कानपुर के फजलगंज के गड़रियनपुरवा स्थित साइकिल की गद्दी बनाने वाली एसके इंडस्ट्रीज में शुक्रवार तड़के साढ़े तीन बजे शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। दम घुटने से तीन मजदूरों की मौत हो गई, जबकि तीन लोग बेहोश हो गए। सूचना पर मौके पर पहुंची दमकल की आठ गाड़ियों ने दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। वहीं फैक्टरी के प्रथम तल पर फंसे पांच कर्मचारियों ने पड़ोस की छत के रास्ते भाग कर अपनी जान बचाई। बेसुध हुए दो कर्मचारियों को हैलट के आईसीयू में भर्ती कराया गया है, एक डिस्चार्ज हो गया। साइकिल की गद्दी बनाने वाली फैक्ट्री में लगी आग में जान गंवाने वाले तीन मजदूरों के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। हादसे में किसी की मांग सूनी हुई तो किसी के सिर से पिता के साया उठ गया। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे तीनों के परिवारों की चीत्कारों से पोस्टमार्टम हाउस गूंज उठा। हर तरफ चीखपुकार मची हुई थी। वहां मौजूद पुलिस कर्मी लोगों का ढांढस बांधते दिखाई दिए।
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कानपुर की फैक्टरी में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
अग्निकांड में मरने वाले प्रदीप उर्फ राजू गौतम तीन भाइयों पिंटू व अवधेश में सबसे छोटा था। दो बहनों पूनम और पिंकी की शादी हो चुकी है, जबकि छोटी बहन विनीता है। वह बड़े भाई पिंटू के साथ पिछले आठ साल से फैक्टरी में काम करता था। हादसे के दौरान बड़ा भाई पिंटू भी फैक्टरी के प्रथम तल पर मौजूद था। पिंटू ने बताया कि आग की लपटें उठती देख वह शोर मचाते हुए नीचे की ओर गया था।
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kanpur fire
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पांच दिन पहले दोबारा फैक्टरी में आए थे नारेंद्र
हे भगवान ये क्या हो गया। मेरे बच्चों का क्या होगा। मुझे नहीं पता था कि मेरे पति दोबारा नहीं लौटेंगे। वरना में उन्हें नहीं जाने देती। ये बात कहते हुए मृतक जय प्रकाश पत्नी सीता बेसुध हो जा रही थी। परिवार के लोगों ने उसे किसी तरह संभाला। मूलरूप से उन्नाव के बारासगवर निवासी जयप्रकाश पत्नी सीता व तीन बच्चों यश, वंश और खुशी संग बर्रा छह में किराये के मकान में रहते थे। पत्नी सीता ने बताया कि वह रोज की तरह गुरुवार रात नाइट ड्यूटी पर गए थे। शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे फजलगंज पुलिस ने अग्निकांड में पति की मौत की जानकारी दी।
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अग्निकांड में मारे गए तीनों की फाइल फोटो
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पोस्टमार्टम हाउस पहुंची पत्नी पति का शव देखते ही गश खाकर गिर गई। वहां मौजूद महिला कांस्टेबल ने शव के पास बिलख रहे बच्चों का ढांढस बांधा। पत्नी रोते हुए बोल रही थी कि पति के निधन के बाद अब परिवार का खर्च और बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी।
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कानपुर अग्निकांड
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गांव से न लौटते, तो बच जाती जान
अग्निकांड में जान गंवाने वाले सचेंडी के कैथा निवासी नारेंद्र सोनी उर्फ दिन्नू चार भाइयों सुरेंद्र, उमेश व सुशील में दूसरे नंबर के थे। भाई सुरेंद्र ने बताया कि सात साल पहले उसकी शादी हुई थी, लेकिन कोई बच्चा नहीं था। वह किसानी के साथ फैक्टरी में भी काम करता था। सोमवार को ही वह गांव से लौटा था। इसके बाद काम पर आना शुरू किया था। पत्नी ज्योति ने कहा कि वह गांव में कुछ दिन और रुकना चाहते थे, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। खुद को दोषी मानकर वह बार-बार बदहवास हो जा रही थी। नारेंद्र की मौत से पत्नी और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
