शिवली थाने में 1995 से अब तक तैनात रहे पुलिस कर्मियों का ब्योरा बिकरू कांड की जांच के लिए गठित एसआईटी को सौंप दिया गया है। सूची में 2200 पुलिस कर्मियों की डिटेल दी गई है। इसमें सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक हैं। एसआईटी ने यह ब्योरा पुलिस से मांगा था।
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kanpur encounter SIT
- फोटो : अमर उजाला
बिकरू कांड में चौबेपुर एसओ समेत कई पुलिस कर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। चौबेपुर एसओ विनय तिवारी व हल्का इंचार्ज केके शर्मा विकास से सांठगांठ के आरोप में जेल में है। बिकरू गांव 2004 में चौबेपुर थाने में जोड़ा गया था, इसके पहले वह शिवली कोतवाली से जुड़ा था।
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वर्ष 2001 में कोतवाली के अंदर राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसमें विकास दुबे मुख्य आरोपी था। बाद में कोर्ट से वह बरी हो गया था। शिवली से बिकरू की दूरी अधिक होने पर उसे चौबेपुर थाने में जोड़ दिया गया था।
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बिकरू कांड की जांच कर रही एसआईटी ने शिवली कोतवाली में 1995 से लेकर अब तैनात रहे पुलिस कर्मियों की सूची मांगी थी। एसपी अनुराग वत्स ने बताया कि 2200 पुलिस कर्मियों के नाम, तैनाती का समय, स्थानांतरण के बाद दोबारा तैनात होने का विवरण भी दर्ज किया गया है।
बता दें कि बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे और उसके पांच साथियों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। पुलिस इस मामले में अभी तक 12 से अधिक लोगों को जेल भेज चुकी है। मामले की जांच के लिए एसआईटी और न्यायिक आयाेग का गठन किया गया था। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले की जांच के लिए फिर से समित गठित करने के आदेश दिए हैं।