कन्नौज के छिबरामऊ में जीटी रोड पर घिलोई गांव के सामने हुए स्लीपर बस हादसे में पुलिस अभी तक मृतक चालक को ही जिम्मेदार मान जांच में जुटी हुई थी। शुक्रवार को मृतक चालक के भाई ने जो खुलासा किया गया, उससे पुलिस की परेशानी और बढ़ गई है। चालक के भाई के अनुसार बस को प्रथम चालक सोनू भदौरिया चला रहा था। उसका भाई केबिन में लेटा हुआ था।
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कन्नौज हादसा
- फोटो : अमर उजाला
फर्रुखाबाद के अमृतपुर जयनापुर थाना क्षेत्र के तुकरटा गांव निवासी विमलेश कश्यप ने कोतवाली पहुंचकर बताया कि 10 जनवरी की रात लगभग ढाई बजे बस चालक सोनू भदौरिया ने उसे लोहिया अस्पताल फर्रुखाबाद बुलाया। अस्पताल पहुंचने पर सोनू भदौरिया, क्लीनर व बस मालिक विमल चतुर्वेदी गंभीर रूप से घायल उसके भाई कमलेश को उसके सुपुर्द कर वहां से चले गए।
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कन्नौज बस-ट्रक हादसा
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बुरी तरह से जले भाई ने उसे बताया था कि हादसे के समय सोनू गाड़ी चला रहा था। जबकि वह केबिन में लेटा हुआ था। हादसे के बाद लगी आग से वह बुरी तरह से झुलस गया। सोनू व क्लीनर ने उसे गाड़ी से बाहर निकाला और फर्रुखाबाद ले आए। विमलेश के मुताबिक भाई कमलेश से हुई वार्ता हुई। इसके कुछ के बाद अस्पताल में उपचार के दौरान कमलेश ने दम तोड़ दिया था।
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कन्नौज हादसा
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विमलेश ने बताया कि विमल बस सर्विस की बस में सोनू भदौरिया प्रथम व कमलेश द्वितीय चालक के रूप में काम करता था। उधर, दूसरी तरफ अभी तक तक पुलिस मृतक कमलेश को ही बस का चालक मानकर जांच में जुटी हुई थी। पुलिस अभी तक बस मालकिन और उसके पति विमल चतुर्वेदी की तलाश में ही इधर उधर भटक रही थी।
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कन्नौज हादसा
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अब विमलेश के खुलासे के बाद पुलिस को सोनू भदौरिया के साथ ही साथ क्लीनर की तलाश भी शुरू करनी पड़ सकती है। जानकारों की मानें तो पुलिस इस मामले में कमलेश को आरोपी मानकर कुछ दिन बाद फाइनल रिपोर्ट लगाकर इसे बंद कर सकती थी, लेकिन विमलेश के खुलासे के बाद पुलिस का सिरदर्द बढ़ गया है।
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कन्नौज हादसा
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चालक के पास डीएल न होना भी हो सकता है कारण
स्लीपर बस हादसे में मरे चालक कमलेश के भाई विमलेश के बयान पर जानकारों का कहना है कि हो सकता है कि कमलेश के पास ड्राइविंग लाइसेंस न हो। ऐसी स्थिति में उसे हादसे का जिम्मेदार माना जाएगा। उसके परिजनों को मिलने वाला सरकारी व बीमा क्लेम भी फिर नहीं मिलेगा। इसके अलावा कुछ जानकारों का कहना है कि मुकदमे में आरोपी होने के कारण कमलेश के परिजनों को बीमा, क्लेम आदि में मिलने में परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। इसलिए विमलेश ने यह सोची समझी रणनीति के तहत यह बात कही हो।
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कन्नौज हादसा
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एसपी के अवकाश पर होने के कारण नहीं भेजा सका डीएनए सैंपल
घिलोई गांव के सामने हुए भीषण स्लीपर बस हादसे को लगभग सात दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस अफसर अभी तक हादसे में गायब यात्रियों की संख्या स्पष्ट नहीं कर सके हैं। इसका पता लगाने लिए पुलिस ने कुछ लोगों का डीएनए सैंपल लिया गया था, जो एसपी के अवकाश पर होने के कारण शुक्रवार को भी जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ नहीं भेजा जा सका।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के आदेश के बाद मुकदमे के विवेचनाधिकारी प्रेमपुर चौकी प्रभारी योगेंद्र कुमार शर्मा ने हादसे में गायब हुए यात्रियों के परिजनों को जिला अस्पताल ले जाकर डीएनए सैंपल लिए गए थे।
अस्पताल में हादसे में गायब हुई नूरी की मां मोहल्ला जेरकिला निवासी हसीन बानो पत्नी सफीउल्ला, सानिया के पिता गंडुडवारा निवासी नाजिम वारसी पुत्र वसीम, लईक के भाई ग्राम उगरापुर थाना कमालगंज जनपद फर्रुखाबाद निवासी रहीश अहमद पुत्र मो. उमर व नफीस अहमद पुत्र मोहम्मद उमर, साहिदा बेगम की मां शहजहां बेगम पत्नी मोहम्मद इरफान निवासी फेथफुलगंज कानपुर, प्रिया की मां उर्मिला देवी पत्नी कृपाशंकर राठौर निवासी अमोलर थाना तालग्राम का डीएनए सैंपल लिया गया था। 6
शुक्रवार को पुलिस ने कागजी खानापूर्ति करने के बाद उसे कन्नौज मुख्यालय पर भिजवाया। एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह के अवकाश पर होने के कारण गायब हुए यात्रियों के परिजनों का लिया गया डीएनए सैंपल टेस्ट के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ नहीं भिजवाया जा सका।