दहशतगर्द विकास दुबे का सगा भाई दीपक दुबे उर्फ दीपू 16 साल से जमानत पर बाहर है। वह विकास के साथ हर छोटे-बड़े अपराध में शामिल रहा है। हैरानी की बात ये है कि वह न तो थाना स्तर और न ही जिला स्तर पर शीर्ष अपराधियों की सूची में शामिल है और न ही उसकी हिस्ट्रीशीट खुली।
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Kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
दहशतगर्द भाइयों के खौफ से चौबेपुर समेत आसपास के थानों की पुलिस कार्रवाई करने से पीछे हटती रही है। बिकरू कांड के बाद लखनऊ में उसके खिलाफ केस दर्ज हुआ है और उस पर 20 हजार का इनाम भी घोषित किया गया है।
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फाइल फोटो
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शिवली थाना क्षेत्र में सन 2000 में ताराचंद इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल सिद्घेश्वर पांडेय की हत्या हुई थी। इसमें विकास दुबे और उसका भाई दीपक दुबे भी शामिल था। दोनों जेल गए थे और उम्र कैद की सजा हुई थी।
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Kanpur encounter
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शिवली थाने के इंस्पेक्टर एमपी सिंह ने बताया कि 2004 में दीपक को हाईकोर्ट से इसी मामले में जमानत मिली थी। उसके बाद से वो जेल से बाहर है। जेल से छूटने के बाद उसके खिलाफ कानपुर नगर के कल्याणपुर थाने में मारपीट और बलवा का केस दर्ज हुआ लेकिन उसमें फाइनल रिपोर्ट लग गई थी। तब से वो विकास दुबे के काले धंधों में शामिल होता रहा है लेकिन उस पर केस दर्ज नहीं हुए।
बता दें कि बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे और उसके पांच साथियों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। पुलिस इस मामले में अभी तक 12 से अधिक लोगों को जेल भेज चुकी है। विकास दुबे के भाई दीपक दुबे उर्फ दीपू को पकड़ने के लिए पुलिस ने उसके सिर पर भी 20 हजार का इनाम घोषित किया है।