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कानपुर : हैलट में कोरोना से 160 गुमनाम मौतें, उप प्राचार्य का तर्क- डाटा फीड करने वाला हो गया था संक्रमित

Mon, 31 May 2021 01:10 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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रात को भी जलती थी चिताएं - फोटो : amar ujala
कानपुर में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान संक्रमित मरीजों की मौतों का सच छिपाने में शहर का सबसे बड़ा अस्पताल हैलट सबसे आगे निकल गया। अप्रैल में दूसरी लहर की पीक के दौरान कोरोना से हुई 160 मौतें लिखापढ़ी में कहीं दर्ज ही नहीं हुईं। इन गुमनाम मौतों की पुष्टि जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की उप प्राचार्य डॉ. रिचा गिरी भी करती हैं। डॉ. रिचा गिरी ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर अप्रैल में पीक पर थी। इमरजेंसी में रोजाना 100-110 मरीज आ रहे थे। हम सभी की कोविड-19 जांच कराते थे। एंटीजन में पॉजिटिव आने वालों को कोविड विंग में भर्ती किया जाता था और निगेटिव आए मरीजों की लक्षणों के आधार पर आरटीपीसीआर जांच कराई जाती थी। बताया कि अप्रैल में कोरोना की पीक के दौरान ही डाटा अपडेट करने वाला कर्मचारी भी संक्रमित हो गया। इससे कोरोना से हुई कई मौतों का डाटा अपलोड ही नहीं किया जा सका।
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दिल दहला देने वाला है घाटों का नजारा - फोटो : अमर उजाला
अपडेट करने से रह गई संक्रमित मरीजों की मौतों का आंकड़ा जुटाया जा रहा है। अब तक 160 ऐसे मरीजों को चिह्नित किया जा चुका है, जिनकी मौत का ब्योरा पोर्टल पर अपलोड नहीं है। इनमें कुछ ऐसे हैं, जो निगेटिव होकर वार्ड में शिफ्ट हुए थे।

 
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दिल दहला देने वाला है घाटों का नजारा - फोटो : amar ujala
जल्द ही पोर्टल पर संख्या को अपडेट करा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि दो महीने में हैलट अस्पताल में ही लगभग 500 मरीजों की मौत में हुई है। आजाद नगर की रहने वाली 75 वर्षीय महिला को दिल्ली में कोरोना की पुष्टि हुई थी। इसके बाद उन्हें शहर के निजी अस्पताल में भर्ती किया गया।

 

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दिल दहला देने वाला था घाटों का नजारा - फोटो : अमर उजाला
इसकी सूचना सीएमओ कार्यालय को दी गई। हालत बिगड़ने पर रोगी को हैलट शिफ्ट किया गया। यहां वेंटिलेटर पर रखा गया। इसके बाद मौत हो गई। इसे आंकड़ों में शामिल नहीं किया गया। बर्रा के रहने वाले 57 साल के मरीज को कोरोना के लक्षण थे।

 
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बिठूर घाट का कुछ ऐसा था खौफनाक मंजर - फोटो : amar ujala
उनको हैलट में भर्ती किया गया और सैंपल जांच के लिए भेज दिया गया। रोगी की उसी दिन मौत हो गई। लक्षण होने की वजह से उसका अंतिम संस्कार कोविड गाइड लाइन के तहत हुआ। कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट तीन दिन बाद आई। इनकी मौत भी कोरोना के आंकड़ों में नहीं गिनी गई।
 
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