काशी के तुलसीघाट पर कार्तिक शुक्ल चतुर्थी गुरुवार शाम को सैकड़ों साल पुरानी परंपरा ‘नागनथैया’ लीला फिर जीवंत हो उठी। गेंद निकालने के लिए कान्हा के कदम के पेड़ से छलांग लगाते ही हर तरफ वृंदावन बिहारी लाल और हर-हर महादेव का जयघोष गूंज उठा। अद्भुत पलों के दर्शन के लिए घाटों-छतों से गंगा में नावों-बजड़ों तक जनसैलाब उमड़ा था। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें....
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तुलसी घाट पर नागनथैया लीला।
- फोटो : अमर उजाला
काशी में उत्तर वाहिनी गंगा गुरुवार को यमुना में तब्दील हो गईं। यमुना के तट पर श्रीकृष्ण सखाओं के साथ कंदुक क्रीड़ा में मग्न हैं। खेलते-खेलते गेंद यमुना में समा गई। प्रभु श्रीकृष्ण ने कदंब की डाल से 4:40 बजे यमुना रूपी गंगा में छलांग लगाई तो तुलसी घाट पर लीला देख रहे श्रद्धालुओं की सांसें मानों थम सी गईं।
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तुलसी घाट पर नाग नथैया लीला देखने के लिए उमड़ी लोगों की भीड़ ।
- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान कुछ क्षण तक लोग आश्चर्य से लहरों को निहारते रहे। सहसा नटवर नागर कालिया नाग के फन पर बंसी बजाते हुए नदी के बीचों बीच प्रकट हुए तो सुरसरि का किनारा जय श्री कृष्ण, हर-हर महादेव और डमरूओं की निनाद से गुंजायमान हो उठा।
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तुलसी घाट पर नाग नथैया लीला देखने के लिए उमड़ी लोगों की भीड़ ।
- फोटो : अमर उजाला
यह दृश्य था गुरुवार को 494 साल पुरानी श्रीकृष्ण लीला नागनथैया के दौरान। भगवान ने एक बार फिर से प्रदूषण के प्रतीक कालिया के फनों को नाथ दिया। प्रदूषण रूपी फुं फकार से यमुना के प्रवाह और गोकुल-वृंदावन की आबोहवा में जहर घोल रहे कालिया का दर्प भंगकर भगवान श्रीकृष्ण ने प्रकृति के संरक्षण का संदेश दिया।
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तुलसी घाट पर नागनथैया लीला देखने के लिए उमड़ी लोगों की भीड़ ।
- फोटो : अमर उजाला
परंपरागत रूप से कालियदह की लीला के साक्षी काशी राज परिवार के अनंत नारायण सिंह भी बने। परंपरा अनुसार, अनंत नारायण सिंह और संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने भगवान कृष्ण को माला पहनाई। लोगों ने भगवान के स्वरूप की आरती उतारी। संपूर्ण लीला क्षेत्र वृंदावन बिहारी लाल की जयकारे से गूंजता रहा।
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तुलसी घाट पर नाग नथैया लीला देखने के लिए उमड़ी लोगों की भीड़ ।
- फोटो : अमर उजाला
कालिय दह की लीला के साक्षी बनने के लिए तुलसीघाट पर दोपहर बाद से ही भीड़ जुटने लगी थी। पांच मिनट की अनूठी लीला के दर्शन के लिए अस्सी घाट से लेकर निषादराज घाट तक नौकाएं और बजड़े पटे रहे। काफी संख्या में विदेशी पर्यटक भी मौजूद रहे।
भगवान श्रीकृष्ण की आरती उतारते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने कहा- आज जरूरत है कि जन-जन भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका निभाए। भगवान ने जिस तरह से कालिया नाग का मान मर्दन कर यमुना को प्रदूषण से मुक्त किया, उसी तरह गंगा के उद्धार के लिए कदम उठाने की जरूरत है। कालिया नाग के प्रतीक स्वरूप नालों को गंगा में गिरने से रोकने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे।