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रात में चंद्रमा कमजोर होने और राहु-केतु के गठजोड़ का शरीर पर पड़ता है ये प्रभाव, आप भी जान लें

Sun, 17 Mar 2019 03:28 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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ग्रहों की किरणों का असर सीधा इंसान पर पड़ता है। इससे शरीर के सॉल्ट के सामंजस्य में बदलाव आता है और सेहत प्रभावित होती है। यह बात ज्योतिषाचार्य पंडित केए दुबे पद्मेश ने कानपुर में मेडिकल कॉलेज में आयोजित सैटरडे सेरेमनी में कही। साथ ही उन्होंने कहा कि रात में चंद्रमा कमजोर होने की अवधि में हार्ट अटैक पड़ते हैं।

 
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खासकर रात दो बजे से सुबह चार बजे के बीच हार्ट अटैक की घटनाएं अधिक होती हैं। अगर रात को सोने के पहले थोड़ा सा गुनगुना पानी पी लिया जाए तो किरणों के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि राहू-केतु के गठजोड़ से डायबिटीज हो जाती है। 
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ज्योतिषाचार्य पद्मेश की स्वास्थ्य, विज्ञान और ज्योतिष की संयुक्त व्याख्या पर डॉक्टरों में खासी दिलचस्पी पैदा हुई और सवालों का सिलसिला शुरू हो गया। सैटरडे सेरेमनी का आयोजन कॉलेज के लेक्चर थिएटर-3 में किया गया। व्याख्यान के बाद डॉक्टरों ने ज्योतिष के स्वास्थ्य से जुड़ाव को लेकर कई  सवाल किए।

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इस मौके पर डॉ. प्रदीप मंगलानी ने पूछा कि सर्जरी के दिन बायो रिद्म कम हो तो रोगी मर जाता है, ऐसा क्यों? इस पर पद्मेश ने बताया कि चंद्रमा मन और सूर्य हृदय को प्रभावित करता है। इनके बिगड़ने से बायो रिद्म कम होती है और शरीर का बीमारी से लड़ने का हौसला कम होता है और बायो रिदम बिगड़ जाती है।
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एक श्रोता ने सवाल किया कि प्रारब्ध में सब तय है तो ज्योतिष का मतलब क्या? इस पर जवाब दिया कि प्रारब्ध का कार्य पैदा होने तक होता है। मां-बाप, चाची, मौसी रिश्ते तय हो जाते हैं। इन्हें बदला नहीं जा सकता इसके बाद व्यक्ति की बुद्धिमत्ता सब तय करती है।
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भाग्य जैसी कोई चीज नहीं होती। व्यक्ति का निर्णय और ग्रहों के प्रभाव से बुद्धि में बदलाव ही आगे की स्थिति तय करता है। रत्न धारण करने से ग्रहों की किरणें नियंत्रित रहती हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि यूपी स्टेट सर्विसेस ट्रिब्युनल के चेयरमैन सुधीर सक्सेना रहे। 
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