फूलन देवी (फाइल फोटो)
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तीन बार सुनाई जा चुकी अंतिम बहस
शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि मुकदमे में तीन बार अंतिम बहस हो चुकी है लेकिन फैसला नहीं आ पा रहा। जब फैसले की घड़ी आती तो न्यायाधीश का स्थानांतरण हो जाता और कानून के अनुसार नए न्यायाधीश के आने पर दोबारा बहस सुनानी पड़ती है। दो माह तक लगातार चली बहस के बाद दिसंबर 2019 में फिर फैसला आने की उम्मीद थी लेकिन इस बार केस डायरी का पेंच फंस जाने के कारण फैसला अटक गया। केस डायरी मिल नहीं रही है।
जिले के पुराने मुकदमों में बेहमई कांड की फाइल को प्रथम वरीयता पर रखा गया है। अभियोजन ने सिर्फ तीन साल में गवाही पूरी करा दी। तीन बार कोर्ट में बहस भी सुनाई जा चुकी है। पुलिस फरार आरोपियों को ढूंढने के प्रयास कर रही है। कानूनी पेचीदगियों का लाभ आरोपियों को मिल रहा है। मुकदमे के जल्द निस्तारण के प्रयास किए जा रहे हैं। - राजू पोरवाल, शासकीय अधिवक्ता फौजदारी
मुकदमे के जल्द निस्तारण के लिए न तो सरकार ने कोई परवाह दिखाई और न ही न्यायिक कार्यवाही में ही तेजी आई। इसके चलते मुकदमा 40 साल से लंबित है। आरोपियों की ओर से न्यायिक कार्यवाही के संचालन में कोई हीलाहवाली नहीं की गई। खुद को निर्दोष साबित करने के लिए आरोपी सालों से न्यायालय के चक्कर काट रहे हैं। - गिरीश नारायण दुबे, आरोपियों के अधिवक्ता