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Orphanage case: अवैध तरीके से बच्ची को लिया था गोद, आरोपियों की मां की भी भूमिका उजागर, पुलिस ने बनाया आरोपी

Thu, 18 Aug 2022 09:22 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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यतीमखाना मामले में आरोपियों को भेजा गया जेल - फोटो : अमर उजाला
कानपुर के यतीमखाना में रहने वाली किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किए गए दोनों सगे भाइयों को बुधवार को कोर्ट में पेश किया, जहां वह 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए। पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपियों की मां ने पीड़िता को अवैध तरीके से गोद लिया था। कानपुर यतीमखाना प्रशासन से तथ्य छिपाए और घटना से संबंधित साक्ष्य भी मिटाए।

इसलिए पुलिस ने उसको भी आरोपी बनाया है। हिरासत में लेकर महिला से पूछताछ जारी है। नाला रोड निवासी महबूब (एक साल पहले निधन हो चुका है) व उनकी पत्नी शाहजहां ने बांदा के यतीमखाना से 2015 में नौ साल की बच्ची को गोद लिया था। दो वर्ष बाद दंपती के बेटे दाउद व सऊद बच्ची के साथ दुष्कर्म करने लगे थे। जानकारी होने पर 2019 में दंपती ने कानपुर के यतीमखाना में बच्ची को डाल दिया था।
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यतीमखाना कानपुर - फोटो : अमर उजाला
बीती 14 अगस्त की रात को पिता से न मिलने देने पर बच्ची ने हाथ की नस काट ली थी। तब उसने दुष्कर्म समेत पूरी आपबीती बताई थी, जिसके बाद मंगलवार को बजरिया पुलिस ने दाउद व सऊद के खिलाफ दुष्कर्म व पॉक्सो समेत अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर देर रात गिरफ्तार कर लिया था। बजरिया इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने बताया कि आरोपियों से कई घंटे की पूछताछ की गई। दुष्कर्म की बात आरोपियों ने कबूल की है। पूछताछ के बाद आरोपी जेल भेजे गए हैं। घटना स्थल की भी जांच की गई है।
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क्राइम की खबरें
इसलिए महिला को भी बनाया आरोपी
पुलिस की जांच में सामने आया कि शाहजहां को जब यह पता चला था कि उनके बेटों ने गोद ली हुई बेटी से दुष्कर्म किया तो उन पर कार्रवाई के बजाय पीड़िता पर ही दबाव बनाया। यतीमखाना में यह बताया कि बच्ची के माता-पिता नहीं हैं और फिर वहां उसको डाल दिया। आरोप है कि उन्होंने साक्ष्य भी मिटाए। इसी आधार पर उसको आरोपी बनाया गया है।

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दुष्कर्म - फोटो : अमर उजाला
लापरवाही पर कोई कार्रवाई नहीं, यतीमखाना प्रशासन पर भी सवाल
प्रकरण की सबसे पहले जानकारी कर्नलगंज थानेदार बलराम मिश्रा को हुई थी। उसके बाद एसीपी सीसामऊ निशंक शर्मा को किशोरी के हाथ काटने की सूचना मिली। इसके बावजूद 48 घंटे तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस मामले को दबाकर बैठ गई। यहां तक कि पीड़िता के बयान तक नहीं लिए थे। जब उच्चाधिकारियों तक मामला पहुंचा था तब कार्रवाई की गई थी।
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उत्तर प्रदेश पुलिस में कमिश्नर प्रणाली - फोटो : Shutterstock
हैरानी की बात ये है कि अब तक इन लापरवाह पुलिस अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। जांच के नाम पर बचाने का खेल शुरू हो गया है। उधर पुलिस की जांच में सामने आया कि किशोरी के साथ क्या क्या था, इस बारे में यतीमखाना प्रशासन को भी जानकारी थी लेकिन पुलिस को सूचना नहीं दी। इसलिए उसकी भूमिका संदिग्ध है। जेसीपी ने बताया कि यह तथ्य जांच में शामिल किया गया है। वहीं अवैध तरीके से गोद देने के मामले में बांदा के यतीमखाना प्रशासन की जांच की जा रही है।
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आनंद प्रकाश तिवारी, ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर कानून-व्यवस्था - फोटो : अमर उजाला
पीड़िता पुलिस की निगरानी में है। उसके पिता से संपर्क किया गया है। गहनता से छानबीन कर एक एक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। दो मुख्य आरोपी जेल भेजे गए हैं। महिला की भूमिका सामने आई है। उसी आधार पर उसे आरोपी बनाया गया है। मामले में जांच जारी है।   - आनंद प्रकाश तिवारी, ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर कानून-व्यवस्था
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