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आरव की मां की गुहार: मेरे सामने लटकाया जाए दरिंदा विराज, कहा- चाहती हूं कि उसकी मौत का मंजर मैं आंखों से देखूं

Sat, 11 Jul 2026 11:47 AM IST
Akash Dubey संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद

सार

डेढ़ साल के मासूम आरव की हत्या के दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को जिला जज की अदालत ने मौत की सजा सुनाई है। आरव की मां रति शर्मा ने कहा कि हत्यारे को सामने फांसी पर लटकाने से ही आत्मा को शांति मिलेगी।
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आरव हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
जिस बेरहमी से उस दरिंदे ने मेरे डेढ़ साल के मासूम बेटे को सड़क पर पटक-पटककर मार डाला, उसे देखकर मेरा कलेजा फट गया था। अदालत ने उसे फांसी की सजा सुनाकर न्याय तो किया है, लेकिन मेरी आत्मा को शांति तब मिलेगी जब उस हत्यारे विराज को मेरे सामने फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा।
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मां रति अपने परिवार के साथ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


यह रुंधे गले और आंखों में बहते आंसुओं के साथ मृत मासूम आरव की मां रति शर्मा ने कोर्ट का फैसला आने के बाद कहा। इधर, जिला जज की अदालत द्वारा दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद कोर्ट परिसर में मौजूद आरव की नानी पिंकी देवी अपने आंसुओं को रोक नहीं सकीं।
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मासूम का फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बामई स्थित मायके में मौजूद रति शर्मा ने रोते हुए उस काली दोपहर को याद किया जब शादी का प्रस्ताव ठुकराने पर उनके ही रिश्ते के फुफेरे भाई विराज ने उनके बच्चे की जान ले ली थी। रति ने कहा कि आरव अभी ठीक से बोलना भी नहीं सीखा था, वह सिर्फ अपनी मां को पहचानता था।

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सीसीटीवी में कैद वारदात - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रति ने कहा, जैसी तड़प मेरे बच्चे ने झेली थी, वैसी ही तड़प इस हत्यारे को भी मिलनी चाहिए। कानून ने अपनी तरफ से सख्त सजा दी है, जिसके लिए हम अदालत के आभारी हैं, लेकिन एक मां होने के नाते मैं चाहती हूं कि उसकी मौत का मंजर मैं खुद अपनी आंखों से देखूं।
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विवेचक - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एसएसपी के वादे पर खरे उतरे विवेचक इंस्पेक्टर अनुज कुमार
एसएसपी आदित्य लांग्हे ने इस केस को नजीर बनाने का संकल्प लिया था। उन्होंने जांच टीम को 15 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल करने और फास्ट ट्रैक कोर्ट की तर्ज पर ट्रायल कराकर सजा दिलाने का टास्क दिया था। इस पर इंस्पेक्टर अनुज कुमार पूरी तरह खरे उतरे। वारदात के अगले 6 दिन के भीतर ही कोर्ट में अकाट्य साक्ष्यों के साथ चार्जशीट दाखिल कर दी थी, जो 5 जून को कोर्ट में कमिट हो गई थी।
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कोर्ट में तैनात पुलिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जिला जज की अदालत में रिकॉर्ड समय में 15 जून से गवाहियां शुरू हुईं। अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत के समक्ष कुल 13 महत्वपूर्ण गवाह पेश किए गए थे। इसी प्रभावी पैरवी का नतीजा रहा कि शुक्रवार को जिला जज डॉ. बब्बू सारंग की अदालत ने सभी साक्ष्यों को पुख्ता मानते हुए विराज को फांसी के फंदे तक पहुंचा दिया।
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वह मकान जिसमें रति मासूम बेटे को लेकर आई थी - फोटो : अमर उजाला
पोस्टमार्टम रिपोर्ट: पहली ही पटक में टूट गई थी गर्दन
डॉक्टरों की टीम ने जब आरव के शव का पोस्टमार्टम किया, तो अंदरूनी तबाही देखकर उनके भी रोंगटे खड़े हो गए। रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे के शरीर पर बाहर खून का एक कतरा तक नहीं था। लेकिन अंदरूनी तौर पर पहली ही पटक में आरव के सिर (स्कैल्प) के सारे जोड़ खुल गए थे और वह अचेत हो गया था। दूसरी या तीसरी पटक में उसकी मौत हो गई थी। उसकी गर्दन की हड्डी और छाती की सभी पसलियां पूरी तरह चकनाचूर पाई गईं थीं।

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फैसले के बाद शासकीय अधिवक्ता - फोटो : अमर उजाला
20-21 लाख ले लो और एक्सीडेंट बताकर केस रफा-दफा करो...
वारदात को अंजाम देकर भागने के बाद विराज ने कानून के खौफ से बचने के लिए पीड़ित परिवार को रुपयों का लालच देना शुरू कर दिया था। उसने रती के नोएडा निवासी मौसा पंकज शर्मा को फोन मिलाया।

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सजा के बाद दोषी विराज को लेकर जाती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
सवा दो मिनट के इस ऑडियो में उसने गिड़गिड़ाते हुए कहा था कि गलती हो गई, मेरे घर पर 20-21 लाख रुपये नकद रखे हैं, वो आप ले लो। पुलिस को बोल देना कि यह एक एक्सीडेंट था। उसने अपने राजनीतिक रसूख की भी धौंस देने की कोशिश की। परिवार ने यह ऑडियो पुलिस को सौंप दिया था।

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मासूम आरव हत्याकांड में बड़ा फैसला - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अपनों की बेरुखी...न जन्म पर आए, न मौत पर और न ही सजा वाले दिन
मासूम आरव की किस्मत में अपनों का प्यार नहीं था। रति ने बताया कि दहेज प्रताड़ना के चलते वह गर्भावती होने के दौरान ही मायके आ गई थीं। आरव का जन्म ननिहाल में हुआ, तब भी उसके पिता सुमित कुमार या बदायूं के ससुरालीजन उसका मुंह देखने नहीं आए।
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आरव हत्याकांड - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हद तो तब हो गई जब विराज ने आरव को इतनी बेरहम मौत दी, तब भी खून के रिश्तों की बेरुखी बरकरार रही। पिता या ससुराल का कोई सदस्य आरव को आखिरी बार देखने तक नहीं पहुंचा था। अंततः अरांव के ग्राम बामई में ननिहाल पक्ष ने ही गमगीन माहौल में उसका अंतिम संस्कार किया था। शुक्रवार को जब बच्चे की हत्या पर फैसला आना था, तब भी कोई नहीं आया।
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