सबकी आंखों से बचकर हजारों सालों से जिंदा वो ‘अमर महामानव’ शिवरात्रि पर सबसे पहले महादेव को जल चढ़ाकर गायब हो गया। गांववालों का दावा है कि वो अमर महामानव अश्वत्थामा है। जो अचानक तेज रौशनी के साथ प्रकट होता है, खड़ाऊं की आवाजें आने लगती हैं और फिर अचानक सन्नाटा छा जाता है।
विज्ञापन
आज फिर सबसे पहले इस शिवलिंग पर जल चढ़ा गया अश्वत्थामा
2 of 5
डेमो पिक
कानपुर से 40 किलोमीटर दूर शिवराजपुर गांव के लोगों का दावा है कि वे 36 पीढ़ियों से एक ऐसे इंसान को देख रहे हैं जो आठ फुट लंबा है। नजदीक जाने पर ये इंसान तेज रौशनी के साथ कहीं ओझल हो जाता है। मंदिर के महंत, पुजारी और गांव वालों का ऐसा दावा है कि शिवरात्रि के दिन खेरेश्वर मंदिर में सबसे पहले खुद अश्वत्थामा महादेव को जल चढ़ा गए हैं। शिवलिंग के आसपास पानी की छीटें भी पड़ी हैं।
विज्ञापन
आज फिर सबसे पहले इस शिवलिंग पर जल चढ़ा गया अश्वत्थामा
3 of 5
डेमो पिक
हालांकि इसे कुछ लोग केवल आस्था से जुड़ा एक विषय ही मानते हैं। खेरेश्वर मंदिर में भोलेनाथ के दर्शन करने पहुंचे अधिकतर भक्तों ने इस घटना को सही बताया है। इसकी प्रमाणिकता अभी तक नहीं हो पाई है कि अश्वत्थामा क्या वाकई में जिंदा है।
आज फिर सबसे पहले इस शिवलिंग पर जल चढ़ा गया अश्वत्थामा
4 of 5
डेमो पिक
भारतीय पौराणिक मान्यता अनुसार आठ चिरंजीवी- बलि, वेदव्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, मारकण्ये ऋषि, परषुराम, अश्वस्थामा हैं। इन सभी का सुबह-सुबह स्मरण करने से बीमारियां दूर होती हैं और मनुष्य सौ वर्षों तक जीता है। द्रोणाचार्य अपने पुत्र अश्वत्थामा से बहुत प्रेम करते थे। शस्त्रों से संबंधित गुप्त रहस्य अश्वत्थामा ने अपने पिता से ही सीखे थे।
आज फिर सबसे पहले इस शिवलिंग पर जल चढ़ा गया अश्वत्थामा
5 of 5
खेरेश्वर धाम मंदिर में आए गांववाले
खेरेश्वर धाम से करीब 100 मीटर की दूरी पर अश्वत्थामा का मंदिर भी बना है। गांव के लोग अश्वत्थामा को देव के रूप में पूजते हैं। मंदिर के आसपास रहने वाले पुजारी केशव प्रसाद शुक्ल, सरस्वती देवी और मधुबाला ने बताया कि उन्होंने कई बार सफेद लिबास में लंबे चौड़े इंसान को मंदिर आते-जाते देखा है। कुछ पूछने पर वह नहीं बोलता और तेज रोशनी के साथ गायब हो जाता है।