कोई 15 साल पहले तक फूलनदेवी के गुढ़ा का पुरवा गांव में घर-घर शराब की भट्ठियां थीं। सूरज ढलते ही लगभग पूरा गांव नशे में झूमने लगता था। आसपास के गांवों में भी शराब सप्लाई की जाती थी। इसी के साथ और विकार भी आ गए थे। बदनामी के चलते इस गांव में कोई अपनी बेटी की शादी करने से भी कतराता था।
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बेहमई कांड फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
भगवती देवी प्रधान बनीं तो उन्होंने शराब से गांव का पिंड छुड़ाने का बीड़ा उठाया और सफल जंग लड़ी। जिला प्रशासन ने उनकी सराहना की है। दो बार प्रधान रहीं भगवती देवी ने बताया कि शराब के कारण नई पीढ़ी भी बर्बाद हो रही थी। न तो लड़कों का काम में मन लगता था और न ही पढ़ने में।
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फूलन देवी (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
कई तो होश संभालते ही नशे के धंधे में कूद पड़े। इससे बड़ी दिक्कत महिलाओं की थी। अभाव में बदले स्वाभाव ने बड़े झगड़े पैदा कर दिए। घर टूटने के कगार पर आ गए। घर-गृहस्थी तबाह होने लगी। भगवती देवी ने संकल्प लिया कि गांव में एक भी शराब की भट्ठी नहीं चलने देंगी, लेकिन इसके लिए बहुत बड़ा संघर्ष करना पड़ा। कोई लड़ने को तैयार हो जाता तो कोई धमकी देकर डराता था।
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फूलन देवी (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
भगवती बताती हैं कि वह झुकीं नहीं। गांव की महिलाओं की टोली बनाई और इनका हौसला बढ़ाया। यह इतना आसान काम नहीं था। टोली शराब की भट्ठियों पर टूट पड़ी। शुरुआत में मुहिम का उपहास बनाया गया, फिर जमकर विरोध किया गया और आखिरकार गांव वालों ने शराब के धंधे से तौबा कर ली।
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फूलन देवी (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
बहुत कोशिश की गई, मगर गांव में सरकारी शराब का ठेका भी नहीं खुलने दिया। इसके बाद गांव के हालात सुधरने लगे। कोई खेतीबाड़ी पर ध्यान देने लगा, किसी ने छोटामोटा धंधा कर लिया तो कोई कमाने के लिए बड़े शहर चला गया। अब गांव के विकास की सामूहिक कोशिश हो रही है। गांव में प्राथमिक स्कूल और इंटर कालेज हैं। गांव के जगमोहन कहते हैं कि शराब का धंधा बंद होने के बाद सुधार दिख रहा है। यहां की कोई लड़की फूलन देवी नहीं बनना चाहती पर शोषण के खिलाफ आवाज उठाना सीख गई हैं।
प्रयास रंग लाया
भगवती देवी ने गांव की कुछ महिलाओं के साथ जागरुकता और नशे का धंधा बंद करने की जो मुहिम चलाई, उसका खासा असर पड़ा है। पिछड़ी जाति के लोग भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ भी किसी हद तक मिल रहा है। - रामसेवक, गुढ़ा का पुरवा
दिक्कतें भी हैं
- बेहमई से कोई डेढ़ किलोमीटर दूर यमुना पर पुल बन रहा है। गांव वाले चाहते हैं कि उस पुल का लिंक बेहमई से कर दिया जाए तो विकास का बड़ा रास्ता खुलेगा।
- बेहमई सहित आसपास के सभी गांवों में छुट्टा गोवंशों की समस्या है। हजारों बीघा फसल नष्ट हो जाती है। गांव वाले सारी रात पहरेदारी करते हैं।
- गुढ़ा का पुरवा में नोन नदी पर पक्के पुल की मांग है। बारिश में कई घर डूब जाते हैं। बाढ़ तबाही लेकर आती है।
- गांव में पानी की टंकी बन जाए तो बड़ी समस्या हल हो जाए। कई बार जिला प्रशासन से गुहार की है।
- सिंचित भूमि कम बची है। हजारों बीघा जमीन यमुना खा गई। रेत समेटने वालों ने समस्या और बढ़ा दी है।
- सिंचाई के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। दरअसल, बिजली कटौती बड़ी समस्या है। अक्सर रात में खेतों के लिए पानी लगाने जाना पड़ता है।