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UP: तीन मार्च को अफ्रीका की महिला का किडनी ट्रांसप्लांट, इन दस अस्पताल में किया खेला; दलालों की थी ये प्लानिंग

Wed, 01 Apr 2026 02:32 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर

सार

कानपुर में साउथ अफ्रीका की महिला का तीन मार्च को किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। पुलिस आरोपियों को पकड़ने से चूक गई थी। बाद में सीएमओ की टीम के साथ मिलकर घेराबंदी की गई। दिल्ली और मेरठ के नर्सिंगहोम के दलालों ने प्लानिंग की थी। सर्जरी के बाद वापस नोएडा ले जाया गया था।
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Kanpur Illegal kidney racket - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
कानपुर के केशवपुरम स्थित आहूजा हॉस्पिटल में करीब दो साल से अनधिकृत तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट का खेल चल रहा है। यहां दिल्ली, मेरठ, नोएडा और एनसीआर क्षेत्र से मरीजों व डोनरों को लाकर किडनी प्रत्यारोपित की जा रही थी। इसकी जानकारी पुलिस और सीएमओ कार्यालय की टीम को प्रारंभिक जांच में हुई है। 

इस वर्ष तीन मार्च को साउथ अफ्रीका की महिला अरेबिका की किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। पुलिस आरोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाए रही जबकि मरीज व उनके रिश्तेदार शहर से कहीं और चले गए। नए केस के लिए पुलिस अधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों के साथ फिर से प्लानिंग की और आरोपियों को दबोच लिया।
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डॉ. प्रीति आहूजा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि पुलिस के पास अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट की सूचना आ रही थी। क्राइम ब्रांच, एलआईयू और खुफिया की टीमों को सक्रिय किया गया। स्वास्थ्य विभाग को भी चौकन्ना किया गया था। अनधिकृत तरीके से अंग प्रत्यारोपण का खेल किस नर्सिंगहोम में हो रहा है इसकी सटीक जानकारी नहीं आई।

 
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसी साल तीन मार्च को साउथ अफ्रीका की महिला अरेबिका का अंग प्रत्यारोपण हुआ था। एलआईयू और क्राइम ब्रांच ने स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से जानकारी जुटाई लेकिन महिला व उनके परिजनों का पता नहीं चल सका था। अस्पताल के रिकार्ड में भी किसी तरह की सर्जरी का ब्योरा नहीं मिला।

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प्रिया हॉस्पिटल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आरोपियों ने अरेबिका को कुछ दिन कल्याणपुर के नर्सिंगहोम के आईसीयू में रखा फिर दिल्ली ले गए। दिल्ली के नर्सिंगहोम के बाद नोएडा के निजी अस्पताल में डेढ़ से दो माह के लिए उनका इलाज चला। अब तक आहूजा हॉस्पिटल में सात किडनी प्रत्यारोपण की जानकारी हुई है।
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मेड लाइफ हॉस्पिटल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इस अस्पताल के कुछ स्टाफ कई अधिकृत और अनधिकृत तरीके से संचालित हो रहे कल्याणपुर, काकादेव और पनकी क्षेत्र के नर्सिंगहोम से जुड़े हुए थे। वहां से मरीजों को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करने का खेल चल रहा था।
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आहूजा हॉस्पिटल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यूरोलॉजी के लिए अधिकृत नहीं
सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी ने बताया कि आहूजा अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा नहीं है। नर्सिंगहोम और आईसीयू जरूर बने हैं लेकिन अस्पताल यूरोलॉजी के लिए अधिकृत नहीं हैं। ऐसे में गुर्दे और उससे जुड़ी सर्जरी होने का सवाल ही नहीं है। किडनी ट्रांसप्लांट करने वाली टीम अपने साथ कई औजार लेकर आती थी जबकि ऑपरेशन थियेटर के दो टेबलों का उपयोग किया जाता था।
 
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मान्या हॉस्पिटल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दस नर्सिंगहोम में किए गए 50 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट
कानपुर शहर के 10 नर्सिंगहोम में पिछले दो साल में 50 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट किए गए। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने आहूजा हॉस्पिटल में खेल का राजफाश किया जबकि नौ नर्सिंगहोम की जांच शुरू की गई है। इन नर्सिंगहोम में आठ कानपुर और एक लखनऊ का नामी निजी अस्पताल शामिल है। पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें दिल्ली एनसीआर क्षेत्र के डोनर, दलाल और सर्जन की तलाश में रवाना हो गई हैं।

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हैलट में किडनी डोनर आयुष चौधरी की जांच करते प्राचार्य डॉ. काला और अन्य - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक आहूजा अस्पताल का कर्मचारी शिवम अग्रवाल कई नर्सिंगहोम से जुड़ा था। वह खुद को डॉक्टर बताता था। उसकी कल्याणपुर के नर्सिंगहोम, मेडिकल स्टोर और सर्जिकल स्टोर में अच्छी खासी पकड़ थी। उसी का फायदा उठाकर उसने दिल्ली, नोएडा और मेरठ के किडनी ट्रांसप्लांट के खेल से जुड़े दलालों व डॉक्टरों से संपर्क कर लिया। अब तक मिली जानकारी के अनुसार वह ही मरीजों और डोनरों को लेकर आता था।

