भारत को पछाड़ने के लिए पड़ोसी मुल्क चीन एक भी मौका नहीं छोड़ता है। इस बार भी उसने भारत को पीछे करने के लिए एक चाल चली है। चीन एक क्षेत्र में तेजी से काम कर रहा है। जिससे वह खुद को भारत से आगे लाकर खड़ा कर सके। कानपुर के सीएसए पहुंचे चीन के कृषि वैज्ञानिकाें ने कई अहम जानकारियां दी।
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चीन से पहुंचे डॉ. यांगलुई ली ने बताया कि उनके यहां खेतों की उर्वरक क्षमता को बढ़ाने के लिए काम किया जा रहा है। डॉ. यांगलुई ने बताया कि उत्पादन बढ़ाने के चक्कर में किसान जिन केमिकल का प्रयोग कर रहा है।
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उससे खेतों में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती ही जा रही है। इससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता कमजोर हो जाती है और यह नाइट्रोजन खेत के माध्यम से भूजल में पहुंच जाता है।
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यूरिया भी इसके साथ जमीन में रिसता है और यह दोनों मिलकर नाइट्रासोमाइन बनाते हैं। यह नाइट्रासोमाइन भूजल के संपर्क में आता है। जिससे लाइलाज बीमारी होने का खतरा फैलता है।
जिसे पीने से लोगों को कैंसर, रेड ब्लड गणों का कम होना और रसौलियां जैसी बीमारियां होती हैं। उनके देश में बायो फर्टिलाइजिंग की मदद से नाइट्रोजन की मात्रा 70 प्रतिशत से अधिक कम की जा रही है।