FatehpurBlastNews: मलवां कस्बे में एक मकान में हुए भीषण धमाके में पांच भाइयों की मौत के संवेदनशील मामले में आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने जांच का रुख बदल दिया है। डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार, चार भाइयों की मौत आग में बुरी तरह झुलसने और एक बच्चे की मौत मलबे के नीचे दबने से हुई है, जबकि शवों में बारूद के अंश होने की पुष्टि नहीं हुई है।
फतेहपुर जिले में कानपुर-प्रयागराज हाईवे के पास मलवां कस्बे में सोमवार रात हुए एक धमाके में पांच भाइयों की मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, चार की मौत झुलसने से और एक की मलबे में दबने से हुई। पुलिस धमाके के कारणों की जांच कर रही है।
पुलिस की शुरुआती जांच में सिलिंडर फटने या कमरे में रखे कार्बाइड से विस्फोट होने की आशंका है। घर में फल पकाने के लिए कार्बाइड रखा जाता था। बंद जगह में कार्बाइड गैस हवा में फैलकर आग के संपर्क में आने से हादसा हो सकता है। मौके पर गैस सिलिंडर का पाइप और रेगुलेटर मिला है।
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- फोटो : amar ujala
धमाका दूसरी मंजिल पर होने की पुष्टि
जांच में पता चला कि धमाके की केवल एक ही गूंज हुई, जो पटाखों के कई धमाकों से अलग है। धमाका दूसरी मंजिल पर होने की पुष्टि हुई है। मौके पर किचन और साफ-सफाई सही सलामत मिली है। पुलिस दूसरी मंजिल का मलबा साफ कराने में जुटी है। मलबे की सफाई के बाद सिलिंडर की स्थिति से हादसे की वजह सामने आ सकती है।
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हादसे की जांच दौरान 50 से अधिक लोगों के बयान लिए गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि धमाके के सिर्फ एक ही आवाज आई। अगर पटाखे रखे भी थे तो कई आवाजें आनी चाहिए। ये स्थिति साफ नहीं हो रही है। बैटरी के टुकड़े, गैस सिलिंडर रेगुलेटर, पाइप, चूल्हा मिला है। सिलिंडर की तलाश कराई जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टर ने बारूद की पुष्टि नहीं की है। -अभिमन्यु मांगलिक, एसपी
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इस तरह से होता कार्बाइड से धमाका
विशेषज्ञों के अनुसार, कैल्शियम कार्बाइड खुद नहीं फटता। इसकी पानी या नमी के साथ होने वाली रासायनिक प्रतिक्रिया से गैस बनती है। हादसे के एक दिन पहले तक लगातार बारिश हुई है। बारिश के चलते घर में मौजूद नमी से रासायनिक प्रतिक्रिया हुई होगी। जिससे एसिटिलीन गैस पैदा होती है।
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कच्चे फलों को भी डंप किया जा रहा था
एसिटिलीन गैस हवा के संपर्क में आने पर हल्की चिंगारी से धमाका हो सकता है। परिवार में फल का बड़ा कारोबार है। इन दिनों पितृ पक्ष व नवरात्र आदि को लेकर कच्चे फलों को भी डंप किया जा रहा था। इसके लिए काफी मात्रा में कार्बाइड घर रखा होने का पुलिस का पता लगा है।
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अवैध पटाखा भंडारण में पड़े थे छापे
फल विक्रेता सुरेश गुप्ता के घर में एक साल पहले अवैध पटाखा भंडारण में पकड़ा गया था। पिछले साल आतिशबाजों के ठिकानों में कार्रवाई की गई थी। ग्रामीण इस वर्ष भी फल विक्रेता पर दिवाली की तैयारी में घर में पटाखा डंप करने की बात कह रहे हैं। चर्चा है कि घर में बारूद भी छिपाकर रखा गया। दुकान से हादसे से पहले कुछ गत्ते आलोक ने घर पहुंचाए थे।
पटाखा भरकर फेंकने की चर्चा
उन गत्तों पटाखों की संभावना जताई जा रही है। मौके पर बारूद की दुर्गंध फैलना बताया जा रहा है। चर्चा है कि हादसे से पूर्व छत पर सुखाने के लिए पटाखे डाले गए थे। विस्फोट के बाद गांव वालों ने कुछ काले कंकड़ घरों से बीने हैं। दावा किया ये पटाखा विस्फोट के हैं। नजदीक के कुएं में एक झोला पड़ा देखा गया, जिसमें भी पटाखा भरकर फेंकने की चर्चा है।