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अमर उजाला ने एसिड अटैक सरवाइवर को दिखाई ‘छपाक’, फिल्म देख छलक उठे आंसू, कहा दुनिया जानेगी हमारा दर्द

Fri, 10 Jan 2020 09:25 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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गुरुदेव में आमर उजाला की ओर से छपाक देखने पहुंची एसिड पीड़िता - फोटो : अमर उजाला
कितना अच्छा होता अगर एसिड मिलता ही नहीं, मिलता ही नहीं तो फिकता भी नहीं। फिल्म ‘छपाक’ का यह डायलॉग एसिड पीड़ितों के दर्द को बयां करता है। शुक्रवार को शहर के सभी सिनेमाघरों में रिलीज हुई दीपिका पादुकोण स्टारर यह फिल्म कभी डराती है तो कभी रुलाती है।

 
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छपाक देखने के बाद निकलती लड़कियां - फोटो : अमर उजाला
'अमर उजाला' ने यह फिल्म शहर की कुछ एसिड अटैक सरवाइवर को विनायकपुर स्थित गुरूदेव में दिखाई। सबका यही कहना था कि इस तरह की फिल्म का बनना जरूरी था, ताकि समाज को पता चले कि जिसपर एसिड फेंका जाता है उसका दर्द क्या होता है। किस तरह वो बिखर जाती है। फिल्म से समाज को यह पता चलेगा की एसिड चेहरा बदल सकता है लेकिन मन नहीं।

 
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एसिड अटैक पीड़िता - फोटो : अमर उजाला
हौसलों को तोड़ना आसान नहीं हैं और हर हाल में ऐसा काम करने वाले को सजा मिलती है। फिल्म की कहानी से फराह व सखी केंद्र से शबीना और खालिदा इत्तेफाक रखती हैं। कहती हैं कि इस फिल्म को देखकर उनको वो दर्द व न्याय के लिए संघर्ष याद आ गया जो उन्होंने किया था। फिल्म के कुछ सीन देख इन सभी के आंखों से आंसू बहने लगे।

 

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सिनेमा घर में फोर्स तैनात रही - फोटो : अमर उजाला
बोलीं कि फिल्म में मेघना गुलजार ने एसिड पीड़िताओं की दर्द भरी दास्तां दिखाई है। फिल्म के जरिए यह दिखाया गया है कि एसिड पीड़िताओं का दोषी सिर्फ एसिड फेंकने वाला ही नहीं बल्कि समाज का अमानवीय रवैया भी है। महिलाओं के खिलाफ इस घिनौने अपराध की भयावहता को सही तरीके से दिखाया गया है।

 
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कुछ ऐसा दिखा नजारा - फोटो : अमर उजाला
इस मौके पर सखी केंद्र की पुष्पा तिवारी व एसिड अटैक सरवाइवर के परिजन भी मौजूद रहे। फिल्म देखकर ऐसा लगा मानो यह मेरी खुद की कहानी है। अपने को कहानी से पूरी तरह जोड़ पा रहीं थीं। कुछ ऐसा कहना था टीपी नगर, ढक्कनापुरवा निवासी शबीना का जो एसिड अटैक सरवाइवर है।

 
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'छपाक' के एक दृश्य में दीपिका पादुकोण - फोटो : अमर उजाला
शबीना पर उसके मंगेतर ने महज इस बात पर तेजाब डाल दिया था कि उसको उससे जल्दी शादी करने थी। इस तेजाब हमले में वो बुरी तरह झुलस गई थी। शबीना कहती हैं कि इस तरह की फिल्म का बनना जरूरी था। फिल्म की कहानी से लोगों को यह भी बता रहा है कि कैसे किसी का जरा देर का गुस्सा और ईगो किसी की जिंदगी बर्बाद कर सकता है।
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