 

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Illegal Kidney Transplant - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
यह कार्य इतने गुप्त तरीके से होता था कि किसी को भी भनक नहीं लग पाती थी। सोमवार को पुलिस ने उससे पूछताछ की तो उसने आहूजा अस्पताल में सात किडनी ट्रांसप्लांट की बात कबूली। आहूजा हॉस्पिटल में भी रविवार देर रात किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। उससे पूछताछ में पता चला कि शहर में कुछ अन्य दलाल शामिल हैं जो कि दूसरे नर्सिंगहोम में ट्रांसप्लांट कराते हैं।
 

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अस्पताल में मौजूद पुलिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रावतपुर, किदवईनगर, बर्रा के नर्सिंगहोम की जांच
सूत्रों के मुताबिक रावतपुर, किदवईनगर, बर्रा, नौबस्ता, सिविल लाइंस, काकादेव क्षेत्र के बड़े नर्सिंगहोम पुलिस के रडार पर हैं। एक नर्सिंगहोम लखनऊ का भी बताया जा रहा है जहां अनधिकृत ट्रांसप्लांट किया गया है। इन बड़े नर्सिंगहोम के साथ ही आसपास के छोटे नर्सिंगहोम के नाम भी सामने आ रहे हैं। पुलिस और सीएमओ कार्यालय की टीम को कुछ नाम पता चल गए हैं लेकिन कार्रवाई से पूर्व उनके खिलाफ ठोस सबूत जुटाए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार इस कार्रवाई से पूर्व नर्सिंगहोम एसोसिएशन और आईएमए के पदाधिकारियों से भी बातचीत की जा रही है।
 

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इसी अस्पताल में चल रहा था किडनी कांड - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मेडलाइफ कागजों पर सील पड़ताल में संचालित मिला
किडनी कांड में स्वास्थ्य विभाग ने दूसरे दिन तीन अस्पतालों में से मेडलाइफ अस्पताल को सील कर दिया और बाकी दो अस्पतालों को बंद करने के लिए नोटिस जारी किया है। संवाद न्यूज एजेंसी ने मंगलवार अस्पतालों की पड़ताल की तो तीनों अस्पताल ही खुले नजर आए। 

 

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kanpur kidney scam - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मेडलाइफ व आहूजा हॉस्पिटल खुले मिले लेकिन सन्नाटा पसरा था जबकि प्रिया अस्पताल में रोगियों को भर्ती करने के साथ ही डॉक्टर उनका इलाज भी करते मिले। एसीएमओ डॉ. रमित रस्तोगी ने बताया कि मेडलाइफ को सील कर दिया गया है। आहूजा और प्रिया अस्पताल को जांच पूरी होने तक अस्पताल बंद रखने का नोटिस दिया गया है। इस दौरान उन्हें भर्ती रोगियों को दूसरी जगह शिफ्ट करने और अस्पतालों को बंद रखने के निर्देश दिए हैं।

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जांच के लिए पहुंची पुलिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
चलते मिले अवैध अस्पताल, डर से नहीं पहुंचे डॉक्टर
अवैध अस्पतालों की स्थिति जानने के लिए संवाद न्यूज एजेंसी की ओर से मंगलवार को कल्याणपुर में संचालित अस्पतालों की पड़ताल की गई। अवैध अस्पताल भी संचालित मिले। ये वे अस्पताल थे जिन पर स्वास्थ्य विभाग ने खुद नोटिस चिपकाया था या उन्हें सील किया था। हालांकि इन अस्पतालों में डर की वजह से डॉक्टर नहीं पहुंचे।
 

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आहूजा हॉस्पिटल और डॉ. प्रीति आहूजा - फोटो : amar ujala
हो सकती है ये सजा
किडनी कांड रैकेट के आरोपियों पर मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 की धारा 18, 19, 20 एवं बीएनएस की 143 और 3(5) की धाराएं लगाई गई हैं। धारा 18 अवैध रूप से मानव अंग निकालने से संबंधित है। इसमें 10 साल तक की कैद और 20 लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। धारा 19 में इसमें किसी को मानव अंग देने के लिए रजामंद करने पर दस साल तक की सजा और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। धारा 20 में पांच साल तक की सजा या 20 लाख तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
 
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कल्याणपुर स्थित प्रिया और मेड लाइफ अस्पताल - फोटो : amar ujala
मेडिकल प्रोफेशनल (डॉक्टर आदि) शामिल होने पर उनका लाइसेंस भी रद्द हो सकता है। वहीं बीएनएस की धारा 143 में एक से अधिक व्यक्तियों का दुर्व्यापार करने वाले को उम्र कैद और जुर्माना से भरना पड़ सकता है। धारा 3(5) सामूहिक आपराधिक दायित्व को बताती है। 

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