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आरव हत्याकांड की पूरी कहानी: 27 सेकंड में 8 बार सड़क पर पटका, दरिंदे के हाथ भी न कांपे; कोर्ट ने सुनाई फांसी

Sat, 11 Jul 2026 11:24 AM IST
Dhirendra Singh संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद

सार

शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में डेढ़ साल के आरव की निर्मम हत्या के दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को जिला जज की अदालत ने फांसी और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। सीसीटीवी फुटेज और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने इसे दुर्लभतम श्रेणी का अपराध माना।
 
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आरव हत्याकांड - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद के शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में 30 मई 2026 की दोपहर डेढ़ साल के मासूम आरव की निर्मम हत्या के मामले में दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक निवासी बदायूं को शुक्रवार को फांसी की सजा सुनाई गई है। साथ ही 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। वारदात के 41वें दिन जिला जज डॉ. बब्बू सारंग की अदालत से इस सजा का एलान हुआ।

दोषी अभियुक्त विराज उर्फ जितेंद्र पाठक निवासी शेखूपुर, सिविल लाइंस, बदायूं को अदालत ने बृहस्पतिवार को हत्या का दोषी करार दिया था। शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा में पुलिस दोषी विराज को जेल से अदालत लेकर पहुंची। दोपहर पौने तीन बजे करीब अदालत ने सजा का एलान किया तो विराज फूट-फूटकर रोने लगा। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए वैज्ञानिक साक्ष्य और गवाहियां पूरी तरह पुख्ता हैं।

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मासूम की हत्या का सीसीटीवी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यह घटना दुर्लभ से दुर्लभतम और बेहद जघन्य श्रेणी की है, जिसमें अपराधी को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जा सकता। सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस उसे दोबारा जेल ले गई। कोर्ट परिसर में मौजूद मृत मासूम आरव की नानी पिंकी देवी ने इस फैसले पर खुशी जताई।
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मासूम का फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विराज ने मायके और ससुराल की अनबन का उठाया था फायदा
मूल रूप से अरांव के गांव बामई निवासी रति शर्मा की शादी फरवरी 2024 में बदायूं निवासी सुमित कुमार से हुई थी। पति से अनबन के कारण रति जनवरी 2026 से अपने मायके में रह रही थी। 30 मई को पति पर कानूनी कार्रवाई की सलाह लेने के लिए शिकोहाबाद में एक अधिवक्ता से मिलने अपनी मां पिंकी देवी के साथ गई थी। अधिवक्ता ने पांच बजे मिलने का समय दिया था, तो वह मां के साथ अपनी मुंह बोली मौसी के शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी स्थित घर चली गई थी।

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दोषी विराज - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वहां सुमित का फुफेरा भाई विराज उर्फ जितेंद्र पाठक आ गया और रति को अपनी बातों में फंसाने लगा। विराज ने रति के सामने शादी का प्रस्ताव रखा, जिसे रति ने ठुकरा दिया था। शादी से इन्कार पर बौखलाए विराज ने खौफनाक साजिश रची। डेढ़ साल के मासूम बेटे आरव को टॉफी दिलाने के बहाने अपने साथ बाहर ले गया। घर से महज 50 मीटर दूर सुनसान सड़क पर ले जाकर दरिंदे ने रति से अपना बदला लेने के लिए मासूम आरव को 27 सेकंड के भीतर लगातार 8 बार पक्की सड़क पर बेरहमी से पटक-पटककर मार डाला।

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दोषी विराज - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मुठभेड़ में हुई थी गिरफ्तारी
रूह कंपा देने वाली यह वारदात सड़क पर लगे एक सीसीटीवी में कैद हो गई थी, जो कोर्ट में सबसे बड़ा और साक्ष्य साबित हुआ। वारदात के बाद आरोपी बच्चे के शव को घर के दरवाजे पर फेंककर भाग गया था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए घटना के कुछ ही घंटों बाद रात में मुठभेड़ के दौरान आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। मुठभेड़ के दौरान पैर में पुलिस की गोली लगने से वह घायल हुआ था।


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कोर्ट में तैनात पुलिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आरव को रास्ते का रोड़ा समझता था विराज
दोषी विराज के दिमाग में एक सनक सवार हो चुकी थी। उसे लगता था कि रति उससे शादी सिर्फ अपने डेढ़ साल के बेटे आरव की वजह से नहीं करना चाहती है। रति को हमेशा के लिए अपना बनाने की इसी सनक में विराज ने मासूम आरव को रास्ते से हटाने की साजिश रची।


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फांसी की सजा दिलाने के बाद खुशी जताते जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव उपाध्याय व साथ में अन्य शासकीय अधि - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वारदात से फांसी की सजा तक की टाइमलाइन
30 मई (दोपहर 2:30 बजे) आरोपी जितेंद्र पाठक उर्फ विराज ने आरव की निर्मम हत्या की।

30 मई (रात) शिकोहाबाद थाना पुलिस ने आरोपी को मुठभेड़ में गिरफ्तार किया।
31 मईः पोस्टमार्टम और शव का अंतिम संस्कार

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इसी घर के पास हुई थी वारदात - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
4 जूनः चार्जशीट दाखिल
15 से 21 जून के बीच सभी 13 गवाही हुईं

3 जुलाई को साक्ष्य पूरे
6 जुलाई को अंतिम जिरह

9 जुलाई को आरोपी विराज को दोषी करार दिया गया
10 जुलाई को फांसी की सजा दोषी को सुनाई गई
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