कानपुर में नई सड़क पर हुए बवाल के मामले में जेल भेजा गया मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक निजाम कुरैशी ने पूछताछ में कई कई राज उगले हैं। उसने बताया कि उनका मकसद बगैर सामने आए भीड़ जुटाना व भड़काना था। ताकि बवाल भी हो जाए और हयात एंड कंपनी का नाम भी न आए। निजाम कुरैशी को पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार किया था। एसआईटी समेत अन्य पुलिस अफसरों, आईबी व एटीएस के अफसरों ने उससे पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक निजाम ने बताया कि बाजार बंदी की साजिश में वह पहले दिन में शामिल रहा। खुलासा किया कि हयात व अन्य साथियों का यही कहना था कि पर्दे के पीछे रहकर पूरा काम करना है। कथित तौर पर बाजार बंदी वापस ली गई थी, लेकिन बैठकें कर संदेश दिया गया था कि तीन जून को सड़कों पर उतरना है।
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Kanpur Violence
- फोटो : अमर उजाला
भड़काऊ भाषण दिए, युवाओं को उकसाया
सूत्रों के अनुसार बवाल में निजाम की बड़ी भूमिका रही है। वह हर बैठक में शामिल रहा। भड़काऊ भाषण दिए। यही नहीं युवाओं को उकसाने में भी उसकी भूमिका रही।
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आरोपियों की कोर्ट में पेशी
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कर्नलगंज निवासी डेविड भी इसमें शामिल रहा है। निजाम ने उसका नाम बताया है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। यहां से लखनऊ पहुंचने के बाद ये लोग जाजमऊ निवासी रासिल नाम के शख्स से मिले थे। पुलिस रासिल के बारे में जानकारी जुटा रही है।
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आरोपियों की कोर्ट में पेशी
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दावा, केस दर्ज होने पर सपा ने निकाला
निजाम कुरैशी समाजवादी पार्टी का पदाधिकारी भी था। इसके अलावा जमीयतुल कुरैश नाम का संगठन भी चलाता है। बवाल होने के बाद जब निजाम पर केस दर्ज हुआ तो पार्टी के पदाधिकारियों ने बताया था कि निजाम को 22 मई को ही पार्टी से निकाल दिया गया था।
पूछताछ में निजाम ने बताया कि 22 मई को उसके खिलाफ कोई कार्रवाई पार्टी की तरफ से नहीं की गई। बवाल में जब उसे नामजद आरोपी बनाया गया, तब पार्टी ने बैक डेट में उसे निकाला।