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ट्रेन में पति-पत्नी का 'भयंकर झगड़ा', आरोप 'खुद के बच्चों की तस्करी', ये थी विवाद की वजह

Sun, 23 Sep 2018 07:34 PM IST
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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परिवार के साथ जीआरपी चौकी में बैठा चंदौसी का धीरज - फोटो : अमर उजाला
यूपी के कन्नौज जिले में  ट्रेन से मजदूरी करने चंदौसी से दिल्ली जा रहे एक दंपति पर खुद के बच्चों की तस्करी के आरोप लगे। जीआरपी ने आरोपी दंपति को कन्नौज स्टेशन पर उतार कर पूछताछ की। इसके बाद मामला पति-पत्नी के बीच विवाद का निकला। पति-पत्नी को समझाने के बाद जीआरपी थाने से दोनों को बच्चों सहित छोड़ दिया गया। हालांकि खुद के बच्चों की तस्करी के आरोपों से क्षुब्ध होकर दंपति ने दिल्ली जाने की बजाए वापस अपने घर लौट जाना ज्यादा मुनासिब समझा और वापसी की ट्रेन से लौट गया। 

 
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परिवार के साथ जीआरपी चौकी में बैठा चंदौसी का धीरज  - फोटो : अमर उजाला
शनिवार को लखनऊ से जयपुर एक्सप्रेस की जनरल बोगी में सफर कर रहे दंपति के बीच झगड़ा होने लगा। विवाद इतना बढ़ गया कि यात्रियों ने जीआरपी को सूचना दी। ट्रेन के कन्नौज स्टेशन पहुंचने पर जीआरपी चौकी इंचार्ज दिनेश कुमार ने दंपति को उनके बच्चाें मनोरमा(12), रवि(7) और कवि (4) को डिब्बे से नीचे उतार लिया। स्टेशन में पूछताछ के दौरान दंपति की पहचान जनपद चंदौसी निवासी धीरज पुत्र शंकर गौड़ व उसकी पत्नी रेखा  के रूप में हुई। दोनों अपने गांव से मजदूरी करने दिल्ली जा रहे थे। उनके गांव के कुछ लोग पहले से दिल्ली में मजदूरी कर रहे है। ये दंपति भी कई साल से कुछ माह के लिए मजदूरी करने के लिए जाता रहा है।
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परिवार के साथ जीआरपी चौकी में बैठा चंदौसी का धीरज, दिनेश कुमार जीआरपी इंचार्ज - फोटो : अमर उजाला
शनिवार को दंपति बच्चों के साथ लखनऊ से जयपुर जा रही ट्रेन की जनरल बोगी में सवार हुई। ट्रेन की बोगी में किसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच झगड़ा होने लगा। इस पर किसी यात्री ने रेलवे हेल्प लाइन पर फोन कर दंपति को मानव तस्कर बताते हुए उनके साथ मौजूद तीनों बच्चों के अपहरण का आरोप लगा दिया। इसी सूचना पर जीआरपी ने दंपति को स्टेशन पर उतारा। वहीं अपने बच्चों की ही तस्करी के आरोप से क्षुब्ध होकर दंपति ने कन्नौज से ही वापस घर लौट जाने का फैसला लिया। चौकी प्रभारी दिनेश कुमार ने बताया कि सभी के आधार कार्ड चेक किए गए थे। वह तीनो बच्चे अपने माता-पिता के साथ थे। परिवार समेत वापस अपने गांव सनौल लौट गए हैं। 


इस बात पर शुरू हुआ दंपति में विवाद 
धीरज ने बताया कि दो साल पहले उसके गांव में कुछ लोगों के साथ विवाद हो गया था। इसका मामला चंदौसी कोर्ट में चल रहा है। हर माह इसकी कोर्ट में तारीख होती है। पत्नी दिल्ली में उसी जगह मजदूरी करने को कह रही थी जहां वह लोग पहले कर चुके थे, लेकिन वह अपनी पत्नी को यह समझाने का प्रयास कर रहा था कि कोर्ट में तारीख होने पर वह हर माह दिल्ली से वापस चंदौसी कैसे आएगा। कहा कि वह अपनी पत्नी को यह समझाने का प्रयास कर रहा था कि जब तक मुकदमा कोर्ट में चल रहा है तब तक हम लोग चंदौसी में ही मजदूरी करेंगे। इसी बात को लेकर ट्रेन में विवाद शुरू हुआ। 


 
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परिवार के साथ जीआरपी चौकी में बैठा चंदौसी का धीरज  - फोटो : अमर उजाला
भूमिहीन, आवास हीन है धीरज का परिवार
 धीरज ने बताया कि उसके पिता शंकर गौड़ की मौत हो चुकी है। वह गांव सनौल में झोपड़ पट्टी डालकर रह रहा है। वह भूमिहीन है। दिल्ली में पहले भी कई साल पानी बताया की ठेली लगाकर काम कर चुका है। उसके पास आजीविका चलाने का कोई साधन नहीं है। और गांव में अच्छी मजदूरी न मिल पाने के कारण महानगरों में जा कर काम करता है। जिससे परिवार का पालन पोषण कर सके। 

दिल्ली में ओवरब्रिज के नीचे रहता था धीरज
 धीरज ने बताया कि उसके गांव के करीब ढाई दर्जन से अधिक लोग दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर पानी के बताशों की ठेली लगाते है। इसी से होने वाली क माई से परिवार का पालन-पोषण होता है। बताया कि रहने के लिए किराए पर कमरा लेने भर के पैसे नहीं होते है। दिल्ली में बने ओवरब्रिज के नीचे चादर की दीवारें बनाकर गुजर-बसर करते है। बताया कि दो साल पहले तक वह भी अपने तीनों बच्चों व पत्नी के साथ वहीं रहता था।
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