मिडिल क्लास फैमिली से आने वाले इस बेहतरीन राइटर के पिता किसान और मां प्राइमरी स्कूल की टीचर थीं। बचपन से ही वह पढ़ाई-लिखाई में बेहद आगे थे। मां की पांच सौ रुपये सैलरी थी लेकिन फिर भी बच्चे को कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाया। हम बात कर रहे हैं मशहूर स्क्रिप्ट और डायलॉग राइटर मनोज मुंतशिर की।
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मनोज मुंतशिर
मनोज ने अमर उजाला को दिए साक्षात्कार में बताया कि वह बचपन में उर्दू सीखना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने एक मस्जिद के नीचे से उर्दू की किताब खरीदी। उसमें हिंदी के साथ उर्दू लिखी थी। उसी किताब ने उनकी जिंदगी बदल डाली। वह उर्दू में शायरी लिखने लगे। मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। राइटर मनोज मुंतशिर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। करीब डेढ़ साल मुंबई के अंधेरी में रातें फुटपाथ पर कटीं। कई दिनों तक भूखे भी रहना पड़ा। लेकिन सदी के महानायक अमिताभ बच्चन से हुई एक मुलाकात ने मनोज का जीवन ही बदल दिया। मनोज का जन्म 27 फरवरी 1 9 76 को यूपी के अमेठी जिले में हुआ था।
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मनोज मुंतशिर
इन फिल्मों को मनोज ने दी नई पहचान
मनोज ने हाल ही में रिलीज हुई बाहुबली के अलावा हॉफ गर्लफ्रेंड, रुस्तम, एमएस धोनी, वीरप्पन, सनम रे, बेबी, पीके, लीला, एक विलेन जैसी तीन दर्जन से अधिक फिल्मों के गाने और डायलॉग लिखे हैं।
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मनोज मुंतशिर
3000 रुपये में खुद को अमीर समझने लगे थे
मनोज कहते हैं कि 1999 में जब मैं मुंबई पहुंचा तो अनूप जलोटा जी ने मुझे एक भजन लिखने को कहा। मैंने कभी भजन नहीं लिखा था इसलिए काफी दिक्कत हुई, लेकिन पैसे की जरूरत थी इसलिए मैंने भजन लिखा। उसके लिए अनूप जी ने मुझे 3000 रुपये का चेक दिया। मुंबई में वो मेरी पहली सैलरी थी। वो मेरे लिए इतनी बड़ी रकम थी कि मैं खुद को अमीर समझने लगा था।
अमिताभ के लिए शब्द लिखे
मनोज बताते हैं कि 16 साल पहले स्टार टी.वी के एक अधिकारी ने मेरा काम देखा था, एक दिन उन्होंने मुझे बुलाया और पूछा कि अमिताभ बच्चन से मिलोगे। वो मेरे संघर्ष के दिन थे, तो मुझे लगा कि मजाक हो रहा। फिर वो मुझे एक होटल ले गए, जहां मेरी मुलाकात अमिताभ बच्चन से हुई। 20 मिनट की मीटिंग के बाद मेरा सलेक्शन हुआ और साल 2005 में कौन बनेगा करोड़पति के लिए लिरिक्स लिखने का मौका मिला। 22 जुलाई को अमर उजाला के कार्यक्रम में मनोज कानपुर में डायलॉग राइटिंग के टिप्स भी देंगे।