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Hathras Stampede: देव प्रकाश मधुकर पर चौंकाने वाला खुलासा, अनुयायियों से इसलिए जुटाए थे 27 लाख रुपये!

Sat, 06 Jul 2024 12:20 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, एटा
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Hathras stampede - फोटो : अमर उजाला
हाथरस सत्संग कांड का मुख्य आरोपी देवप्रकाश मधुकर अनुयायियों से सत्संग के लिए रकम जुटाता था। ग्रामीणों के अनुसार, इस हादसे से पहले उसने 20 से 27 लाख रुपये अनुयायियों से एकत्रित किए थे। ऐसी चर्चा देव प्रकाश के गांव व आसपास के लोगों में है। 
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मुख्य आरोपी देवप्रकाश मधुकर, साकार हरि बाबा - फोटो : संवाद
शुक्रवार को मुख्य आरोपी देवप्रकाश मधुकर के गांव सलेमपुर में अमर उजाला की टीम पहुंची। सामने आया कि पिता रामसिंह और मां बृह्मादेवी गांव में रहती हैं। जबकि बड़ा भाई अखिलेश कस्बा निधौली कलां में रहता था। देवप्रकाश सेवादार के रूप में भोले बाबा का खास सिपहसालार है। उसको सत्संग के नाम पर रकम जुटाने की भी जिम्मेदारी दी गई थी। 
 
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Hathras Stampede - फोटो : अमर उजाला
इसी सत्संग में 20 से 27 लाख रुपये जुटाने की बात तमाम लोगों के हवाले से सामने आई है। बताया जा रहा है कि सलेमपुर व आसपास के गांव सहित सिकंदराराऊ क्षेत्र में उसने कई अनुयायी बनाए थे। इन लोगों से सत्संग के नाम पर रुपये लिए थे।

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hathras stampede - फोटो : अमर उजाला
एक जुलाई से गायब था देवप्रकाश
सेवादार देवप्रकाश मनरेगा में तकनीकी सहायक के पद पर ब्लॉक शीतलपुर में तैनात था। 20 गांवों का कार्य देख रहा था। वह एक जुलाई से बिना बताए अनुपस्थित चल रहा है।
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hathras stampede - फोटो : पीटीआई
भोले बाबा के सत्संग से 10 साल से जुड़ा है देवप्रकाश मधुकर
सिकंदराराऊ हादसे का मुख्य आरोपी देवप्रकाश मधुकर एटा जिले में मनरेगा में तकनीकी सहायक के रूप में तैनात है। हादसे के बाद वहां उसके खिलाफ सेवा समाप्ति की कार्रवाई की तैयारी भी शुरू हो गई है। सत्संग आयोजन में उसकी लगन को देखते हुए उसे मुख्य सेवादार की जिम्मेदारी दी गई थी।

 
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hathras stampede - फोटो : पीटीआई
सिकंदराराऊ के फुलरई मुगलगढ़ी में हुए सत्संग की अनुमति भी देवप्रकाश ने ही उपजिलाधिकारी सिकंदराराऊ से ली थी। इस कारण हादसे के बाद वह पुलिस के रडार पर है। उसके सिकंदराराऊ स्थित घर पर ताला लटका है। पुलिस कई बार उसके घर दबिश भी दे चुकी है। 

 
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hathras stampede - फोटो : पीटीआई
देवप्रकाश करीब 10 वर्ष पूर्व वह एटा जिले के अवागढ़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत सलेमपुर गादरी के मजरा सलेमपुर को छोड़कर सिकंदराराऊ में आकर बस गया। वर्तमान में वह सिकंदराराऊ के मोहल्ला दमदपुरा नई कॉलोनी में रह रहा है। 

 

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hathras stampede - फोटो : अमर उजाला
सिकंदराराऊ में आते ही वह भोले बाबा की मानव मंगल मिलन सद्भावना समागम समिति से जुड़ गया और धीरे-धीरे सत्संग आयोजन से जुड़े कार्यों के प्रति लगन को देखते हुए देव प्रकाश को मुख्य सेवादार की जिम्मेदारी मिल गई। हालांकि देव प्रकाश की मां ब्रह्मा देवी और पिता राम सिंह अभी भी अवागढ़ के गांव सलेमपुर में स्थित पैतृक मकान में ही रहते हैं।

 

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hathras stampede - फोटो : अमर उजाला
देवप्रकाश का बड़ा भाई अखिलेश कुमार निधौली कलां स्थित विद्युत निगम में लाइनमैन के पद कार्य करता है। पैतृक गांव में रहने के दौरान ही वह नारायण साकार हरि बाबा के सत्संग से जुड़ गया था। सिकंदराराऊ में आते ही यहां सत्संग के कार्यों में तल्लीनता से जुड़ने के कारण उसे मुख्य सेवादार की जिम्मेदारी मिल गई।
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hathras stampede - फोटो : अमर उजाला
मानदेय मात्र 11 हजार रुपये, लेकिन गांव से सिकंदराराऊ तक बना लिए मकान
देवप्रकाश मधुकर की आय और शान-बान को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। यहां मनरेगा में तकनीकी सहायक के रूप में उसे 11 हजार प्रतिमाह मानदेय मिलता था। इस मानदेय में पैतृक गांव से लेकर सिकंदराराऊ तक कैसे मकान बना लिए, इससे पर्दा उठना बाकी है।
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