फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एकता गुप्ता हत्याकांड: कई महीनों से बंद था गेट, कैसे आई 8 फीट के गड्ढे में 5 फीट की लाश?

Sun, 27 Oct 2024 11:45 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur Murder Case: कारोबारी की पत्नी की हत्या और डीएम कंपाउंड के आफीसर्स क्लब में शव दफन मिलने के मामले में पुलिस का दावा समझ से परे है। जिस गेट से गाड़ी जाने का दावा पुलिस कर रही, वो कई महीनों से खुला नहीं है।
विज्ञापन
1 of 5
kanpur murder case - फोटो : अमर उजाला
डीएम कंपाउंड के आफीसर्स क्लब में, जिम ट्रेनर विमल सोनी की तरफ से एकता गुप्ता का शव आठ फीट के गड्ढे में कैसे दफना दिया। जबक पुलिस के अनुसार पांच फीट तक खुदाई के बाद शव के कंकाल दिखाई दिए। ऐसा तो नहीं कि जिम ट्रेनर ने एकता के शव के पहले टुकड़े किए फिर फिर उसे दफनाया। डीएम कंपाउंड स्थित ऑफीसर्स क्लब के मुख्य द्वार के पास शव दफनाए जाने को लेकर इसी तरह के कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जिसका जवाब फिलहाल पुलिस के पास भी नहीं है। प्रशासनिक विभाग के सूत्रों के अनुसार ऑफीसर्स क्लब के जिस बड़े गेट से कार अंदर ले जाने की बात कही जा रही है, वो लंबे समय से खोला ही नहीं गया।

जिस गड्ढे में एकता गुप्ता के शरीर की हड्डियां मिलीं, उसमें पांच फीट तक कुछ नहीं मिला। करीबन तीन फीट में पूरे शरीर की हड्डियों के टुकड़े मिले। तीन फुट में पूरा शरीर कैसे दफन हो सकता। ऐसा तो नहीं कि जिम ट्रेनर ने एकता के शव को टुकड़े करके बोरी या किसी बैठक में भरकर छोटे गेट से अंदर ले गया हो। और पहले से खुदे गड्ढे में लाश के टुकड़े डालकर मिट्टी से बंद कर दिया और भाग निकला हो।
विज्ञापन

2 of 5
kanpur murder case - फोटो : अमर उजाला
जैसा एडिशनल पुलिस आयुक्त की इस मामले को लेकर की गई प्रेस वार्ता में सवाल उठाया गया कि जिस कार में एकता के शव को क्लब के अंदर ले जाने की बात कही जा रही है उसकी चौड़ाई 77 सेमी और गेट की चौड़ाई 74 सेमी है। तो ऐसे में कार अंदर कैसे जा सकती है। हालांकि बाद में पुलिस ने अपना बयान बदलते हुए यह बताया कि कार को क्लब के बड़े वाले गेट से अंदर ले जाया गया है। जबकि प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि क्लब का बड़ा गेट लंबे समय से खोला ही नहीं गया।
 
विज्ञापन

3 of 5
kanpur murder case - फोटो : amar ujala
पुलिस का कहना है कि क्लब के अंदर पौधरोपण के लिए गड्ढे खोदे गए थे। उसी गड्ढे में आरोपी शव को दफनाया है। जबकि इस वर्ष अभियान के दौरान वहां पर पौधरोपण किया ही नहीं गया। इस ऑफीसर्स क्लब में आसपास रहने वाले अधिकारी, उनके बच्चे और उनकी पत्नियां जिम करने आतीं हैं। क्लब के अंदर जाने के लिए जिस गेट से प्रवेश दिया जाता है, वो प्रत्येक दिन सुबह 6 बजे से 10 बजे तक फिर शाम को 6 बजे खोला जाता है। इसके बाद रात में बंद कर दिया जाता है।

4 of 5
kanpur murder case - फोटो : अमर उजाला
इसके लिए वहां पर एक सफाईकर्मी प्रकाश की ड्यूटी लगी है। क्लब की सफाई करना और देखरेख करने की जिम्मेदारी उसी की है। वहां पर बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश मना है। उस गेट से कार अंदर नहीं जा सकती है। सवाल उठता है कि इतनी सख्ती के बाद भी गेट पर गड्ढा खुद गया और किसी ने देखा तक नही। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि कहीं गड्ढा खोदने में किसी और का हाथ तो नहीं। इन सभी सवालों का जवाब अभी मिलना बाकी है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
kanpur murder case - फोटो : अमर उजाला
40 मिनट में गड्ढा खोदना और लाश दफन संभव नहीं लगता
जिस गड्ढे में एकता की लाश को आरोपी विमल ने दफन किया, उसकी गहराई 8 से 10 फीट बताई जा रही है। इतना गहरा गड्ढा 40 मिनट में नहीं खुद सकता। इतना बड़ा गड्ढा खोदने में कम से कम तीन से चार घंटे चाहिए। आशंका है कि इस गड्ढे को पहले किसी के जरिए खोदवाया गया होगा। क्योंकि सीसीटीवी में आरोपी विमल की कार सुबह 8 बजे सरसैया घाट पर दिखी, इसके बाद 8.40 बजे झाड़ी बाबा चौराहा पर सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई। पुलिस इसी बीच के समय लाश को दफनाने की बात कह रही है। इतने समय में लाश दफन करना तभी संभव हो सकता है जब पहले से गड्ढा खोदा गया हो।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें