फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हर तरफ मातम: दो गांवों से एक साथ उठीं 18 अर्थियां, शवों के पीछे-पीछे भागते रहे परिजन, झकझोर देंगी तस्वीरें

Wed, 09 Jun 2021 07:25 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
1 of 5
कानपुर सड़क हादसा - फोटो : अमर उजाला
कानपुर में सचेंडी हाईवे पर किसान नगर के पास मंगलवार रात डबल डेकर बस और टेंपो की टक्कर में एक और युवक की मौत हो गई। हादसे में अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है। टेंपो सवार लाल्हेपुर के 13 और ईश्वरीगंज के पांच मजदूरों की मौत हुई है। पोस्टमार्टम के बाद बुधवार सुबह जब शव गांव पहुंचे तो सैकड़ों ग्रामीणों का मजमा लग गया। एक साथ दो गांवों से जब 18 शव उठे तो मातम पसर गया। परिजनों की चीत्कार सुनकर ग्रामीणों की भी आंख छलक पड़ी। पोस्टमार्टम के बाद लाल्हेपुर गांव में एक साथ 13 अर्थियां गांव के बाहर बगीचे में रखवाई गईं। परिजन शवों को घेरकर बैठ गए और दहाड़े मारकर रोने लगे। कुछ ने शांत कराने का भी प्रयास किया लेकिन उनके आंसू थमे नहीं। दोपहर करीब डेढ़ बजे यहां से सारी अर्थियां बिठूर घाट अंतिम संस्कार के लिए ले जाई गईं। इसके बाद रास्ते में पड़े गांव ईश्वरीगंज से भी पांच अर्थियां इसी अंतिम यात्रा में शामिल हो गईं।
विज्ञापन

2 of 5
कानपुर सड़क हादसा - फोटो : अमर उजाला
पुलिस की सुरक्षा में भेजे गए शव
ग्रामीणों का गुस्सा देखते हुए भारी पुलिस और पीएसी बल की मौजूदगी में एक साथ चार ट्रैक्टर ट्राली से शव बिठूर भेजे गए। शव वाहनों के आगे भारी संख्या में पुलिस चल रही थी।

 
विज्ञापन

3 of 5
कानपुर के सचेंडी में भीषण हादसा - फोटो : अमर उजाला
दो गांवों के हैं सभी मरने वाले
हादसे में मरने वाले सभी 18 लोग सचेंडी के दो गांवों के हैं। इनमें लाल्हेपुर के 14 और ईश्वरीगंज के चार मृतक शामिल हैं। एक साथ दोनों गांवों से 18 अर्थियां उठीं तो पूरा का पूरा गांव गमगीन हो गया। सभी का अंतिम संस्कार बिठूर में किया गया। 

 

4 of 5
कानपुर दर्दनाक हादसा - फोटो : अमर उजाला
बिस्कुट फैक्टरी के ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग
ईश्वरीगंज निवासी प्रकाश सिंह तोमर बिस्कुट फैक्टरी के लिए लेबर उपलब्ध कराता है। सुपरवाइजर उसका भाई सुनील सिंह है और जिस टेंपो में कर्मचारी सवार थे, वह सबसे छोटे भाई अविनाश सिंह का था।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
कानपुर दर्दनाक हादसा - फोटो : अमर उजाला
एक टेंपो से 20 से अधिक कर्मचारी रोज फैक्टरी आते जाते थे। कंडम हो चुकी टेंपो से नियमों को ताक पर रखकर कर्मचारियों को ढोया जा रहा था। इस वजह से ग्रामीणों ने ठेकेदार और उसके भाइयों पर भी कार्रवाई की मांग की। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें