पूजा-आरती, घंटियों की ध्वनि, शंख का नाद, दादा और पिता से देवी-देवताओं से जुडे किस्से-कहानियों सुनकर इस मैनेजमेन्ट विशेषज्ञ ने कुछ ऐसा कर दिया कि पूरी दुनिया इसकी कायल हो गई। उसकी एक कहानी ने पूरे विश्व में धमाल मचा दिया। बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक उसकी शोधपरक कहानी पढ़कर सभी दंग रह गए। हम बात कर रहे हैं जाने-माने लेखक अमीश त्रिपाठी की। जिन्होंने ‘महादेव का रहस्य’ बताकर सबको हैरत में डाल दिया।
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‘महादेव का रहस्य’ बताकर पूरी दुनिया को हैरात में डाल दिया, हॉलीवुड हुआ दीवाना
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अमीश त्रिपाठी
अमीश किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। बेस्ट बुक सेलर का कई बार अवॉर्ड जीतने वाली ‘द इम्मारटल्स ऑफ मेलुहा’ (2010), ‘द सीक्रेट ऑफ नागाज’(2011) और ‘द ओथ ऑफ द वायुपुत्राज’ (2013) कहानियों के जरिए अमीश ने एक इतिहास रच दिया। इन दिनों अमीश राम पर किताब लिख रहे हैं शोध के लिए कानपुर के बिठूर में आने वाले हैं।
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अमीश त्रिपाठी
यूपी के वाराणसी की पृष्ठभूमि से संबंध रखने वाले अमीश का जन्म मुंबई में हुआ था। त्रिपाठी ने आईआईएम कोलकाता से पढ़ने के बाद नौकरी शुरू की। मुंबई में एक इंश्योरेंस कंपनी में बड़े पद पर कार्यरत रहे। अमीश ने बताया कि शास्त्रों की किताबें उन्होंने घर में पढ़ी थीं। नौकरी के बाद का वक्त किताबों में गुजारा। मन में आया और लिखना शुरू कर दिया।
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अमीश त्रिपाठी
अमीश के अनुसार वह नौकरी भी करते थे और किताबें भी लिखते थे। साल 2010 में उनकी पहली किताब मेलुहा के मृत्युंजय तैयार हुई। कोई छापने को तैयार नहीं था सभी प्रकाशक प्रेम कहानी मांग रहे थे और ये कहानी धर्मशास्त्र, इतिहास से जुड़ी थी।ये किताब उन्होंने अपने पैसों से प्रकाशित कराई।
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अमीश त्रिपाठी
जब मेलुहा के मृत्युंजय किताब की चर्चा शुरू हो गई तो उन्हीं प्रकाशकों ने फिर संपर्क करना शुरू किया। बाद में एक प्रकाशक ने मेलुहा के मृत्युंजय को बाजार में उतारा। इस किताब के हिन्दी और अंग्रेजी वर्जन मार्केट में आते ही धमाल मच गया। अपनी पहली किताब से अमीश ने करोड़ों की कमाई कर ली।
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अमीश त्रिपाठी
इन दिनों अमीश की रामचंद्र श्रृंखला की पहली किताव इक्ष्वाकु के वंशज बाजार में आ चुकी है। दूसरी किताब लिख पूरी ही होने वाली है। इक्ष्वाकु के वंशज किताब खूब पढ़ी गई। इस श्रृंखला के आगे की कहानी के लिए बनारस और देहरादून के बाद अमीश कानपुर आने वाले हैं। रामचंद्र श्रृंखला की पांच किताबें मार्केट में आएंगी। इसमें भगवान राम पर शोध की गई कहानी लोगों के सामने रखी जाएगी।
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अमीश त्रिपाठी
कानपुर के बिठूर में अमीश आने वाले हैं यह बात उन्होंने खुद पिछले दिनों कानपुर में ही कही थी। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना के पूर्व यहीं तपस्या की थी। इसी स्थान पर भगवान राम ने सीता का त्याग किया था और यहीं संत वाल्मीकि ने तपस्या करने के बाद पौराणिक ग्रंथ रामायण की रचना की थी। कहा जाता है कि बिठूर में ही बालक ध्रुव ने सबसे पहले ध्यान लगाया था।