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... तस्वीरों में देखें, मालिनी अवस्थी के साथ लोककला के विविध रंग

Mon, 27 Feb 2017 11:48 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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मालिनी अवस्थी - फोटो : ओपी वाधवानी
लोक गायिका मालिनी अवस्थी के गीत ‘रेलिया बैरन पिया को लिए जाए ..., होली खेले रघुवीरा...’ का जादू कानपुर के दर्शकों के सिर चढ़कर बोला। मौका था मालिनी अवस्थी की संस्था सोनचिरैया द्वारा रागेंद्र स्वरूप सभागार में रविवार को आयोजित कार्यक्रम ‘आजादी के लोकरंग’ का।
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मालिनी अवस्थी
विलुप्त हो रही लोक कलाओं के कलाकारों ने अपनी प्रतिभा से मंत्रमुग्ध कर दिया। जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने सभी कलाकारों की हौसलाफजाई के लिए एक-एक हजार रुपये पुरस्कार की घोषणा की। कहा कि एक साथ लोक विधाओं के इतने रंग कम ही देखने को मिलते हैं।
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मालिनी अवस्थी
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पद्मश्री गिरिराज किशोर, जिलाधिकारी और पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने दीप प्रज्ज्वलन से किया। पहली प्रस्तुति देशी टंकार की हुई इसमें वाद्य यंत्र नक्कार, ढोलक, नाल, दुक्कड़ बजाकर कलाकारों ने दर्शकों को बांध दिया।
 

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मालिनी अवस्थी
रायबरेली से आई कलाकार शीलू राजपूत ने बैसवारा शैली में आल्हा में गदर से लेकर आजादी की बाद तक की गाथा सुनाई। वह आल्हा सम्राट उन्नाव निवासी लल्लू वाजपेई की शिष्या रही हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश की लोक नृत्य परंपरा धोबिया की प्रस्तुति गाजीपुर से आई जीवनराम की टीम ने दी।
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कार्यक्रम में प्रतिभा दिखाते कलाकार - फोटो : अमर उजाला
‘खेत पर किसान सीमा पर सिपहिया, धीरे - धीरे खेवाए अपनी देश की नईया से...’ देश की एकता अखंडता को सहेजकर रखने का संदेश दिया। रमेश पाल की टीम ने पाई डंडा औैर दिवारी नृत्य से जोश, उत्साह, शौर्य का प्रदर्शन किया।
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कलाकार
मथुरा से आए कलाकारों ने मयूर नृत्य, बृज की फूलों की होली खेल का मनभावन अभिनय किया। मालिनी अवस्थी ने सुंदर सदूर भूमि भारत बटुहिया भारत के बटुहिया, मोरे प्राण बसे हिम तोहरे बटुहिया.. से अपनी प्रस्तुति की शुरूआत की।
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मालिनी अवस्थी
कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी केपी सिंह समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। प्रदेश में लोक कला की कद्र नहीं कानपुर। मालिनी अवस्थी का जन्म कन्नौज में हुआ था। उनकी शादी आर्यनगर कानपुर में हुई है। मालिनी में प्रदेश सरकार के प्रति लोक कलाओं की उपेक्षा की टीस दिखी।

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मालिनी अवस्थी
मालिनी अवस्थी ने कहा कि प्रदेश में लोककला की प्रतिभाओं की कमी नहीं हैं लेकिन उनकी कद्र नहीं हो रही है। स्वयं को लोक कला क्षेत्र में 27 साल बाद पद्मश्री मिलने पर सवाल उठाया कि आखिर इतनी देरी क्यों होती है।
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मालिनी अवस्थी
मालिनी ने कहा कि कई ऐसे नाम हैं जिन्हें बहुत पहले पद्मश्री पुरस्कार मिलने चाहिए थे, पर सब उपेक्षित रह गए। सरकार को इस गंभीर विषय पर यह सोचना होगा। आज कलाकार फिल्म, सिनेमा की ओर भाग रहे हैं।
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