आज धनतेरस है। ऐसी मान्यता है भगवान धनवंतरि जब समुद्र मंथन से उत्पन्न थे तब उनके हाथ में अमृत से भरा कलश था इसलिए इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है। इस दिन खरीदारी करने से धन में 13 गुना की बढ़ोत्तरी होती है। लेकिन धनतेरस पर कुछ चीजों को खरीदने से बचना चाहिए।
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धनतेरस विशेष
धनतेरस हर व्यक्ति कुछ न कुछ नई चीज जरूर खरीदता है। माना जाता है कि धनतेरस पर नई चीज खरीदने से पूरे वर्ष घर धन धान्य से भरा रहता है। कई लोग इस दिन बड़ी खरीदारी खरीदते हैं तो कुछ लोग एक चम्मच लेकर भी इस परंपरा को पूरा करते हैं, लेकिन इस दिन कुछ न कुछ खरीदने के चक्कर में भूलकर ऐसी चीज न खरीद लें, जो अशुभ होता है। ऐसी 4 चीजें हैं, जिस धनतेरस पर नहीं खरीदना चाहिए।
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धनतेरस विशेष
बनें धनवान
इस बार धनतेरस ऐन्द्र योग में है। अति शुभ योग में पर्व पर खरीदारी शाम 6:01 बजे गणेश लक्ष्मी मूर्ति खरीदने पर सुख-समृद्धि आएगी। इसदिन यदि आप विधि से पूजा-अर्चना करते हैं तो मां लक्ष्मी की विशेष कृपा होती है। धनतेरस की पूजा सबसे महत्वपूर्ण मुहूर्त रात 11:54 से 1:29 बजे तक है। जबकि शाम को दीपक जलाने का शुभ मुहूर्त रात 7:10 से 8:44 बजे तक है।
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धनतेरस विशेष
धनतेरस की पूजा
धनतेरस पूजा का सबसे महत्वपूर्ण मुहूर्त रात 11:54 से रात 1:29 बजे तक है। पंडित डॉ. आदित्य पांडेय ने बताया कि नया बर्तन, सोने या चांदी का सिक्का एक पाटे पर रख लें। इसके बाद चंदन, केसर, धूप, हल्दी, दूर्वा, शमीपत्र, घी और गुड़ या मिष्ठान से सोने या चांदी के सिक्के का और बर्तन का पूजन करें। यहां पर बर्तन का पूजन इसलिए विशेष है क्योंकि समुद्र मंथन में कलश के साथ माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं।
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धनतेरस विशेष
धनतेरस के दिन बर्तन का पूजन करने से सुख शांति, अन्न, धन की वृद्धि होती है। वहीं सोने या चांदी के सिक्के में प्रत्यक्ष लक्ष्मी का वास माना जाता है। इसलिए सोने-चांदी के सिक्कों को पंचामृत में स्नान कराकर उसमें केसर, हल्दी, कुमकुम, रोली, सिंदूर लगाते हैं। इसके बाद लइया, गट्टा, खिलौना व अन्न का भोग लगाएं और सात दीपक घी के जलाएं।
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धनतेरस विशेष
इस तरह से पूजन करने से धन लक्ष्मी और सर्व सौभाग्य की प्राप्ति होगी। अगर संभव हो तो 21 हरे मोती शंख, 21 पीली कौड़ी और 21 काली कौड़ी को पीले वस्त्र में बांधकर मां लक्ष्मी का मंत्र का जाप करें। इसके बाद इन्हें तिजोरी या जहां पर धन रखते हों वहां रख दें।
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धनतेरस विशेष
धनवंतरि की पूजा
आचार्य ने बताया कि धनवंतरि का पूजन करने के लिए धनतेरस की पूजा वाले स्थान के दाएं ओर एक नया पाटा रखकर बीच में सतिया बनाएं। इसमें दाईं ओर ओम और बाईं ओर लक्ष्मी (श्री) बना लें। तीनों पर एक-एक सुपारी कलावा बांधकर रखें। बीच में धनवंतरि का पूजन करें। ओम वाले स्थान पर कुबेर का पूजन होगा और श्री वाले स्थान पर लक्ष्मी जी का।
सबसे पहले धनवंतरि पर जल देकर हल्दी कुमकुम का टीका लगाएं। ओम धनवंतरायनमो नम: मंत्र 16 बार पढ़ें। रोली, चावल, पान, लौंग, इलायची, हर, बहड़ा, आंवला, हल्दी व केसर चढ़ा दें। फल में सिंघाड़ा, कैथा, गन्ने के टुकड़े चढ़ाएं। इसके बाद ध्यान करें कि हमारे परविार में रोग व्याधि न आएं।