कानपुर के ऋषभ हत्याकांड में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया हैं। सपना ने अपने पति की हत्या के लिए प्रेमी को तीन लाख की सुपारी दी थी। इसका खुलासा राजकपूर उर्फ राजू के व्हाट्सएप चैट से हुआ है। राजू से पूछताछ में भी जुर्म कबूल किया है। उसने बताया कि 27 नवम्बर को उसने अपने कर्मचारी नर्वल निवासी सत्येंद्र विश्वकर्मा उर्फ सीटू के साथ ऋषभ पर हमला किया था, लेकिन वह बच गया। इसके बाद इलाज के दौरान एक इंजेक्शन देकर और दवाओं के ओवरडोज से ऋषभ को मौत के घाट उतार दिया। इसमें कल्याणपुर खुर्द के मेडिकल स्टोर संचालक सुरेंद्र सिंह यादव ने भी मदद की। पुलिस ने चारों आरोपियों को शुक्रवार कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया। डीसीपी पश्चिम विजय ढुल ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता कर बताया कि ऋषभ तिवारी अपनी पत्नी सपना पांडेय के साथ शिवली रोड पर रहते थे।
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मौके पर मौजूद पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
27 नवंबर को वह अपने दोस्त के साथ चकरपुर गांव में एक शादी में गए थे। वापसी में उनकी स्कूटी पंचर हो गई और वह पंचर बनवाने के लिए हाइवे की तरफ जाने लगे। तभी शिव होटल के आगे बाइक सवार दो युवकों ने उनके सिर और कंधे पर चापड़ से हमला कर दिया।
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पुलिस गिरफ्त में आरोपी
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मामले में ऋषभ की पत्नी ने अपने पड़ोसी रामकृष्ण विश्वकर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। इस बीच तीन दिसंबर को ऋषभ की मौत हो गई। मामले की जांच में जुटी पुलिस जब सपना की कॉल डिटेल निकलवाई तो कई ऐसे नंबर मिले, जिनसे सपना अक्सर बात करती थी।
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आरोपी पत्नी सपना
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पता चला कि सपना का नरवल के रायपुरवा निवासी राजकपूर उर्फ राजू से 2016 से प्रेम संबंध हैं। फरवरी 2020 में सपना की शादी ऋषभ से हो गई। ऐसे में दोनों ने प्रॉपर्टी हड़पने और एक साथ रहने ले लिए ऋषभ की हत्या की साजिश रची। हत्या के लिए उसने अपने प्रेमी को ही तीन लाख की सुपारी दे दी।
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आला कत्ल बरामद
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हमले के बाद मौके पर पहुंची सपना ने पहले हैलट फिर मधुराज में ऋषभ को भर्ती कराया और 30 नवंबर को डिस्चार्ज कराकर घर वापस लाई। इधर सपना ने आशा मेडिकल स्टोर के संचालक सुरेंद्र यादव से एक इंजेक्शन लेकर ऋषभ को लगवाया और दवाओं का ओवरडोज दिया।
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आरोपी पत्नी सपना
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इससे ऋषभ के फेफड़े व लिवर खराब हो गए और तीन दिसंबर को उसकी मौत हो गई। सपना ने ऋषभ को कौन सा इंजेक्शन लगवाया था इसका अभी पता नहीं चल सका है।
हत्या ऐसे कि किसी को शक न हो सके
पुलिस ने ऋषभ के शव का पोस्टमार्टम कराया था, जिसमें मौत का कारण ही स्पष्ट नहीं हो सका था। इसलिए डॉक्टरों ने विसरा सुरक्षित किया था। चूंकि पहले उस पर हमला हुआ था। लिहाज पुलिस गंभीरता से जांच कर रही थी। सर्विलांस से सुराग लगा। तब आरोपियों को उठाया गया। जिसके बाद वह एक-एक कर वारदात कबूलते रहे।