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कानपुर अग्निकांड
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35 मिनट बाद अंदर जा पाए जवान
अग्निकांड में तीन मजदूरों की मौत की सूचना पर पुलिस कमिश्नर बीपी जोगदंड, जिलाधिकारी विशाख जी, डीसीपी सेंट्रल रवींद्र कुमार भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी ली। इसके बाद हॉस्पिटल में जाकर घायलों से मिले और डॉक्टरों से उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछताछ की। इधर सूचना पर मौके पर पहुंचे दमकल कर्मियों ने रेस्क्यू आपरेशन शुरू किया, लेकिन आग की लपटें और धुआं इतना तेज था कि उन्हें भीतर पहुंचने में 35 मिनट लग गए।
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कानपुर अग्निकांड
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अगर दमकलकर्मी और पुलिस कर्मी तत्काल राहत व बचाव कार्य शुरू नहीं करते तो हादसा और भी बड़ा हो सकता था। फैक्टरी के भीतर ज्वलनशील पदार्थ, प्लास्टिक दानों के साथ भरा हुआ एलपीजी सिलिंडर भी मौजूद था। आग की चपेट में आने से उसके विस्फोट भी हो सकता था। जिसके बाद आग पड़ोस में रहने वाले लोगों के घरों में भी फैल सकती थी।
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पूरी तरह से मानक विहीन है फैक्ट्री, आखिर कब टूटेगी फायर विभाग की नींद
आग की ये कोई पहली घटना नहीं है, जिसमें जनहानि हुई हो। इससे पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी से मुकर रहे हैैं। हर बड़ी वारदात के बाद पूरे प्रदेश में डीजी फायर इस तरह के कारखानों को बंद कराने और चेकिंग के आदेश दे देते हैैं। कुछ दिन मामला गर्म रहता है, उसके बाद सब कुछ आम दिनों की तरह हो जाता है।
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सीएफओ दीपक शर्मा ने बताया कि प्राथमिक जांच में पता चला कि फैक्टरी संचालक ने अग्निशमन विभाग को किसी तरह की एनओसी नहीं ली है। मानक विहिन मकान में फैक्टरी संचालित की जा रही थी। बाहर निकलने और आपातकालीन कोई रास्ता नहीं था। इसके चलते आग लगते ही सभी कर्मचारी फंस गए। जिससे तीन को अपनी जान गंवानी पड़ी। फैक्टरी में अग्निशमन यंत्र भी नहीं मिले हैं। फैक्टरी मालिक को नोटिस भेजी जाएगी।
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मुआवजे का मरहम मिटा देता है परिवार का दर्द
देर शाम तक किसी भी परिवार के मुखिया ने कोई तहरीर नहीं दी है। अभी फैक्ट्री की आग पूरी तरह से बुझ भी न पाई थी कि तीन मौतों पर मुआवजे का मरहम लगाने का प्रयाश शुरू हो गया फैक्ट्री मालिक के कारिंदे परिवार वालों से बात करते दिखाई दिए। हालांकि पुलिस का कहना है कि तहरीर मिलते ही कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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थिनर के ड्रम से धधक उठी फैक्टरी
अग्निकांड की सूचना पर फजलगंज इंस्पेक्टर आशीष कुमार द्विवेदी और दूसरे पुलिस अधिकारी मौैके पर पहुंचे। एक-एक कर आठ दमकल की गाडियां भी मौके पर पहुंची और आग बुझाने का काम शुरू किया गया। पुलिस ने गौरव और मनोज को हैलट अस्पताल में भर्ती कराया, जहां देर रात तक उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी, उन्हें आईसीयू में रखा गया है।
मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम।
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दमकल कर्मियों ने सात बजे आग पर काबू पा लिया, लेकिन ज्वलनशील पदार्थों में लगी आग 11 बजे तक सुलगती रही। सारा माल बाहर निकालने के बाद आग पूरी तरह से बुझाई गई। फायर अफसर के प्राथमिक जांच में सामने आया है कि फैक्टरी में थिनर भरा ड्रम रखा हुआ था। शॉर्ट सर्किट से आग लगते ही थिनर भरे ड्रम तक आग पहुंच गई। इसके चलते थिनर भरा ड्रम फट गया और फैक्ट्री को आग ने पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया।