शहीद चंद्रशेखर आजाद का चित्र बनाती महिला चित्रकार।
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टकसाल मुहल्ले में बिताया समय
झांसी में चंद्रशेखर आजाद को क्रांतिकारी मास्टर रुद्र नारायण सिंह का साथ मिला। वे टकसाल मुहल्ले में रहते थे। इसके साथ ही सदाशिव राव मलकापुरकर, भगवानदास माहौर और खनियाधाना के महाराज खलक सिंह जूदेव ने उनकी काफी मदद की थी। इसके अलावा नई बस्ती, गनपत खिड़की, बिलैया खिड़की और दतिया में उनका प्रवास रहा।
मां जगरानी देवी का भी यहीं हुआ निधन
चंद्रशेखर आजाद के बलिदान के कुछ समय बाद ही उनके पिता शिवराम तिवारी की भी मौत हो गई थी। ऐसी परिस्थितियों में उनकी मां जगरानी देवी अकेली पड़ गईं। झाबुआ जिले के भाबरा गांव में वह गुमनामी में दिन बिताने लगी थीं। यहां वे लकड़ी और कंडे बेचकर जीवन बिता रही थीं। मां के बारे में जानकारी मिलने पर आजाद के सहयोगी सदाशिव राव मलकापुरकर उन्हें झांसी ले आए। चारों धाम की तीर्थ यात्रा कराई। झांसी में कई साल बिताने के बाद मां जगरानी देवी का 22 मार्च 1951 को निधन हो गया। आज भी उनकी समाधि बड़ागांव गेट स्थित मुक्तिधाम पर बनी हुई है।