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पूर्व मंत्री के पौत्रों की अवैध शराब से कमाई सालाना 5 करोड़, गोशाला में बनती थी नकली दारू

Wed, 23 May 2018 08:01 AM IST
मनीष निगम, अमर उजाला, कानपुर
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कानपुर में अवैध शराब का मामला
पूर्व मंत्री रामस्वरूप सिंह गौर के पौत्र नीरज सिंह और विनय अपने गुर्गो के साथ यूपी में अवैध शराब का सिंडीकेट चला रहे थे। सिंडीकेट का नेटवर्क कानपुर और देहात तक नहीं था। प्रदेश के कई जिलों में फैला था। सिंडीकेट को कोई शराब बनाने का केमिकल पहुंचा था तो कोई खाली बोतल, रैपर, होलोग्राम व अन्य सामान। नीरज और विनय सिंह एक दिन में 150 पेटी शराब तैयार करके सरकारी ठेकों में आपूर्ति करते थे। एक पेटी में उन लोगों को एक हजार रुपया का मुनाफा होता था यानि 45 लाख रुपये महीने का। पुलिस को दोनों भाइयों का पूरा नेटवक पता चल रहा है। अब अवैध शराब माफियाओं का नेटवर्क करने की तैयारी में अफसर जुट गए हैं।
आगे पढ़ेंः-गोशाला में बनती थी अवैध शराब...

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कानपुर में अवैध शराब का मामला
आईजी आलोक सिंह ने बताया कि उन्होंने और मंडलायुक्त सुभाष चंद शर्मा के साथ रुरा में पूर्व मंत्री राम स्वरूप सिंह गौर की गोशाला में छापा मारा था। तब वहां केमिकल का केन, शराब की खाली शीशियां, माधुरी और करीना ब्रांड के रैपर, ढक्कन समेत तमाम सामान मिला था। इससे साफ है कि गोशाला में ही अवैध शराब तैयार होती थी। इसके अलावा औरैया और उन्नाव से भी अवैध शराब माफिया बीपी और कल्लू भी विनय और नीरज के सिंडीकेट को शराब आपूर्ति करते थे। कई और माफिया भी विनय को शराब की आपूर्ति करते थे। उन लोगों के नाम भी सामने आ गए हैं।

आगे पढ़ेंः-प्रदेश के कई जिलों के ठेको में बिकती थी शराब...
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कानपुर में अवैध शराब का मामला
नीरज और विनय का नेटवर्क कानपुर नगर और देहात तक सीमित नहीं था। एसएसपी अखिलेश कुमार ने बातया कि दोनों भाइयों की शराब उन्नाव, औरैया, इटावा, फतेहपुर के अलावा कई और जनपदों के सरकारी ठेकों में जाती थी। नीरज और विनय से पूछताछ में उनके नेटवर्क और अवैध शराब माफियाओं के बारे में जानकारी मिली है। पुलिस टीम आरोपियों से मिली जानकारी को पुख्ता करने में जुट गई है। पुलिस टीमें आसपास के जनपदों में रवाना की गई है। जिन जिलों में विनय ने शराब आपूर्ति करने की बात कबूली है, उन लोगों के अफसरों को अलर्ट किया गया है।
आगे पढ़ेंः-150 पेटी रोज की थी बिक्री...

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कानपुर में अवैध शराब का मामला
एसएसपी ने बताया कि पूर्व मंत्री के पौत्र खुद शराब तैयार कराते थे। दूसरे जिलों के म्रािफयाओं से भी शराब की आपूर्ति लेते थे। दोनों से पूछताछ में पता चला है कि वह लोग प्रतिदिन 150 पेटी शराब नगर और देहात के अलावा आसपास के जनपदों के सरकारी ठेकों में भेजते थे। शराब बनाने में आए खर्च को हटाकर उन लोगों को एक हजार रुपये प्रति पेटी में फायदा होता था। चुनाव के दौरान आूपर्ति बढ़ जाती थी, जिससे मुनाफा और बढ़ जाता था।
आगे पढ़ेंः-आबकारी विभाग लिखे वाहनों से होती थी आपूर्ति...
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कानपुर में अवैध शराब का मामला
पुलिस की तहकीकात में यह बात भी सामने आई है कि शराब आपूर्ति का ठेका विनय ने प्राइवेट वाहन स्वामियों को दे रखा था। वह लोग अपने वाहनों में आबकारी विभाग लिखाकर विभिन्न जिलों के सरकारी ठेकों में शराब की आपूर्ति करते थे, जिससे पुलिस को शक नहीं होता था। पुलिस विनय और नीरज के सिंडीकेट में शामिल चार वाहन स्वामियों के बारे में पता चला है। उन लोगों की तलाश तेज कर दी है।
आगे पढ़ेंः-हरियाणा से आता था रेक्टीफाइट लिकर...
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सिंडीकेट के पास हरियाणा से रेक्टीफाइट लिकर आता था। इसकी डिलीवरी प्रधान नाम से ली जाती थी। गत माह एसटीएफ ने लीकर से भरा टैंकर पकड़ा था। एसटीएफ ने हरियाणा के दो लोगों को गिरफ्तार किया था,लेकिन प्रधान कौन है और कहां रहता। इसका पुलिस अभी तक पता नहीं लगा सकी है। एसएसपी का कहना है कि नीरज और विनय के समानांतर शराब के सिंडीकेट के नेटवर्क के बारे काफी हद तक जानकारी हाथ लग गई है। जल्द ही पूरा नेटवर्क धवस्त कर दिया जाएगा।
आगे पढ़ेंः-तीन साल में पकड़े गए मामलों की जांच एसपी ग्रामीण करेेंगे...
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एसएसपी के मुताबिक जिले में तीन साल के भीतर अवैध शराब की बड़ी रिकवरी के मामलों की जांच एसपी ग्रामीण प्रद्यु्म्म सिंह को सौंपी गई है। एसपी देखेंगे की रिकवरी के दौरान कौन लोग पकड़े गए थे। वह जेल में हैं या बाहर। बाहर हैं तो क्या कर रहें और फरार आरोपिोयों के खिलाफ किस स्तर तक कार्रवाई हुई है। फरार आरोपियों पर कार्रवाई कराने का जिम्मा में एसपी ग्रामीण को सौंपा गया है।

आगे पढ़ेंः-पर्वेक्षण का जिम्मा एसपी क्राइम को...
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एसएसपी ने बताया कि कानपुर नगर और देहात में जहरीली शराब से हुई मौतों की जांच के लिए सीओ स्वरूप नगर अभय नारायण राय की  अगुवाई में चार सदस्यीय टीम गठित की गई है। वहीं विवेचना केपर्वेक्षण की जिम्मेदारी एसपी क्राइम राजेश यादव को सौंपी गई है। एसएसपी ने कहा कि मामले में आबकारी विभाग के कई कर्मचारी और अफसर भी पुलिस के रडॉर में है। दोषियों पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
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