जेल से बाहर आने के बाद खुशी ने अधिवक्ता का आभार व्यक्त किया। इस दौरान वह बेहद खुश नजर आई। वहीं मां गायत्री तिवारी, पिता श्यामलाल व बहन नेहा ने न्याय व्यवस्था पर विश्वास जताते हुए कहा कि खुशी निर्दोष थी। उसे न्याय मिला, भले ही देर से। उन्हें भरोसा है कि एक न एक दिन अदालत खुशी को दोषमुक्त भी करेगी। कहा कि हम लोग गरीब है। हमारी हैसियत सुप्रीम कोर्ट तक जमानत के लिए जाने की नहीं थी। मेरे अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने बहुत सहयोग किया है। उन्होंने बिना फीस लिए खुशी के मामले की शुरू से पैरवी की। हम लोग कभी इनका अहसान नहीं चुका सकेंगे।
मां से लिपटकर रोई खुशी
खुशी की मां गायत्री देवी पहले से ही अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित की कार में बैठी थी। खुशी जेल के बाहर आने के बाद कार में पहुंची और मां से लिपट कर बिलख पड़ी। परिवार के लोगों ने मां-बेटी की किसी तरह संभाला। घर पहुंचते ही खुशी ने कहा कि अब मां की गोद में सिर रखकर सोना चाहती हूं।