कानपुर के किडनी कांड में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। किडनी ट्रांसप्लांट के समय डॉ दंपती को ओटी में जाना मना था। पुलिस जांच में पता चला है कि डॉ. रोहित आहूजा हॉस्पिटल के गेट बंद करा देता था। ऑपरेशन थियेटर में एक केस करने के बदले 2.75 लाख रुपये दिए जाते थे।
कानपुर के किडनी कांड में एक और हैरान करने वाली जानकारी सामने आई है। आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान डॉ. आहूजा दंपती को भी ऑपरेशन थियेटर में जाने की इजाजत नहीं थी। डॉ. रोहित हॉस्पिटल के सारे गेट बंद करा देता था।
हॉस्पिटल के स्टाफ और यहां तक की डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा और डॉ. प्रीति आहूजा को घर जाने के लिए कह दिया जाता था। यह जानकारी पुलिस को मो. फैज से पूछताछ में हुई है। मो. फैज को शिवम अग्रवाल ने मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर की देखरेख के लिए रखा था। उसको पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया।
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आरोपी शिवम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डीसीपी पश्चिम एमएम कासिम आबिदी के मुताबिक किडनी ट्रांसप्लांट के मास्टरमाइंड के रूप में डॉ. रोहित और शिवम अग्रवाल का नाम सामने आ रहा है। पुलिस को गिरोह में कई लोगों के शामिल होने की संभावना है। आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए 2.75 लाख रुपये संचालकों को दिए गए हैं। डॉ. रोहित सभी स्टाफ की छुट्टी करा देता था। देर रात किडनी ट्रांसप्लांट कराने के बाद डोनर और रिसीवर को अलग अलग नर्सिंगहोम में शिफ्ट कर दिया जाता था।
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कानपुर के हैलेट अस्पताल से किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों को लखनऊ के लोहिया इंस्टीट्यूट में किया रेफर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डोनर और रिसीवर की देखभाल के लिए पांच से छह हजार रुपये के पैरामेडिकल स्टाफ नियुक्त कर रखे थे। इनके ऊपर ही दवा देने, इंजेक्शन लगाने और ग्लूकोज चढ़ाने की जिम्मेदारी थी। पारुल तोमर की देखरेख कर रहे मो. फैज ने पूछताछ में बताया कि उसे बताया गया था कि महिला का गालब्लाडर का ऑपरेशन हुआ है। उसको सादे कागज पर एंटीबायोटिक, पेन किलर देने का परामर्श लिखकर दिया गया था।
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हैलट के सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल से किडनी के मरीज पारूल, आयुष को पीजीआई लखनऊ लेकर जाती एंबुलेंस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
किडनी ट्रांसप्लांट में लखनऊ के बड़े सर्जन का मिला कनेक्शन
किडनी ट्रांसप्लांट में लखनऊ के बड़े सर्जन का भी जांच टीम को कनेक्शन मिला है। वह किडनी ट्रांसप्लांट का विशेषज्ञ होने के साथ ही बड़े अस्पताल से जुड़ा है। पुलिस को उसकी डॉ. रोहित के साथ जान पहचान होने के कुछ साक्ष्य मिले हैं जिससे उन पर शक की सुई घूम रही है। पुलिस सर्जन से पूछताछ कर सकती है।
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किडनी ट्रांसप्लांट मामले में गिरफ्तार ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार
- फोटो : पुलिस
शहर में हुए किडनी ट्रांसप्लांट में पुलिस को आधे से अधिक आरोपियों के नाम मिल गए हैं। उनकी तलाश में टीमें अलग-अलग शहरों में दबिश दे रही हैं। केशवपुरम स्थित आहूजा हॉस्पिटल और मसवानपुर के मेडिलाइफ हॉस्पिटल में हुए ट्रांसप्लांट में डॉ. रोहित, डॉ. अजफल, ओटी असिस्टेंट मुदस्सर अली सिद्दीकी, कुलदीप सिंह राघव, राजेश कुमार समेत अन्य शामिल थे।
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कानपुर के हैलेट अस्पताल से किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों को लखनऊ के लोहिया इंस्टीट्यूट में किया रेफर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस आहूजा हॉस्पिटल संचालक डॉ. सुरजीत सिंह, डॉ. प्रीति आहूजा, शिवम अग्रवाल, राजेश कुमार, राम प्रकाश कुशवाहा, नरेंद्र सिंह, कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार तोमर को जेल भेज चुकी है। मुदस्सर अली, डॉ. रोहित, डॉ. अमित, डॉ. अफजल, डॉ. वैभव आदि की तलाश है।
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Kidney Racket
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि किडनी ट्रांसप्लांट के आरोपी विशेषज्ञ नहीं थे। यह सर्जरी ओटी मैनेजर, ओटी टेक्नीशियन और झोलाझाप ने की है। यह बात अधिकारियों को हजम नहीं हो रही है।
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डॉ. प्रीति आहूजा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस अधिकारियों ने मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर की हालत के संबंध में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज और राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल लखनऊ के विशेषज्ञों से बातचीत की। उनसे ट्रांसप्लांट के तरीके और सर्जरी की जानकारी जुटाई। विशेषज्ञों ने उन्हें बताया है कि यह सर्जरी किसी जानकार ने की है ट्रांसप्लांट ठीक हुआ है। किसी तरह का संक्रमण नहीं मिला है।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
किडनी ट्रांसप्लांट में लगभग आठ घंटे का समय लगता है। पहले डोनर का ऑपरेशन एक से दो घंटे में होता है। उसकी किडनी सुरक्षित की जाती है। इसके बाद गुर्दा रोगी को किडनी लगाने की प्रक्रिया होती है। इसमें छह घंटे से अधिक समय लगता है। इतनी लंबी सर्जरी ओटी मैनेजर या ओटी असिस्टेंट के बस की बात नहीं है। पुलिस को लखनऊ के विशेषज्ञ के बारे में कुछ साक्ष्य मिले हैं। टीमों को और साक्ष्य जुटाने के लिए कहा गया है।
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प्रिया हॉस्पिटल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डॉ. अफजल का साथी परवेज सैफी गिरफ्तार
किडनी ट्रांसप्लांट मामले में डॉ. अफजल, डॉ. रोहित के साथी परवेज सैफी को मंगलवार देर रात पुलिस ने रावतपुर क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से 10 लाख रुपये बरामद हुए हैं। पुलिस ने उसके एक और साथी को भी हिरासत में लिया है।
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मेड लाइफ हॉस्पिटल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक, परवेज सैफी डॉ. अफजल, डॉ. रोहित और एनसीआर के अन्य स्टाफ को कानपुर लाने का कार्य करता था। वह टीम को कार मुहैया करवाता था। उसके बारे में जेल गए कुलदीप और राजेश कुमार ने भी जानकारी दी थी।
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आहूजा हॉस्पिटल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इससे पहले जेल गए शिवम अग्रवाल के मोबाइल से पुलिस को डॉ. अफजल और परवेज का वीडियो मिला था, जिसमें दोनों 500-500 की गड्डियों पर लेटे हुए नजर आ रहे थे। ये रुपये किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाली मुजफ्फरनगर की पारुल द्वारा दिए गए थे।
डॉ. अफजल ने 22 लाख रुपये लिए थे, इसमें से 10 लाख परवेज ने लिए थे। डीसीपी ने बताया कि परवेज अधिवक्ताओं के साथ सरेंडर करने की तैयारी में था लेकिन उसको सर्विलांस से दबोच लिया गया।