यूपी के हाथरस में सत्संग में मची भगदड़ में 121 लोगों की मौत हो गई, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। सत्संग का आयोजन 'भोले बाबा' उर्फ बाबा नारायण हरि के संगठन ने किया था। मरने वालों में सात बच्चे और 100 से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं।
हादसे में कासगंज की प्रियंका की भी मौत हो गई। इसी वर्ष 12वीं परीक्षा में अच्छे अंकों से पास करने वाली कासगंज की प्रियंका (20) डॉक्टर बनना चाहती थी। मगर मां के साथ भोले बाबा के सत्संग में आने की जिद उसको मौत के मुंह तक खींच लाई।
विज्ञापन
2 of 12
hathras stampede
- फोटो : अमर उजाला
पोस्टमार्टम हाउस पर मां गुड्डो देवी रोते-रोते बदहवाश हो गईं और बेटी को बुलाने लगीं। किसी तरह से साथ में आई महिलाओं ने उनको संभालने का प्रयास किया।
विज्ञापन
3 of 12
hathras stampede
- फोटो : अमर उजाला
गांव बहटा थाना गंजडुंडवारा जिला कासगंज निवासी गुड्डो देवी का रो-रोकर बुरा हाल था। बार-बार पछाड़ें खाकर गिर रहीं थीं। साथ आई महिलाएं संभालने का प्रयास कर रही थीं, लेकिन वह रोते हुए बेटी को पुकार रही थी। गुड्डो देवी रो रोकर कह रही थी कि बेटी प्रियंका ने इसी साल अच्छे नंबरों से इंटर की परीक्षा पास की थी।
4 of 12
hathras stampede
- फोटो : अमर उजाला
वह डॉक्टर बनना चाहती थी। मगर मौत उसे भोले बाबा के सत्संग में खींच लाई। बताया कि मैंने उसको बहुत मना किया कि अगली बार चलना। इस बार घर पर ही रहो, लेकिन वह नहीं मानी। हमें क्या पता था कि उसको साथ लाना इतना भारी पड़ेगा।
विज्ञापन
5 of 12
hathras stampede
- फोटो : पीटीआई
यह कहकर गुड्डो देवी बेहोश हो गई। साथ में ही गई पड़ोसन पूजा ने बताया प्रियंका पढ़ने में काफी तेज थी। हाईस्कूल में भी उसके अच्छे नंबर आए थे। प्रियंका हमसे जब भी बात करती, कहती थी चाची में डॉक्टर बनूंगी।
विज्ञापन
6 of 12
hathras stampede
- फोटो : पीटीआई
उसकी यह तमन्ना एक ही पल में उसकी मौत के साथ दफन हो गई। पूजा ने बताया कि सत्संग के बाद अचानक हुई भगदड़ के चलते इतने लोगों की मौत हो गई। हम लोग किसी तरह से बचकर निकल आए।
विज्ञापन
7 of 12
hathras stampede
- फोटो : अमर उजाला
जमीन पर बिछी थीं लाशें, अपनों के चेहरों को पहचानने में जुटे थे परिजन
जमीन पर हर तरफ लाशें ही लाशें, उनमें अपनों के चेहरों को पहचानने की कोशिश करते लोग दिख रहे थे। ऐसा मंजर की जिसने भी देखा, रुह कांप गई। ट्रॉमा सेंटर को जाने वाले रास्ते पर हर तरफ वाहन, एंबुलेंस, अपनों की तलाश में दौड़ते लोग। हर किसी की जुबां पर बस यही था कि ऐसा मंजर कभी नहीं देखा है।
8 of 12
hathras stampede
- फोटो : पीटीआई
ट्रॉमा सेंटर के पूरे परिसर में हर तरफ चीत्कार मची हुई थी। आलम यह था कि परिसर व परिसर में बने ट्रॉमा सेंटर गैलरियों में शव बिछे हुए थे, जो भी व्यक्ति परिसर में पहुंचा, सबसे पहले वह शवों की गिनती करने में जुट गया। गर्मी व घुटन के बीच हर व्यक्ति की जुबां पर बस यही था कि ऐसा मंजर तो कभी नहीं देखा।
9 of 12
hathras stampede
- फोटो : पीटीआई
मृतकों के परिजनों को जैसे ही यह घटना की जानकारी मिल रही थी वैसे ही वह सिकंदराराऊ की ओर दौड़ रहे थे। परिजन परिसर में पहुंचते ही अपने अपने शवों की पहचान करने में जुटे हुए थे। शवों के चेहरों को देख देख कर परिजनों की चीत्कार चारों ओर गूंज रही थी।
10 of 12
साकार हरि बाबा
- फोटो : Facebook/Narayan sakar Hari
भोले बाबा के भक्त पहले भी हो चुके हैं हादसों का शिकार
भोलेबाबा के सत्संग व आश्रम में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में भक्तों का आवागमन होता रहा है। अत्यधिक भीड़ के कारण मार्गों पर दबाव रहता है। पटियाली की ओर आने जाने वाली ट्रेनों में भी भीड़ उमड़ती है। ऐसी स्थिति में कई बार हादसे हो चुके हैं।
11 of 12
साकार हरि बाबा
- फोटो : Facebook/Narayan sakar Hari
वर्ष 2022 में 3 मई को पटियाली-कायमगंज मार्ग पर सुबह के समय बोलेरो और ऑटो में जबरदस्त भिड़ंत हुई। इस भिड़ंत में करीब दस लोगों की मौत हो गई और दर्जन लोग घायल हुए। मृतकों में एक ही परिवार के 5 लोग थे। बोलेरो और ऑटो दोनों ही वाहन मंगलवार को भोले बाबा के आश्रम में आने जाने वाले थे।
साकार हरि बाबा
- फोटो : Facebook/Narayan sakar Hari
इस हादसे से उस समय तमाम सवाल खड़े हुए। यह हादसा अशोकपुर गांव के निकट हुआ था। इससे पूर्व भी ट्रेन की चपेट में आकर दो भक्त महिलाएं व एक बच्ची ट्रेन हादसे में मौत का शिकार हुईं। इस तरह के तमाम हादसे होते रहे हैं, लेकिन इन हादसों के बावजूद भोलेबाबा के भक्तों के आश्रम में आने का सिलसिला कभी रुका नहीं।