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जिंदगी से खिलवाड़: कानपुर सड़क हादसे में हुई 18 मौतों की जांच के मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा

Thu, 10 Jun 2021 07:01 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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कानपुर में भीषण सड़क हादसा - फोटो : amar ujala
कानपुर हादसे के पीछे बस चालक के साथ ट्रैवेल्स वालों की भी बड़ी लापरवाही सामने आई है। बस की क्षमता 52 यात्रियों की थी, जबकि उसमें 115 से अधिक यात्री बैठे थे। यहां तक की बस की गैलरी में भी यात्री भरे थे। ये यात्री तीन ट्रैवेल्स कंपनियों ने बैठाए थे। पुलिस, प्रशासन और आरटीओ की टीम ने जांच के दायरे मेें यह तथ्य शामिल किया है। इन पर भी कार्रवाई होनी तय है। जिस टेंपो से कर्मचारियों को लाया और ले जाया जाता था, वह भी पूरी तरह से कंडम थी। मां पीतांबरा बस सर्विस की डबल डेकर बस की क्षमता 52 यात्रियों की थी। बाराबंकी से बस गुजरात के लिए रवाना हुई। फजलगंज में कल्पना ट्रैवेल्स समेत तीन ट्रैवेल्स वालों ने अपने भी यात्री बैठा दिए। एक सीट पर दो यात्रियों को बैठाया गया। आठ दस लोग गैलरी में बैठे थे। इसके बाद बस फजलगंज से रवाना हुई। यह कोरोना प्रोटोकॉल का भी उल्लंघन है। इस समय क्षमता से आधी सवारियां ही बैठाने का आदेश है।

 
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कानपुर हादसा - फोटो : अमर उजाला
विभाग तक पहुंचता रुपया, इसलिए करते मनमानी
ट्रैवेल्स कंपनियां अंधेर मचाए हुए हैं। फजलगंज में हर रोज सैकड़ों बसों की लाइन लगती है। ठूंस-ठूंसकर यात्री भरे जाते हैं। मनमाने पैसे भी वसूलते हैं। जिम्मेदार विभाग खामोश रहते हैं, क्योंकि उनकी भी जेब गर्म होती रहती है। 

 
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कानपुर हादसा - फोटो : अमर उजाला
टेंपो का न फिटनेस, न बीमा, मौत की थी सवारी
टेंपो मालिक अविनाश की दो टेंपो चलते हैं। एक टेंपो ईश्वरीगंज व लाल्हेपुर गांव से बिस्कुट फैक्टरी कर्मचारियों को लेकर जाता था तो दूसरा उदयपुर गांव से कर्मचारी ले जाता था। जांच में पता चला कि दोनों टेंपो कंडम हैं। उनका फिटनेस नहीं है। न ही बीमा है। हर रोज सात-आठ सवारियों की क्षमता वाली टेंपो से बीस से अधिक लोगों को लाया और ले जाया जाता था। मंगलवार को भी दोनों टेंपो की अलग-अलग गांव से एक ही समय पर रवाना हुई थी। उदयपुर गांव से जाने वाली टेंपो फैक्टरी पहुंच गई थी। जब दूसरी टेंपो नहीं पहुंची तो फोन किया गया। तब पता चला कि हादसा हो गया है।

 

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कानपुर सड़क हादसा - फोटो : अमर उजाला
आरटीओ ने वाहन स्वामियों को दी क्लीन चिट
प्राइवेट बस और टेंपो की भिड़ंत से हुईं 18 लोगों की मौत के बाद आरटीओ ने दोनों वाहनों के स्वामियों को क्लीन चिट दे दी है। परिवहन आयुक्त को भेजी गई प्रारंभिक रिपोर्ट में यह बात स्पष्ट कर दी गई है कि टेंपो और बस के कागजात दुरुस्त थे। हादसा टेंपो के उल्टी दिशा में आने की वजह से हुआ है। हालांकि बस मालिक के नियम तोड़ने की वजह से पहले भी आठ बार चालान हो चुका है। झांसी में मां पीतांबरा ट्रैवेल एजेंसी की स्लीपर बस (यूपी 93- बीटी6221) का मालिक अर्जुन सेजवार है।

 
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कानपुर सड़क हादसा - फोटो : अमर उजाला
वाहन स्वामी का पता झांसी के 967 मसीहागंज, सीपरी बाजार दर्शाया गया है। फिटनेस 19 जुलाई 2022 तक है। बीमा नवंबर 2021 तक, परमिट 14 जून 2023 तक का है। रोड टैक्स 30 अप्रैल 2021 तक जमा था। इस आधार पर चालान होगा। वहीं, टेंपो टैक्सी का मालिक कानपुर देहात के करसा गांव का रहने वाला अमित कुमार है। फिटनेस 18 अक्तूबर 2021, बीमा 13 अक्तूबर 2021 और परमिट 16 अक्तूबर 2024 तक मान्य है।

 
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कानपुर सड़क हादसा - फोटो : अमर उजाला
कबाड़ के टेंपो पर रोज लदते थे 20 से ज्यादा लोग, न पुलिस टोकती थी न ही आरटीओ
ईश्वरीगंज और लाल्हेपुर गांव के कई ग्रामीण रोज अंबे बिस्कुट कंपनी में मजदूरी करने जाते थे। ईश्वरीगंज के रहने वाले तीन भाई बिस्कुट कंपनी का कामकाज देखते हैं। एक भाई सुपरवाइजर है। बाकी दोनों मजदूर मुहैया कराने की ठेकेदारी करते हैं। दोनों भाइयों ने दो माह पूर्व कबाड़ हो चुके दो टेंपो 40 और 30 हजार रुपये में खरीदे थे। मजदूरों के वेतन से प्रति सवारी 1500 से 1200 रुपये प्रति माह वसूले जाते थे। टेंपो चालक गोलू सिंह भी कंपनी में ही काम करता था, लेकिन टेंपो चलाने के बदले उसका किराया बच जाता था। टेंपो चालक को डीजल बचाने के सख्त निर्देश थे, जिससे वहअक्सर शॉर्ट कट अपनाता था। यही शार्ट कट हादसे की वजह बना।

 
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