ई-बस में लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरा हादसा कैद हुआ है। फुटेज के अनुसार ई-बस ने सबसे पहले रिक्शे को टक्कर मारी थी। उसके बाद डिवाइडर से टकराकर कार समेत अन्य वाहनों को टक्कर मारते हुए पुलिस बूथ और डंपर को टक्कर मारकर रुकी थी। इन 30 सेकेंड में छह लाशें बिछ गईं और नौ लोग घायल हो गए। शासन की जांच कमेटी व पुलिस कमिश्नरी की एसआईटी ने फुटेज को कब्जे में ले लिया है। जांच होने तक फुटेज गोपनीय रखे गए हैं। ई-बस हादसे के मामले में अब तक ये जानकारी हो रही थी कि बस ने सबसे पहले स्विफ्ट कार में टक्कर मारी लेकिन मंगलवार को जब बस में लगे कैमरों के फुटेज सामने आए तो नया तथ्य उजागर हुआ। पुलिस के मुताबिक पूरी घटना का लाइव फुटेज है। बस काफी रफ्तार में घंटाघर चौराहे की तरफ से पुल पर चढ़ती है। पुल के ढलान पर सबसे पहले एक रिक्शे में टक्कर लगती है।
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बस चालक
- फोटो : अमर उजाला
रिक्शे को रौंदते हुए बस आगे डिवाइडर से टकराती है। तब बस विपरीत दिशा में आ जाती है। इसके बाद अन्य वाहनों और लोगों को रौंदते हुए बस डंपर से टकराती है। रिक्शा में टक्कर लगने से लेकर डंपर से टकराने तक सिर्फ 30 सेकेंड लगे, मतलब चंद सेकेंड में चालक सतेंद्र सिंह यादव ने छह जिंदगिया खत्म कर दी। कइयों को मरणासन्न कर दिया।
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Kanpur Road Accident
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प्रत्यक्षदर्शियों के बयान किए दर्ज
शासन की तरफ से जांच कमेटी में नगर विकास सचिव अनिल कुमार व एडीजी जोन कानपुर नगर भानु भास्कर हैं। सोमवार को ही कमेटी ने घटना स्थल का निरीक्षण किया था। थाने और बस डिपो में जाकर जानकारी जुटाई थी। मंगलवार को कमेटी ने कई प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए। परिवहन विभाग के कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया। ई-बस के पूरे रूट, स्टाफ, अफसरों व कर्मचारियों के बारे में जानकारी जुटाई।
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क्षतिग्रस्त ई बस
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जांच के लिए मांगा जाएगा और समय
हादसे के बाद शासन ने कमेटी गठित की थी। निर्देश दिए थे कि दो दिन के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपें। मगर यह संभव होना मुश्किल है। क्योंकि हादसा बड़ा है। इसलिए जांच में थोड़ा और समय लगेगा। इसलिए कमेटी शासन से एक सप्ताह का समय मांग सकती है। जिससे जांच बेहतर तरीके से हो सके। सूत्रों के मुताबिक अभी तक की जांच में बस चालक तो दोषी है ही। उसके साथ कई जिम्मेदार कर्मचारी व अफसरों की भी लापरवाही उजागर होने के साक्ष्य सामने आ रहे हैं।
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Kanpur Road Accident
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दिन में किया डीएल नवीनीकरण के लिए आवेदन, रात में मौत का तांडव
ई-बस के ड्राइवर सत्येंद्र सिंह यादव ने हादसे के दिन 30 जनवरी को दिन में एक्सपायर हो चुके अपने हैवी कॉमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। तीन जनवरी को उसका डीएल एक्सपायर हो चुका था। रात में उसने छह लोगों को ई-बस से कुचलकर मौत की नींद सुला दिया।
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Kanpur Road Accident
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नियमतः डीएल एक्सपायर होने की तिथि से एक महीने पहले नवीनीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है या फिर एक्यपायर होने के एक महीने के भीतर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। अन्यथा इसके बाद प्रति वर्ष एक हजार रुपये जुर्माना लगता है। हर तीन साल में डीएल का रिन्यूवल कराया जाता है। परिवहन विभाग के उपायुक्त विजय कुमार ने अपनी रिपोर्ट में इसे माना है और रिपोर्ट शासन-प्रशासन दी है।
बस थी फिट, ड्राइवर की ही गलती से हुआ हादसा
परिवहन उपायुक्त ने हादसे की जांच में पाया कि ई बस की फिटनेस और दस्तावेज में कोई कमी नहीं थी। दोनों सही मिले। पूरी गलती ड्राइवर की थी। अब उसका ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा। किसी भी बस के हादसा ग्रस्त होने पर अगर किसी की मौत नहीं हुई है तो जांच एआरटीओ स्तर के अधिकारी करते हैं। मरने वालों की संख्या चार है तो आरटीओ जांच करते हैं। चार से अधिक लोगों की हादसे में मौत होने पर जांच परिवहन उपायुक्त करते हैं। इस हादसे में परिवहन विभाग के उपायुक्त विजय कुमार ने जांच रिपोर्ट मुख्यालय को दी है।