23 साल की उम्र में पति की मृत्यु के बाद सेना की नौकरी कर देश की रक्षा का बीड़ा उठाया। इसके बाद सेना की नौकरी छोड़कर सियासत में उतर आईं। मौजूदा समय में वह दिल्ली में आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता हैं। हम बात कर रहे हैं कैप्टन शालिनी सिंह के बारे में। मौजूदा दौर में वह महिला सशक्तीकरण की मिसाल हैं। उन्हें उनकी उपलब्धियों के लिए केंद्र सरकार की ओर से वीर नारी सम्मान भी मिल चुका है। पेश है उनसे बातचीत के कुछ अंश।
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राष्ट्रपति कर चुके हैं सम्मानित
- फोटो : amar ujala
छोटी सी उम्र में पति की शहादत के बाद खुद को कैसे संभाला?
पति मेजर अविनाश सिंह भदौरिया 28 सितंबर वर्ष 2001 को कश्मीर में चार आतंकियों से मोर्चा लेते हुए शहीद हुए थे। तब मैं 23 साल की थीं। बेटा ध्रुव दो साल का था। पति के शहीद होने के बाद आंसुओं को ताकत बना सेना में शामिल होने का फैसला लिया।
इसके बाद जीवन का अहम मोड़ कौन सा रहा?
पति की शहादत के सिर्फ तीन महीने के भीतर शॉर्ट सर्विस कमीशन में चयन हो गया। पति की बरसी के 20 दिन शेष थे जब सेना में कमीशन मिला। इस बीच पति को कीर्ति चक्त्रस् (मरणोपरांत) दिया गया। सेना की वर्दी में ही तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से पति का सम्मान प्राप्त किया था।
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शालिनी
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कब और क्यों सेना की नौकरी छोड़ी?
छह साल सेना की नौकरी की। राजस्थान के बाड़मेर बॉर्डर पर चार माह, झांसी में दो साल, जबलपुर में छह माह और दिल्ली में ढाई साल तैनाती रही। इसके बाद बेटे के भविष्य के लिए सेना छोड़ने का फैसला लिया। उस पर भी ध्यान देना जरूरी था।
सौंदर्य प्रतियोगिता का अनुभव कैसा रहा
वर्ष 2017 में सौंदर्य प्रतियोगिता ‘मिस अर्थ’ में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस प्रतियोगिता के सिंगल पैरेंट कैटेगिरी में मिसेज इंडिया क्लासिक क्वीन का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला हूं। यह पल आज भी आंखों में जीवंत है। हमेशा कुछ न कुछ नया करने की सोचती रहती थी इस कारण इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था।
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शालिनी के पति सेना में थे
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वह वक्त जब खुद पर भरोसा रखा और मुश्किल से निकलीं?
वर्ष 2009 में सड़क हादसे में बुरी तरह से घायल हो गई थी। पैर में 18 फ्रैक्चर हुए थे। डॉक्टरों ने यहां तक कह दिया था कि शायद ही मैं फिर से चल पाऊं। हिम्मत नहीं हारी और एक साल में अपने पैरों पर फिर से खड़े होकर दिखाया।
शहीदों के परिवारों की किस तरह से मदद कर रही हैं?
शहीदों की पत्नियों और बच्चों की हर संभव मदद करती हूं। उनको जीवनयापन में किसी भी तरह की दिक्कत न आए इसका ख्याल रखती हूं। शहर में भी जरूरतमंदों की मदद के लिए एक प्लेटफॉर्म बनाऊंगी।
संदेश - जीवन में कोई अनहोनी या दुर्घटना हो जाए या फिर वह व्यक्ति आपके जीवन से दूर हो जाए जिसको आप सबकुछ मानते थे, जिसके कारण आप जी रहे थे, ऐसे हालात में कभी हार न मानें। परिस्थितियों को समझते हुए उनका सामना करें। महिलाओं पर जिम्मेदारियां होती हैं उसे कमजोरी नहीं बल्कि मजबूती बनाएं। हर रात के बाद सुबह जरूर आती है इसलिए कैसे भी हालात हों कभी भी हार नहीं माननी चाहिए।