अगर अापने भी नोटबंदी के दौरान यानी 10 नवंबर से 30 दिसंबर तक बैंक खाते में पुराने नाेट जमा कराएं हैं ताे यह खबर अापके लिए ही है। अायकर ने एक नया फरमान जारी कर दिया है, जाे कुछ लाेगाें काे मुसीबत में डाल सकती है।
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भारतीय मुद्राएं
अायकर विभाग ने ढाई लाख रुपये से अधिक जमा कराने वाले एेसे लाेगाें की सूची तैयार की है जिन्हाेंने आयकर विभाग के नोटिस का अभी तक जवाब नहीं दिया है। एेसे लाेगाें काे ईमेल या मोबाइल पर मैसेज के जरिये भेजे गए नोटिस का जवाब सात दिन के भीतर देना था। अब अायकर ने एेसे लाेगाें काे मुसीबत में डाल दिया है।
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अायकर विभाग
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स डिपार्टमेंट (सीबीडीटी) ने आयकर अधिकारियों को निर्देशित किया है कि नोटिस का जवाब न देने वाले लोगों के जमा धन को कालाधन मानते हुए आगे की जांच शुरू करें।
आयकर विभाग ऐसे सभी लोगों को ऑनलाइन नोटिस भेज रहा है जिन्होंने नोटबंदी के दौरान ढाई लाख रुपये से अधिक जमा किया है।
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अायकर विभाग
नोटिस जारी होने की तारीख से सात दिन तक इसका जवाब विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन फारमेट में देना है। सीबीडीटी ने स्पष्ट किया है कि यह पूछताछ किसी जांच का हिस्सा नहीं है। विभाग सिर्फ जमा हुई रकम का वेरीफिकेशन कर रहा है। इसमें सामान्य सूचनाएं ही मांगी गई हैं। ऐसी स्थिति में भी यह जमाकर्ता नोटिस का जवाब नहीं देता तो उसके खाते में जमाधन को कालाधन माना जाएगा। आयकर अधिकारियों ने बताया कि 70 वर्ष की उम्र पार कर चुके बुजुर्गों को वेरीफिकेशन से छूट दी गई है।
उधार लेकर चुकाया लोन ताे भी फंसेंगे
आयकर की जांच में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें पता चला है कि व्यक्ति ने किसी से उधार लेकर अपने लोन खाते में कैश जमा कर दिया। ऐसी स्थिति में जिससे उधार लिया गया वह पांच लाख रुपये दिखाने की स्थिति से बच गया। इस वजह से आयकर विभाग लोन खाते में जमा करने वालों से भी जमा की गई रकम का स्रोत पूछ रहा है। यदि उधार ली गई रकम का स्रोत छिपाकर देने वाले को फायदा पहुंचाने की बात सामने आई तो सौ फीसदी तक पेनाल्टी लगाई जा सकती है।