यमंत्री बनवाकर उन्होंने अपनी जन्मभूमि इटावा का नाम इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज करवा दिया। अखिलेश के मुख्यमंत्री बनते ही इटावा पहला जिला बन गया था, जिसने ऐसे दो मुख्यमंत्री दिए, जिनका जन्म एक ही गांव में हुआ। दोनों मुख्यमंत्री एक ही पार्टी के हैं। खास बात ये भी है कि उसी गांव ने प्रदेश को चार बार मुख्यमंत्री दिए। विकास के नाम पर देश में अलग पहचान रखने वाले सैफई को कौन नहीं जानता? प्रदेश के 21वें, 23वें और 31वें मुख्यमंत्री का रुतबा हासिल करने वाले मुलायम सिंह का जन्म इटावा के सैफई गांव में ही हुआ।
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मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश के 33वें मुख्यमंत्री बने अखिलेश यादव का जन्म स्थान भी सैफई है। हालांकि सैफई अब तहसील है। अखिलेश के मुख्यमंत्री बनने से पहले एक ही जिले से ज्यादा मुख्यमंत्री देने का श्रेय अलीगढ़ के नाम था।
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मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव(फाइल फोटो)
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प्रदेश के चौथे, छठवें और आठवें मुख्यमंत्री चंद्रभान गुप्ता, 22वें और 26वें मुख्यमंत्री कल्याण सिंह अलीगढ़ से ही थे। मगर इनके गांव और तहसील अलग अलग हैं। इसी तरह बनारस को तीन बार मुख्यमंत्री देने का तमगा हासिल है।
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मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश के दूसरे मुख्यमंत्री डॉ. संपूर्णानंद, 10वें मुख्यमंत्री त्रिभुवन नारायण सिंह और 11वें मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी का जन्म बनारस में हुआ। इनके जन्म स्थान अलग अलग रहे। प्रदेश की सियासत में जिले का नाम दर्ज करवाने के लिए इटावा नेता जी का हमेशा ऋणी रहेगा।
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
चंबल के बीहड़ से डकैतों का कराया था सफाया
गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंजने वाले चंबल के बीहड़ी क्षेत्र से खूंखार डकैतों का सफाया भी मुलायम की अहम उपलब्धि रही। कई दशकों तक बागियों की शरणस्थली रहे बीहड़ में वर्ष 2003 से 2007 तक नया सवेरा हुआ।
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
चंबल के बीहड़ों में सुल्ताना डाकू, बाबा मुस्तकीम, मलखान सिंह, तहसीलदार सिंह, फूलन देवी, राम आसरे तिवारी उर्फ फक्कड़, निर्भय गुर्जर जैसे दस्युओं का आतंक रहा। सलीम गुर्जर, रज्जन गुर्जर, जगजीवन परिहार, अरविंद गुर्जर, रामवीर गुर्जर, कुसमा नाइन, मुन्नी पांडे, शीला इंदौरी, सरला जाटव की दशकों तक बादशाहत रही।
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
इटावा, औरैया, भिंड व मुरैना के सघन जंगलों में रहने वाले डकैतों ने उत्तर प्रदेश सहित दिल्ली, राजस्थान, मुंबई और ग्वालियर आदि स्थानों पर अपहरण का ऐसा काला धंधा स्थापित कर लिया था कि शाम होते ही लोगों में दहशत छा जाती थी। बच्चे घरों में कैद होने को मजबूर हो जाते थे।
डकैतों के खौफ के कारण चकरनगर क्षेत्र का विकास भी ठप हो गया था। खेती किसानी भी प्रभावित थी। आए दिन लूटपाट और पुलिस मुठभेड़ की घटनाएं आम हो गई थीं।
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव के दौरान मुलायम सिंह यादव ने चकरनगर क्षेत्र का भ्रमण किया। भरोसा दिया कि सरकार बनते ही बीहड़ों में डकैतों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया जाएगा। उसी वर्ष मुलायम सिंह ने तत्कालीन एसएसपी अखिलेश मल्होत्रा को सख्त अभियान चलाने के आदेश दिए। जब कोई प्रभावी कार्रवाई होती नहीं दिखी तो सीएम ने एसएसपी दलजीत सिंह चौधरी को इटावा भेजा।
दलजीत सिंह ने मध्यप्रदेश की भिंड पुलिस से तालमेल रखकर मुठभेड़ों में कई डकैत मार गिराए। वर्ष 2007 तक सभी खूंखार डाकू या तो मारे जा चुके थे या समर्पण करने को मजबूर हुए। इसके बाद यमुना व चंबल नदियों पर पक्के पुल और सड़कें बनवाईं। सहसों क्षेत्र में चंबल नदी पर पुल निर्माण के लिए मुलायम सरकार ने ही न सिर्फ बजट मुहैया कराया बल्कि छह महीने में पुल भी बनकर तैयार हो गया था। मुलायम ने बीहड़ी क्षेत्र के युवाओं को भी राजनीति से जोड़ा।