कानपुर के वीएसएसडी कॉलेज में शनिवार देर रात सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ तेंदुआ रविवार देर रात दोबारा नजर आया है। कॉलेज परिसर में उसके पैरों के निशान भी मिले हैं। छात्रावास के छात्रों ने भी तेंदुए को देर रात घूमते हुए देखा। कॉलेज के सीसीटीवी में देर रात 1:21 पर उसके फुटेज कैद हुए हैं। वहीं कॉलेज से सटे मोती लाल खेडिया और पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्कूल में भी तेंदुए के देर रात जाने की चर्चा है। सोमवार सुबह से वन विभाग की टीम ने तेंदुए की खोज शुरू कर दी है। दोपहर में दोबारा ड्रोन कैमरे को उड़ा कर परिसर के फुटेज कैद किए गए। चर्चा है कि कॉलेज परिसर में पीछे की ओर झाड़ियों में तेंदुआ कहीं छिपा हुआ है। उप प्रभारी वन अधिकारी एके सिंह ने बताया कि टीम पूरे दिन और रात मौके पर रहेगी।
विज्ञापन
2 of 5
वन विभाग की टीम झाड़ियो में कर रही तलाश
- फोटो : अमर उजाला
वीएसएसडी कॉलेज के कैंपस में शाम पांच बजे केमिस्ट्री विभाग के करीब बनी एक पुलिया के पास हास्टल के छात्रों को गुर्राने की आवाज सुनाई दी थी। हलचल बढ़ने पर वे करीब गए तो पत्तों की ओट में तेंदुआ छिपा था। छात्र घबराकर कॉलेज की बिल्डिंग की ओर भागे और स्टाफ और प्रबंधन को सूचना दी। सभी ने इसे मजाक माना और आई गई बात हो गई। रात दस बजे कैंपस में कुछ गार्ड गश्त कर रहे थे, तभी उन्हें हलचल महसूस हुई। गुर्राने की आवाज आने पर वह सतर्क हो गए। फिर कैमरे के जरिए कैंपस की निगरानी करने लगे। तभी रात 12:57 बजे उन्हें कैंपस में तेंदुआ घूमते दिखा था।
विज्ञापन
3 of 5
झाड़ियों की तरफ जाते हुए मिले पैरों के निशान
- फोटो : अमर उजाला
आज कॉलेज बंद, कई छात्रों ने छोड़ा हॉस्टल
वीएसएसडी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बिपिन कौशिक ने बताया कि ऐहतियात के तौर पर सोमवार को कॉलेज की छुट्टी रहेगी। जो छात्र हॉस्टल से घर जाना चाहते थे उन्हें सुरक्षित कैं पस से घर भेज दिया गया है। हॉस्टल परिसर और कर्मचारी आवास की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अफवाहों पर छात्र ध्यान न दें। प्राचार्य का कहना है कि कई साल पहले भी कॉलेज कैंपस में तेंदुआ आ गया था। तब चिड़ियाघर में बने नाले के रास्ते से ही वह संस्थान में घुसा था। तब चिड़ियाघर की टीम ने उसे पकड़ा था।
4 of 5
वीएसएसडी कॉलेज परिसर में दिखा तेंदुआ
- फोटो : अमर उजाला
मिला आसान शिकार, लौटने की आशंका
तेंदुए ने कैंपस में ही शनिवार रात किसी वक्त दो कुत्तों को अपना शिकार बनाया। उन्हें खाया भी। कुत्तों के अवशेष भी मिले हैं। आशंका है कि यहां आसान शिकार मिलने से कहीं तेंदुआ फिर शिकार की तलाश में वापस न आ जाए। कॉलेज के हॉस्टल में 100 छात्र और कैंपस में कर्मचारियों के 20 परिवार रहते हैं। करीब 200 लोगों की जान सांसत में अटकी हुई है। जब तक रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है। सभी घरों के अंदर कैद हो गए हैं, कॉलेज प्रशासन ने भले ही उन्हें दूसरी जगह जाने की हिदायत दी हो लेकिन कोई घर से नहीं निकला है।
कॉलेज परिसर में तेंदुआ कहां से आया ये वन विभाग की टीम के लिए पहेली बना हुआ है। क्योंकि कॉलेज का परिसर चारों तरफ दस फीट ऊंची बाउंड्री से घिरा है। बैराज की ओर टीनें लगी हैं। वह भी काफी ऊंची हैं। दोपहर बाद रेस्क्यू टीम परिसर के चारों तरफ घूमकर देखती रही कि आखिर तेंदुए अगर अंदर कैसे आया होगा। दीवारों के पास कहीं भी उसके पंजों के निशान नहीं मिले हैं। हालांकि टीम को परिसर में ही तेंदुए के आठ पद चिह्न मिले हैं। पड़ताल में सामने आया कि परिसर का पानी एक खुले नाले के माध्यम से गंगा तक पहुंचता है। नाला बैराज होते हुए कटरी तक जाता है। आशंका है कि कटरी से ही तेंदुआ आया होगा। कुछ लोगों ने इसे चिड़ियाघर से आने की आशंका जताई इसपर वहां गिनती की गई तो पूरे तेंदुए मिले।