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दर्दनाक: छत पर खेलते समय 11 हजार वोल्टेज के तार की चपेट में आए परिवार के तीन बच्चे, दो की जान गई, एक की हालत गंभीर

Wed, 18 Aug 2021 10:40 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
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मृतक परी और प्रिंस (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में मंगलवार को घर की छत के पास से गुजर रहे 11 हजार वोल्ट के विद्युत तार की चपेट में आने से एक ही परिवार के तीन मासूम बच्चे गंभीर रूप से झुलस गए। जहां एक बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि दोनों को बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। जहां देर रात दूसरे बच्चे की मौत हो गई। तीसरा बच्चा 80 फीसदी झुलस गया। जिसका अभी इलाज चल रहा है। उसकी भी हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना से गांव में कोहराम मच गया है। वहीं, परिजनों और ग्रामीणो ने बिजली विभाग पर शिकायत के बावजूद पोल को न हटाने का आरोप लगाया है। वह विभाग के दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। तो वहीं समाजसेवी जज अन्ना सिंह धरने पर बैठ गए हैं। देखें अगली स्लाइड्स...।
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प्रतीक, 80 प्रतिशत झुलसा (वाराणसी में चल रहा इलाज)। - फोटो : अमर उजाला
जौनपुर के मछलीशहर कोतवाली के कौरहा गांव निवासी शंकरलाल गुप्ता (लल्लू राम) के दो प्रपौत्र प्रिंस(9) पुत्र श्यामलाल और प्रतीक(5) पुत्र विकास गुप्ता और उनकी पोती परी (2) पुत्री भजन राम मंगलवार की शाम को घर की छत पर खेल रहे थे। छत के बिल्कुल बगल से 11 हजार वोल्टेज का तार गया है।
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एंबुलेंस से बच्चों को अस्पताल ले गए थे परिजन। - फोटो : अमर उजाला
खेलते हुए बच्चे तार के संपर्क में आ गए। उस समय बिजली की आपूर्ति हो रही थी, जिससे तीनों बच्चे झुलस गए। लोगों ने पावर हाउस पर फोन कर आपूर्ति बंद करवाई।

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गमगीन परिजन। - फोटो : अमर उजाला
80 फीसदी झुलस गए बच्चे
घटना की सूचना पर वरिष्ठ उपनिरीक्षक राम प्रवेश कुशवाहा और कस्बा इंचार्ज केके चौधरी पहुंच गए। परिजनों के साथ तीनों झुलसे बच्चों को अस्पताल भेज दिया। बच्चों के 80 फीसदी तक झुलस जाने के कारण सभी को जिला अस्पताल रेफर किया गया। जहां परी को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। जबकि प्रिंस और प्रतीक की हालत गंभीर होने पर वाराणसी के लिए रेफर कर दिया गया। प्रिंस की देर रात मौत हो गई, जबकि प्रतीक का इलाज चल रहा है।
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धरने पर बैठे समाजसेवी जज सिंह अन्ना। - फोटो : अमर उजाला
परिजनों और ग्रामीणों की मांग है कि घटना के लिए बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराया जाए, साथ ही घर के समीप से गया पोल हटाया जाए तथा पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।

इस संदर्भ में मछलीशहर के एसडीओ अमर सिंह का कहना है कि बिजली की लाइन पहले खींची गई है और मकान बाद में बना है। जांच में पता चला है कि घटना तार में फंसी पतंग को लोहे के रॉड से निकालने के कारण हुई है। तार से बच्चे स्पर्श नहीं किए थे। खंभा हटवाने के बाबत कोई शिकायत नहीं आई है। यदि शिकायत आएगी तो विभाग समाधान करने का प्रयास करेगा। लटकते जर्जर तार बदलवाने के लिए विभाग को इस्टीमेट भेजा गया है। धन प्राप्त होने के बाद जर्जर तार बदलने का काम आरंभ होगा।
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