पुलवामा आतंकी हमले में शहीद श्यामबाबू डेरापुर रैगांव ही नहीं आसपास के गांवों में भी युवकों के लिए आदर्श बन गए हैं। सुबह हो या शाम लोगों की जुबां पर बस श्याम का ही नाम है। उनकी वीरगाथा की चर्चा हर चाय, पान की दुकान और चौपाल में हो रही है।
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हाथों में तिरंगे लेकर लोग भारत माता के जयकारे और श्यामबाबू अमर रहे के नारे लगाते हुए उनके समाधि स्थल पर पहुंचकर पुष्प अर्पित कर रहे हैं। शहीद श्यामबाबू की अंत्येष्टि रैगांव के खेल मैदान पर की गई थी। अंत्येष्टि स्थल पर शहीद का स्मारक बनाया जाना है। स्मारक स्थल पर सोमवार को भी सोमवार को भी श्रद्धांजलि देने का सिलसिला जारी रहा।
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उमरी, गलुवापुर, बड़ा गांव, सैफाबाद आदि गांवों के युवा हाथों में तिरंगा लेकर भारत माता की जय और श्यामबाबू अमर रहे जैसे नारे लगाते हुए समाधि स्थल पहुंचे। युवाओं ने शहीद को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान पुलवामा में हुई बर्बरता को याद कर युवाओं का खून खौल उठा और वे पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाने लगे।
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युवाओं ने शहीद के घर जाकर माता, पिता को ढांढस बंधाया और उन्हें इस बात का भरोसा दिलाया कि वह उनके बेटे की तरह हर दम सहयोग व सेवा के लिए तैयार हैं। युवाओं के इस तरह से ढांढस बंधाने से पिता रामप्रसाद के चेहरे में गर्व का भाव का नजर आया।
शहीद को नमन करने आए राजेश, अंकुश, विश्वजीत, रमेश, शंकर ने कहा कि श्यामबाबू की शहादत ने हमारे दिल में सेना में जाने का जज्बा और बढ़ा दिया है। हम सेना में भर्ती होकर आतंकियों और पाकिस्तान से अपने भाइयों की शहादत का बदला लेना चाहते हैं। इन युवाओं ने कहा कि श्यामबाबू हमारे हीरों हैं, उन्होंने देश पर जान न्यौछावर कर जनपद का नाम रोशन किया है।