यमुना नदी किनारे बसे लगभग तीन हजार की आबादी वाले चित्रकूट जिले के खोपा गांव में मस्ती ने पांच जिंदगी खामोश कर दी। गांव में परचून की दुकान पर आसानी से सस्ती मिलने से इस शराब की युवा पीढ़ी शिकार हो रही है। इस कांड ने सभी को हिला कर रख दिया है। कहने को तो यह कच्ची या गांव बस्ती में बनने वाली शराब नहीं थी, मस्ती ब्रांड शासन से स्वीकृत देसी शराब का ब्रांड है।
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चित्रकूट: जहरीली शराब पीने से पांच लोगों की मौत का मामला
- फोटो : अमर उजाला
खोपा गांव में अधिकारियों का जमावड़ा है, सुरक्षा व शांति व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात है। गांव से 15 किमी दूर स्थित देसी शराब के ठेके से ही इन परचून की दुकानों में शराब बेचने को आती है। आखिर इस देसी शराब में क्या था ?, जो सात परिवारों के लिए मुसीबतों का पहाड़ बन गई।
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जानकारों की मानें तो शासन के ब्रांड की नकल कर ठेकेदार कच्ची व जहरीली शराब भी बोतलों में भरकर गांवों में बेचते हैं। अब इसकी जांच होगी, लेकिन उन चार जिंदगी व उनके परिजनों का क्या होगा ?, जो इस जहरीली शराब का शिकार हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि असली गुनाहगारों को सजा मिलनी चाहिए। ताकि भविष्य में दोबारा ऐसी हृदय विदारक घटना न हो सके।
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आईजी के सत्यनारायण व एसपी अंकित मित्तल ने दावा किया है कि इस मामले में किसी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा। पूरी जांच कराई जाएगी। परचून की दुकान से बरामद बची शराब और ठेके की शराब के सैंपल की जांच भेजी गई है। शराब के ठेकेदार आरपी यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है।
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आपदाओं का दंश झेलता खोपा गांव
यमुना किनारे के इस खोपा गांव में छह पुरवा हैं। अक्सर इस गांव में आपदाएं आती रहती हैं। पांच साल के भीतर दो बार पुरवा में भीषण अग्निकांड हुआ था, जिसमें 24 मवेशी मरे व कई ग्रामीण झुलसे और लाखों की संपत्ति जल गई। किशोर का पुरवा व पंचा का पुरवा के लोगों ने दर्द झेला है।
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पूर्व जिला पंचायत सदस्य शिवशंकर सिंह व समाजसेवी सुभाष अग्रवाल ने बताया कि प्राकृतिक आपदा से तो कोई नहीं बच सकता, लेकिन शराब पीने से तो लोगों को रोका जा सकता है। नकली व जहरीली शराब बेचने वालों को सजा मिलनी चाहिए। मृतकों के परिजनों को आर्थिक मदद भी मिलनी चाहिए।